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आजाद हुआ पर खुशहाल न हो सका मुल्क

Thu, 13 Aug 2015 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Thu, 13 Aug 2015 12:15 AM IST
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Azad was not happy on the country

जंग-ए-आजादी में सक्रिय भूमिका निभाने वाले रणबांकुरे अब अंगुली पर गिने जा सकते हैं। गुलाम भारत को स्वतंत्र कराने के लिए 12 अगस्त 1942 को ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जंग के दौरान गोरों की गोलीबारी में जख्मी हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देश और समाज के मौजूदा हालातों से खुश नहीं हैं।

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नैतिक पतन, स्वार्थपरता और भ्रष्टाचार से जकड़ी भारतीय राजनीति के चलते मुल्क खुशहाल न होने की बात कहने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय शंकर गुप्ता के जीवन, उनके विचार और उनकी दिनचर्या को रेखांकित करती अमर उजाला की खास रिपोर्ट---
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बताते हैं कि होश संभाला तो जनता को गोरों के गिरफ्त में पाया। मिडिल शिक्षा पूरी करते-करते गुलामी से आजाद पाने को चल रहे संघर्ष में अपना योगदान देेने को मन पक्का कर लिया था।
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नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी का अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन की आंच जिले में पहुंच गई थी। उस समय में मेरी उम्र 14 वर्ष थी। आजादी को लेकर पुरानी नुमाइश मैदान में 12 अगस्त 1942 को मैं अपने स्कूली दोस्तों के साथ मंत्रणा कर रहा था कि सूचना मिली की अंग्रेजों को भगाने के लिए जुलूस निकाला जा रहा है।


 
फिर क्या था, दोस्तों के साथ होमगंज के पुरानी रामलीला मैदान पहुंचकर जुलूस में शामिल हो गए और पुरानी तहसील भवन में लगे ब्रिटिश हुकूमत का यूनियन जैक उतार कर तिरंगा फहराने को आगे बढ़ चले।


तहसील तिराहे पर बड़ी संख्या में खड़े गोरों को खदेड़ने के बाद जैसे ही हम लोग तहसील भवन की बुर्ज पर तिरंगा फहराने के लिए आगे बढ़े, तभी ब्रिटिश सैनिकों ने गोलीबारी शुरू कर दी।


एक गोली मेरे पैर में भी लगी। उस संघर्ष के दौरान अंग्रेजी सैनिकों ने मुझे जख्मी हालत में गिरफ्तार कर लिया। मुकदमा चलाने के बाद मुझे एक महीने की जेल की सजा हुई। जेल में गोरे मेरी गिनती अपराधियों में किया करते थे।


 
कुछ यूं है दिनचर्या- शहर के बहिन टोला मोहल्ला में रह रहे 87 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय शंकर गुप्ता आज भी चुस्त-दुरुस्त हैं।


सूर्योदय से पहले उठकर टहलना उनका उम्र के इस पड़ाव में भी जारी है। दोपहर को भोजन और शाम के समय बाजार जाना उनकी दिनचर्या में शामिल है। अवशेष समय में श्री गुप्ता ने पुस्तकों को अपना साथी बना लिया है।

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