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कहीं पहली पत्नी से विवाद तो नहीं हत्या की वजह

Tue, 21 Mar 2017 12:08 AM IST
auraiya,amar ujala beauro
auraiya,amar ujala beauro Updated Tue, 21 Mar 2017 12:08 AM IST
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If there is a dispute with the first wife, the reason for not killing
घटनास्थल का निरीक्षण करते डीआईजी राजेश डी मोदक, एसपी औरैया रामकिशोर - फोटो : अमर उजाला
कस्बे में हुए ट्रिपल मर्डर के बाद पुलिस और रेलकर्मियों के जुबान पर यही बात रही कि कहीं पहली पत्नी से विवाद तो हत्या का कारण नहीं है। सेवानिवृत्ति से पहले रेलवे कर्मी की मौत से मृतक आश्रित की नौकरी और मिलने वाला लाखों रुपये का फंड तो मौत का कारण नहीं है।
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नौशाद उर्फ नौशे की पहली शादी फिरोजाबाद में रहने वाली जरीना से हुई थी। शादी के कई वर्षों बाद जरीना से नौशाद की नहीं पटी तो तलाक की नौबत आ गई। इस पर जरीना और उसके दो बेटे मोहम्मद आफाक एवं मोहम्मद आसाद फिरोजाबाद चले गए। तलाक के बाद वर्ष 2002 में नौसे को पत्नी एवं दोनों बेटों के गुजारा भत्ता के लिए कोर्ट ने 1350 रुपये प्रतिमाह देने का आदेश सुनाया।
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इसके बाद से लगातार जरीना को वेतन से काटकर रुपये भेजे जाने लगे। वर्ष 2009 में उच्च न्यायालय के आदेश पर तीन हजार रुपये गुजारा भत्ता नगद देना शुरू किया। कुछ दिन पहले जरीना ने दोबारा न्यायालय से आदेश कराया था कि उसे 6 हजार रुपये गुजारा भत्ता दिया जाए। इसके विरोध में नौशाद ने रिट दाखिल की थी। रेलकर्मी बताते हैं कि नौशाद प्रतिमाह कोर्ट के माध्यम से गुजारा भत्ता के रुपये देने जाता था। इस बीच रेलवे कालोनी स्थित सरकारी क्वार्टर संख्या 102 पर एक बेटा भी आता रहता था।
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कालोनी निवासी बताते हैं कि उसे भी नौशाद अक्सर रुपये देता था। लोगों की जुबान पर पूरे दिन यही बात रही कि कहीं पहली पत्नी से विवाद के कारण ही तो यह हत्या नहीं हुई। डीआईजी राजेश डी मोदक का कहना है कि निश्चित तौर पर यह हत्याकांड किसी परिचित ने ही अंजाम दिया है। क्योंकि रात के समय किसी परिचित को ही आराम से घर में प्रवेश मिल सकता है। सभी पहलुओं पर जांच आगे बढ़ेगी। एसपी ने बताया कि पोस्टमार्टम देर रात तक होगा। रिपोर्ट मंगलवार को मिलेगी। पहली पत्नी का बेटा फिरोजाबाद में रहता है। उसको सूचना भेजी है। वह आ रहा है।

पहली पत्नी के बेटों को जी जान से चाहता था नौसे
नौशाद पहली पत्नी के बेटों अफाक एवं आसाद से खूब प्यार करता था। कालोनी के निवासियों ने बताया कि उसके दोनों पुत्र जब भी कालोनी आते थे। तीनों एक साथ बैठकर खाते थे। वर्ष 2002 में गुजारा भत्ता दिए जाने के आदेश के बाद भी वर्ष 2003 में नौशाद ने दोनों बेटों के नाम रेलवे पास जारी कराया था। कई रेलकर्मियों ने तो यहां तक बताया कि नौशाद अक्सर कहता था कि सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाखों रुपये के फंड में से आधा हिस्सा पहली पत्नी एवं बेटों को देगा।

नौसे ने की थीं तीन शादियां
रेलकर्मी नौसे ने तीन शादियां की थीं। पहली शादी फिरोजाबाद निवासी जरीना थी। जरीना से दो बेटे और एक बेटी थी। तलाक के बाद दूसरी शादी कन्नौज निवासी एक महिला से की थी। वह तीन माह साथ रहने के बाद कन्नौज चली गई थी। जबकि तीसरी शादी लगभग छह वर्ष पहले आस्मीन पुत्री जाबिर मियां निवासी चिकसौरा सकूराबाद जहानाबाद बिहार के साथ हुई थी। शादी के बाद आस्मीन ने एक पुत्री को जन्म दिया था। बाद में उसकी मौत हो गई थी। जबकि दूसरी पुत्री की रविवार रात हत्या हो गई।

नौसे के ससुराली रुक जाते तो नहीं होता मर्डर
रेलकर्मी बताते हैं कि पिछले सप्ताह आस्मीन के मायके से उसकी मां, भाई एवं बहन आई थीं। शनिवार को वह वापस भी चले गए। अगर नौसे के ससुराली दिबियापुर स्थित घर पर होते तो यह मर्डर नहीं हो पाता। रेलकर्मी बताते हैं कि नौसे शनिवार को गया रेलवे स्टेशन तक ससुरालियों के जाने के लिए तत्काल आरक्षण के लिए आरक्षण काउंटर पर पहुंचा था। परंतु आरक्षण नहीं हो पाया था। संभवतया अनारक्षित सीट पर ही नौसे के ससुरालीजन चले गए।

हत्या में शामिल हो सकते हैं कई लोग
रेलकर्मी बताते हैं कि नौसे का खान पान अच्छा था। वह कोई धूम्रपान भी नहीं करता था। इसलिए उसका दो तीन लोग कुछ नहीं बिगाड़ सकते थे। रेलकर्मियों का मानना है कि ट्रिपल मर्डर करने वाले तीन चार से अधिक लोग होंगे।


डेढ़ माह पहले आजाद नगर स्थित मकान में आया था
दिबियापुर (औरैया)। मकान मालिक ताराचंद्र पोरवाल ने हत्या की रिपोर्ट दिबियापुर थाने में दर्ज कराई है। ताराचंद्र के अनुसार नौशाद डेढ़ माह पहले ही उनके आजाद नगर स्थित मकान में रहने आया था। मकान में अकेला वही रहता था। हालांकि प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि रेलवे कर्मी नौशाद की पत्नी आस्मीन के चिकनौरा सकूराबाद जहानाबाद बिहार निवासी परिजनों से बात हो गई है। वह लोग मंगलवार सुबह तक पहुंचेंगे। वहां मिले मोबाइल से मृतक महिला के परिजनों से ही बात हो पाई। उन्होंने बताया कि घर में मिले मोबाइल नंबर की सीडीआर भी निकालवाई जा रही है। इससे वारदात के संबंध में सुराग मिल सकते हैं।

प्रमोशन के बाद भी लोहार का काम करता रहा
वर्ष 1979 में रेलवे में लोहार के पद पर भर्ती हुए नौशाद उर्फ नौशे का प्रमोशन एमसीएम (समकक्ष जेई) के पद तक हुआ। लेकिन अपने काम में पारंगत होने और पूरे इलाहाबाद मंडल में सम्मान के कारण वह लोहार के पद से ही रिटायर्ड होना चाहते थे। मौके पर पहुंचे इटावा के वरिष्ठ खंड अभियंता एनके चंद्रवंशी का कहना है कि नौशे ने कभी किसी काम के लिए इनकार नहीं किया। न ही आज तक किसी से उसका विवाद हुआ। वह अपने काम में पारंगत था। इसलिए पूरे इलाहाबाद मंडल में उसकी पूछ होती थी।


साइकिल पर तिरंगा लगाकर चलता था
मृतक नौसे के व्यवहार एवं राष्ट्र प्रेम को सभी याद करते हैं। लोग बताते हैं कि नौसे व्यवहार कुशल था। उसके सिर पर हमेशा एक टोपी रहती थी और साइकिल के आगे तिरंगा झंडा।
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