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औरैयाः जर्जर स्कूल में खतरे के बीच पढ़ाई कर रहे बच्चे
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बारिश में ढही चहारदीवारी व शौचालय । संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। परिषदीय स्कूलों के जर्जर भवनों में खतरे की घंटी बज रही है। ये स्कूल तो सिर्फ बानगी है। जिले में 1265 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें से 100 से ज्यादा ऐसे स्कूल हैं जिनमें नौनिहाल खतरों के बीच पढ़ने के लिए मजबूर हैं। किसी की छत जर्जर है तो किसी का छज्जा। एक ही कमरे में पांच-पांच कक्षाएं चलाई जा रही हैं। बारिश के साथ ऐसे स्कूलों में छुट्टी की घंटी बज जाती है। सही सलामत कमरे न होने पर दूसरे स्थानों पर पढ़ाई करानी पड़ती है।
प्राथमिक विद्यालय पोरवाल धर्मशाला में दो कमरे हैं, इनमें से एक कमरे की फर्श नींव से छह फिट तक धंस गई है। इस वजह से इस कमरे में कक्षाएं संचालित नहीं की जाती है। फर्श धंसने से स्कूल के पीछे बने तालाब का पानी कमरे तक पहुंच रहा है। वहीं आवारा पशु भी अंदर घुस कर गंदगी फैला रहे हैं। इससे स्कूल में पढ़ने पहुंच रहे बच्चों को खतरा बना हुआ है। वहीं कमरा और फर्श जर्जर होने के कारण एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक की कक्षाएं संचालित की जा रही है।
इधर गुरुवार को बारिश होने के कारण स्कूल की चहारदीवारी व शौचालय भी गिर गया। ऐसी स्थिति में बच्चों को हर वक्त खतरा बना हुआ है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने कहा कि जर्जर विद्यालय के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, इस संबंध में अधिशासी अधिकारी से वार्ता करेंगे। कार्याकल्प योजना के तहत विद्यालय में जो भी कमियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा।
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स्कूल में 37 बच्चे, अभिभावक नहीं कराते प्रवेश
प्राथमिक स्कूल पोरवाल धर्मशाला में कक्षा से पांच तक 37 बच्चे पंजीकृत है। हालात यह है कि स्कूल की स्थिति जर्जर देख आस पड़ोस के लोग बच्चों का प्रवेश नहीं कराते हैं। एकल विद्यालय होने के कारण यहां पर एक प्रधानाध्यापक की तैनाती है।
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प्राथमिक विद्यालय पोरवाल धर्मशाला में दो कमरे हैं, इनमें से एक कमरे की फर्श नींव से छह फिट तक धंस गई है। इस वजह से इस कमरे में कक्षाएं संचालित नहीं की जाती है। फर्श धंसने से स्कूल के पीछे बने तालाब का पानी कमरे तक पहुंच रहा है। वहीं आवारा पशु भी अंदर घुस कर गंदगी फैला रहे हैं। इससे स्कूल में पढ़ने पहुंच रहे बच्चों को खतरा बना हुआ है। वहीं कमरा और फर्श जर्जर होने के कारण एक ही कमरे में कक्षा एक से पांच तक की कक्षाएं संचालित की जा रही है।
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इधर गुरुवार को बारिश होने के कारण स्कूल की चहारदीवारी व शौचालय भी गिर गया। ऐसी स्थिति में बच्चों को हर वक्त खतरा बना हुआ है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने कहा कि जर्जर विद्यालय के संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, इस संबंध में अधिशासी अधिकारी से वार्ता करेंगे। कार्याकल्प योजना के तहत विद्यालय में जो भी कमियां हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा।
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स्कूल में 37 बच्चे, अभिभावक नहीं कराते प्रवेश
प्राथमिक स्कूल पोरवाल धर्मशाला में कक्षा से पांच तक 37 बच्चे पंजीकृत है। हालात यह है कि स्कूल की स्थिति जर्जर देख आस पड़ोस के लोग बच्चों का प्रवेश नहीं कराते हैं। एकल विद्यालय होने के कारण यहां पर एक प्रधानाध्यापक की तैनाती है।

जमीदोंज विद्यालय परिसर का जमीदोंज कक्ष और लोटते सूअर। संवाद- फोटो : AURAIYA

विद्यालय परिसर की चटकी दीवार। संवाद- फोटो : AURAIYA

जर्जर स्कूल के एक कमरे में पढ़ते बच्चे। संवाद- फोटो : AURAIYA