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दूसरे दिन भी बंद रहा गल्ला मंडी में कारोबार
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कारोबार ठप रहने से मंडी में पसरा सन्नाटा। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। गेहूं के निर्यात पर अचानक लगी रोक के बाद आढ़तियों का करोड़ों रुपये का गेहूं बंदरगाहों पर फंस गया है। बंदरगाह पर खड़े ट्रकों से गेहूं न उतारे जाने से आक्रोशित आढ़तियों ने दूसरे दिन गुरुवार को भी गल्ला मंडी बंद रखी। उनका कहना है कि ट्रकों में बंद गेहूं बंदरगाहों पर न उतारे जाने से प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
सरकार की ओर से गेहूं निर्यात पर लगाई गई रोक को लेकर परेशान गल्ला आढ़तियों ने दूसरे दिन गुरुवार को भी गल्ला मंडी बंद रखी। जिससे जहां मंडी में सन्नाटा पसरा रहा वहीं लाखों रुपये राजस्व का नुकसान भी हुआ। गल्ला व्यापार मंडल के महामंत्री जमाली सिंह व आढ़ती जसोदानंदन ने बताया कि शहर के कई बड़े आढ़तियों का लगभग एक सैकड़ा ट्रकों में लदा ढाई करोड़ रुपये कीमत का गेहूं अभी तक उतरना शुरू नहीं हुआ है।
जिससे प्रति ट्रक उनसे प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त भाड़ा वसूला जा रहा है। ऐसे में गेहूं बेचने में बचने वाले मुनाफे तो जा रही रहा है। इसके अलावा अब उनकी जमापूंजी भी इसी में खर्च हो रही है। मंडी सचिव अरुण गुप्ता ने बताया कि आढ़तियों को काफी समझाया गया है, लेकिन वह मंडी खोलने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं बता रहे हैं। ऐसे में प्रतिदिन मंडी को लगभग 25 लाख रुपये राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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सरकार की ओर से गेहूं निर्यात पर लगाई गई रोक को लेकर परेशान गल्ला आढ़तियों ने दूसरे दिन गुरुवार को भी गल्ला मंडी बंद रखी। जिससे जहां मंडी में सन्नाटा पसरा रहा वहीं लाखों रुपये राजस्व का नुकसान भी हुआ। गल्ला व्यापार मंडल के महामंत्री जमाली सिंह व आढ़ती जसोदानंदन ने बताया कि शहर के कई बड़े आढ़तियों का लगभग एक सैकड़ा ट्रकों में लदा ढाई करोड़ रुपये कीमत का गेहूं अभी तक उतरना शुरू नहीं हुआ है।
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जिससे प्रति ट्रक उनसे प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त भाड़ा वसूला जा रहा है। ऐसे में गेहूं बेचने में बचने वाले मुनाफे तो जा रही रहा है। इसके अलावा अब उनकी जमापूंजी भी इसी में खर्च हो रही है। मंडी सचिव अरुण गुप्ता ने बताया कि आढ़तियों को काफी समझाया गया है, लेकिन वह मंडी खोलने को लेकर अभी कोई निर्णय नहीं बता रहे हैं। ऐसे में प्रतिदिन मंडी को लगभग 25 लाख रुपये राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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