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शौचालय में बंधी बकरी और भरा कंडा
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अछल्दा (औरैया)। ब्लाक अछल्दा के ग्राम पंचायत दसेरा व उसके मजरा पुरवाघासी में वर्षों से अधूरे पड़े शौचालय भ्रष्टाचार की कहानी उजागर कर रहे है। ग्रामीणों की मांग के बाद भी शौचालय पूरा नहीं कराया जा रहा है। हालात यह है कि लोग आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। आधे-अधूरे शौचालय का प्रयोग न होने के कारण, ग्रामीण भी उसमें बकरी बांध रहे हैं और कुडा भरे हैं। मामला संज्ञान में आने के बाद अधिकारियों ने जांच कराने की बात कही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुले में शौच से मुक्त की घोषणा कर चुके हैं। इसलिए योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनवाए जा रहे हैं। लेकिन जिले में हालात इससे विपरीत हैं। कई गांवों में लाभार्थियों को शौचालय नहीं मिले तो कुछ के शौचालय अधूरे पड़े हैं। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत चयनित पात्रों को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं।
ग्राम प्रधान और सचिव की जिम्मेदारी होती है कि पात्रों के शौचालय अपनी देखरेख में बनवाएं। अछल्दा ब्लाक के ग्राम पंचायत दसेरा में वर्ष 2019 में शौचालय के लिए चयनित किए गए लाभार्थियों के शौचालय स्वयं तत्कालीन प्रधान ने बनवाए हैं। लाभार्थियों का आरोप है कि निर्माण के दौरान शौचालय अधूरे छोड़ दिए गए है। किसी में गड्ढे, कहीं सीट, छत या दरवाजे नहीं हैं। जिससे आज भी गांव के काफी शौचालय अधूरे हैं और लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।
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दसेरा ग्राम पंचायत के मजरा पुरवाघासी में अधूरे पड़े शौचालयों का भले ही शौच के लिए इस्तेमाल न किया जा रहा हो, लेकिन लाभार्थी इन्हें अन्य प्रयोग में ला रहे है। किसी ने कंडे भर रखे हैं तो कोई खेती से जुड़े सामान को शौचालय में रखना शुरू कर दिया है। वहीं कई लोग बकरियां बांध रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि शीट, छत और दरवाजे विहीन शौचालय उनके प्रयोग लायक नहीं हैं।
पुरवाघासी की रहने वाली चरनादेवी ने बताया कि दो साल पहले उनके नाम से शौचालय दिया गया था। जिसे ग्राम प्रधान ने बनवाया था। उनके शौचालय में आज तक शीट नहीं। इसलिए उसे इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
पुरवाघासी की निर्मला देवी ने बताया कि शौचालय अधूरा होने से वह दूसरे प्रयोग में ला रही है। शौचालय पूरा न हो पाने के कारण वह व परिवार के लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। मगर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
वर्जन
दसेरा गांव में अधूरे पड़े शौचालयों की जानकारी नहीं है। खुद गांवों में जांच करने जाऊंगा और जनता की समस्याओं के निस्तारण की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा आधे-अधूरे शौचालयों की जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ करवाई की जाएगी।- अनिल कुमार सिंह, सीडीओ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुले में शौच से मुक्त की घोषणा कर चुके हैं। इसलिए योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय बनवाए जा रहे हैं। लेकिन जिले में हालात इससे विपरीत हैं। कई गांवों में लाभार्थियों को शौचालय नहीं मिले तो कुछ के शौचालय अधूरे पड़े हैं। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत चयनित पात्रों को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं।
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ग्राम प्रधान और सचिव की जिम्मेदारी होती है कि पात्रों के शौचालय अपनी देखरेख में बनवाएं। अछल्दा ब्लाक के ग्राम पंचायत दसेरा में वर्ष 2019 में शौचालय के लिए चयनित किए गए लाभार्थियों के शौचालय स्वयं तत्कालीन प्रधान ने बनवाए हैं। लाभार्थियों का आरोप है कि निर्माण के दौरान शौचालय अधूरे छोड़ दिए गए है। किसी में गड्ढे, कहीं सीट, छत या दरवाजे नहीं हैं। जिससे आज भी गांव के काफी शौचालय अधूरे हैं और लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।
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दसेरा ग्राम पंचायत के मजरा पुरवाघासी में अधूरे पड़े शौचालयों का भले ही शौच के लिए इस्तेमाल न किया जा रहा हो, लेकिन लाभार्थी इन्हें अन्य प्रयोग में ला रहे है। किसी ने कंडे भर रखे हैं तो कोई खेती से जुड़े सामान को शौचालय में रखना शुरू कर दिया है। वहीं कई लोग बकरियां बांध रहे हैं। ग्रामीण बताते हैं कि शीट, छत और दरवाजे विहीन शौचालय उनके प्रयोग लायक नहीं हैं।
पुरवाघासी की रहने वाली चरनादेवी ने बताया कि दो साल पहले उनके नाम से शौचालय दिया गया था। जिसे ग्राम प्रधान ने बनवाया था। उनके शौचालय में आज तक शीट नहीं। इसलिए उसे इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
पुरवाघासी की निर्मला देवी ने बताया कि शौचालय अधूरा होने से वह दूसरे प्रयोग में ला रही है। शौचालय पूरा न हो पाने के कारण वह व परिवार के लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। मगर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
वर्जन
दसेरा गांव में अधूरे पड़े शौचालयों की जानकारी नहीं है। खुद गांवों में जांच करने जाऊंगा और जनता की समस्याओं के निस्तारण की कोशिश की जाएगी। इसके अलावा आधे-अधूरे शौचालयों की जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ करवाई की जाएगी।- अनिल कुमार सिंह, सीडीओ