{"_id":"4cc4c49a1d318b0ca97a769165a8d49c","slug":"baba-caused-by-paramahansa-develop-dibiapur-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाबा परमहंस की वजह से हुआ दिबियापुर का विकास ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाबा परमहंस की वजह से हुआ दिबियापुर का विकास
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Sat, 25 Apr 2015 01:08 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बाबा परमहंस के 16 वर्ष पूर्व समाधिस्थ होने के बाद आज भी श्रृद्धालुओं का उन पर भरोसा कम नहीं हुआ है। श्रृद्धालुओं का मानना है कि आज जो भी दिबियापुर की तरक्की है, उन्हीं के आशीर्वाद का प्रतिफल है। विभिन्न जाति, धर्म, संप्रदाय से जुड़े लोगों में उनके प्रति आस्था हैं।
विज्ञापन
सुबह और शाम होने वाली नियमित आरती एवं भोग के समय श्रद्धालु सम्मिलित होत हेैं। इस बार उनकी स्मृति में 16वां वार्षिकोत्सव शुक्रवार 24 अप्रैल से प्रारंभ हो गया और पांच मई तक चलेगा। आसपास के कई जिलों के श्रृद्धालु धर्मानुष्ठान में पहुंचेंगे।
विज्ञापन
बाबा के दर से आज तक कोई खाली नहीं लौटा - बाबा परमहंस के अनन्य भक्त उमाकांत सोनी का कहना है कि ब्रह्मलीन बाबा के आशीर्वाद से ही दिबियापुर नगर को औद्योगिक नगरी का दर्जा मिला है। गेल, एनटीपीसी जैसे संयंत्र आज दिबियापुर में है। इसका नाम विश्व पटल पर है।
विज्ञापन
जिस पर होते गुस्सा, उसकी होती मनोकामना पूरी - 30 वर्षों से अपने दिन की शुरुआत बाबा परमहंस बगिया में मत्था टेकने एवं सोने से पहले बाबा के दर पर मत्था टेकने वाले कैलाश नाथ पोरवाल का कहना है कि लगभग 50 वर्ष पूर्व दिबियापुर में एक सन्यासी आया था। उनका जीवन चमत्कारों से भरा रहा है।
कई जनपदों में है बाबा की ख्याति - बाबा परमहंस महाराज में अटूट श्रृद्धा रखने वाले श्यामबाबू का कहना है कि बाबा के दर पर कई जिलों के लोग मत्था टेकने आते हैं। समाधिस्थ होने के बाद उनके अनुयायियों ने आदमकद मूर्ति की स्थापना कराई। नियमित पूजन करने वालों की मन मांगी मुरादें पूरी होती हैं।
श्रृद्धालुओं की बढ़ रही लगातार आस्था - रेलवे स्टेशन फफूंद परिसर स्थित बाबा परमहंस महाराज की बगिया के महंत बाबा सीताराम का कहना है कि वे पांच वर्ष से बाबा के दरबार में हैं, जो भी व्यक्ति श्रृद्धा और विश्वास के साथ बाबा के दर पर आया वो निराश नहीं हुआ। इसके चलते बाबा के दरबार में लोगों की आस्था लगातार बढ़ती ही जा रही है।