{"_id":"5f4a9a968ebc3e3d152a9621","slug":"crime-auraiya-news-knp579590364","type":"story","status":"publish","title_hn":"एजेंट का रेल ट्रैक पर शव मिलने के मामले की गुत्थी उलझी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एजेंट का रेल ट्रैक पर शव मिलने के मामले की गुत्थी उलझी
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दिबियापुर (औरैया)। बीमा अभिकर्ता मनोज दुबे का रेलवे ट्रैक पर क्षत विक्षत शव मिलने के बाद परिवार के लोग हत्या का आरोप लगाते हुए घटना के खुलासे की मांग कर रहे हैं। इस बीच पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर कहा कि गायब मनोज शुक्रवार की सुबह ही केंजरी रेलवे क्रासिंग से बाइक से अकेले एक ओर से दूसरी ओर जाते दिखाई दिए थे। इससे बीमा एजेंट के मौत की गुत्थी उलझती जा रही है।
शनिवार की सुबह जिले की पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर बताया कि गायब मनोज शुक्रवार को अपनी बाइक के साथ घटनास्थल के पास की रेलवे क्रासिंग केंजरी से गुजरते हुए दिखाई दिए हैं। सीओ सुरेंद्र नाथ ने बताया कि बीमा एजेंट मनोज दुबे का मोबाइल सोमवार की सुबह 10:05 बजे स्विच आफ हो गया था। शुक्रवार को केंजरी फाटक पर 7:56 बजे यह दिबियापुर की ओर क्रास करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके 10 मिनट बाद 8 बजकर 12 मिनट पर दोबारा वापस जाते दिखाई दे रहे हैं घटनास्थल की तरफ। गहनता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं सभी परिस्थितियों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज जारी होने के बाद मनोज दुबे के साथ हुई घटना की गुत्थी हत्या एवं आत्महत्या के बीच उलझ गई है।
नगर के हरेक व्यक्ति यह जानने को बेताब दिखा कि यदि घटना के दिन ही सुबह के समय मनोज दुबे ने रेलवे क्रासिंग केंजरी पार की। तो आखिरकार चार दिनों तक मनोज दुबे कहां रहे, कहां खाना खाया और आखिरकार इतनी चेकिंग के बावजूद मनोज दुबे और उनकी बाइक पुलिस की नजर में क्यों नहीं आई।
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परिवार के लोग किसी भी कीमत पर मनोज दुबे के शव मिलने के मामले को ट्रेन एक्सीडेंट या आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि हत्या के बाद ही शव को रेलवे ट्रैक पर फेंका गया। मनोज के जानने वालों का कहना है कि रेलवे ट्रैक पर मनोज का क्षत विक्षत शव मिला। जेब में पेन लगा हुआ था। जबकि मोबाइल भी मिला है। दिन की घटना होने के कारण किसी ट्रेन के सामने आने पर उस ट्रेन के ड्राइवर द्वारा सूचना फफूंद रेलवे स्टेशन पर दी जानी चाहिए थे। जबकि ऐसा नहीं हुआ।
इस बीच मनोज दुबे के कई परिचितों ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई अधिकारियों को टैग कर ट्वीट किया। उनके परिचित अमित पांडेय ने ट्वीट कर कहा कि हत्या के केस को आत्महत्या बताकर परिवार एवं समाज की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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शनिवार की सुबह जिले की पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर बताया कि गायब मनोज शुक्रवार को अपनी बाइक के साथ घटनास्थल के पास की रेलवे क्रासिंग केंजरी से गुजरते हुए दिखाई दिए हैं। सीओ सुरेंद्र नाथ ने बताया कि बीमा एजेंट मनोज दुबे का मोबाइल सोमवार की सुबह 10:05 बजे स्विच आफ हो गया था। शुक्रवार को केंजरी फाटक पर 7:56 बजे यह दिबियापुर की ओर क्रास करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके 10 मिनट बाद 8 बजकर 12 मिनट पर दोबारा वापस जाते दिखाई दे रहे हैं घटनास्थल की तरफ। गहनता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं सभी परिस्थितियों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज जारी होने के बाद मनोज दुबे के साथ हुई घटना की गुत्थी हत्या एवं आत्महत्या के बीच उलझ गई है।
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नगर के हरेक व्यक्ति यह जानने को बेताब दिखा कि यदि घटना के दिन ही सुबह के समय मनोज दुबे ने रेलवे क्रासिंग केंजरी पार की। तो आखिरकार चार दिनों तक मनोज दुबे कहां रहे, कहां खाना खाया और आखिरकार इतनी चेकिंग के बावजूद मनोज दुबे और उनकी बाइक पुलिस की नजर में क्यों नहीं आई।
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परिवार के लोग किसी भी कीमत पर मनोज दुबे के शव मिलने के मामले को ट्रेन एक्सीडेंट या आत्महत्या मानने को तैयार नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि हत्या के बाद ही शव को रेलवे ट्रैक पर फेंका गया। मनोज के जानने वालों का कहना है कि रेलवे ट्रैक पर मनोज का क्षत विक्षत शव मिला। जेब में पेन लगा हुआ था। जबकि मोबाइल भी मिला है। दिन की घटना होने के कारण किसी ट्रेन के सामने आने पर उस ट्रेन के ड्राइवर द्वारा सूचना फफूंद रेलवे स्टेशन पर दी जानी चाहिए थे। जबकि ऐसा नहीं हुआ।
इस बीच मनोज दुबे के कई परिचितों ने भी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई अधिकारियों को टैग कर ट्वीट किया। उनके परिचित अमित पांडेय ने ट्वीट कर कहा कि हत्या के केस को आत्महत्या बताकर परिवार एवं समाज की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।