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कोरोना की तीसरी जंग में और भी मुश्किलें
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औरैया। कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच बाल रोग विशेषज्ञों की कमी खतरा बन सकती है। अधिकारी बचाव के इंतजाम तो कर रहे हैं। अस्पतालों में बच्चों के लिए वार्ड भी बनाए गए हैं लेकिन विशेषज्ञ न होने से मशीनें भी कोई काम नहीं आएंगी। सीएमओ का कहना है कि शासन को पत्र लिखा है लेकिन डेढ़ माह बाद भी कोई जवाब नहीं मिला है।
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंका है। विभागीय अधिकारी संसाधन जुटाने में लगे हैं। काफी हद तक संसाधन तो जुटाए जा चुके है लेकिन उन्हें चलाने के लिए मैन पावर की कमी आड़े आ रही है।
चार अस्पतालों में बने पीकू वार्ड में सिर्फ एक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। जबकि अन्य में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। चिचौली स्थित जिला अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में बीमार बच्चों को फिजीशियन ही देख रहे हैं। गंभीर बीमार बच्चों को रेफर किया जा रहा है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों का इलाज नहीं किया जा रहा है।
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अब तक यह किए गए हैं इंतजाम
- चिचौली स्थित जिला अस्पताल में तीन ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना। जिसमें एक बनकर हुआ तैयार।
- चार अस्पतालों में पीकू वार्ड तैयार। जिला अस्पताल में 40 बेड व अन्य में 20 बेड के बने वार्ड।
- ऑक्सीजन की समस्या से निपटने के लिए विभाग के पास हैं 120 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर।
बाल रोग विशेषज्ञ विहीन अस्पताल
बाल रोग चिकित्सक की तैनाती चिचौली स्थित जिला अस्पताल में हैं। इसके अलावा अन्य पीकू वार्ड में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। फिजीशियन के सहार बच्चों का उपचार हो रहा है।
वर्जन
जिले में बाल रोग विशेषज्ञ और मैन पावर की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। हालांकि तीसरी लहर से निपटने के लिए 60 स्वास्थकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्हें मशीन चलाने व उपचार की जानकारी दी गई है। - डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ
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कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंका है। विभागीय अधिकारी संसाधन जुटाने में लगे हैं। काफी हद तक संसाधन तो जुटाए जा चुके है लेकिन उन्हें चलाने के लिए मैन पावर की कमी आड़े आ रही है।
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चार अस्पतालों में बने पीकू वार्ड में सिर्फ एक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। जबकि अन्य में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। चिचौली स्थित जिला अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में बीमार बच्चों को फिजीशियन ही देख रहे हैं। गंभीर बीमार बच्चों को रेफर किया जा रहा है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों का इलाज नहीं किया जा रहा है।
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अब तक यह किए गए हैं इंतजाम
- चिचौली स्थित जिला अस्पताल में तीन ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना। जिसमें एक बनकर हुआ तैयार।
- चार अस्पतालों में पीकू वार्ड तैयार। जिला अस्पताल में 40 बेड व अन्य में 20 बेड के बने वार्ड।
- ऑक्सीजन की समस्या से निपटने के लिए विभाग के पास हैं 120 ऑक्सीजन कन्संट्रेटर।
बाल रोग विशेषज्ञ विहीन अस्पताल
बाल रोग चिकित्सक की तैनाती चिचौली स्थित जिला अस्पताल में हैं। इसके अलावा अन्य पीकू वार्ड में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। फिजीशियन के सहार बच्चों का उपचार हो रहा है।
वर्जन
जिले में बाल रोग विशेषज्ञ और मैन पावर की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। हालांकि तीसरी लहर से निपटने के लिए 60 स्वास्थकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्हें मशीन चलाने व उपचार की जानकारी दी गई है। - डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, सीएमओ