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Auraiya News: औरैया का एफआईआर मानीटरिंग एप प्रदेश की पुलिस का निगरानी हथियार
Wed, 09 Sep 2026 01:46 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 09 Sep 2026 01:46 AM IST
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औरैया। मुकदमों की विवेचना समय पर पूरी न होने से पीड़ितों को थाने और पुलिस अफसरों की चौखट के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए औरैया पुलिस की ओर से तैयार किया गया एफआईआर मॉनिटरिंग एप अब पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है। जिले के इस नवाचार को प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने सराहा है। एप तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले जिला समन्वयक- एएसआई रजनीश वर्मा को प्रशंसा चिह्न से सम्मानित किया गया है।
जिले में बीएनएस, बीएसएस, बीएसए कानून लागू होने के बाद जनवरी से मई तक विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण की दर महज 55 फीसदी थी। इसकी नियमित निगरानी न होने से लंबित विवेचनाओं का बोझ बढ़ रहा था। समस्या को देखते हुए एसपी अभिषेक भारती और एएसआई रजनीश वर्मा ने अप्रैल 2026 में एप तैयार करने पर काम शुरू किया। जून में एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ ने एप को लॉन्च किया। इसके बाद एप की जानकारी डीजीपी कार्यालय को भेजी गई।
पुलिस मुख्यालय ने औरैया पुलिस के इस प्रयास की सराहना करते हुए कुछ मामूली बदलाव करके इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया। एप लागू होने के बाद जिले में जून से अगस्त तक जिले में समयबद्ध विवेचना निस्तारण की दर बढ़कर 82 फीसदी पहुंच गई। ऐसा इसलिए संभव हो पाया है कि अब एप के माध्यम से विवेचक लापरवाही नहीं बरत पा रहे हैं। एप से निगरानी तेज हो रही।
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10 दिन पहले मिलता है अलर्ट
एप में एसपी, एएसपी, सीओ, इंस्पेक्टर, दरोगा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। मुकदमे की विवेचना पूरी करने की निर्धारित अवधि खत्म होने से 10 दिन पहले ही विवेचक और सीओ को व्हाट्सएप पर मैसेज पहुंच जाता है। इससे अधिकारियों को समय रहते लंबित विवेचनाओं की जानकारी मिल जाती है और विवेचक पर भी समय से कार्रवाई पूरी करने का दबाव रहता है।
अब रजिस्टर पलटने की जरूरत नहीं पहले विवेचनाओं की समीक्षा के लिए अधिकारियों को थाने जाकर या कार्यालय में विवेचना रजिस्टर के पन्ने पलटकर मुकदमे की प्रगति देखनी पड़ती थी। अब एप के माध्यम से ही मुकदमे की स्थिति देखी जा सकती है। एप में ही स्मार्ट ओआर के जरिये अधिकारी विवेचना पढ़कर मौके पर ही दिशा-निर्देश दे रहे हैं। अगली समीक्षा में यह भी पता चल जाता है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों पर कितना अमल हुआ।
इस तरह एप करता है काम एफआईआर मॉनिटरिंग एप पुलिस के सीसीटीएनएस के सर्वर से लिंक है। सीसीटीएनएस पर एफआईआर ऑनलाइन होते ही संबंधित प्राथमिकी का ब्योरा अधिकारियों और विवेचक के पास पहुंच जाता है। एप पर लॉगिन करने के लिए हर थाने, विवेचक सहित अन्य अधिकारियों का आईडी बनी है। वह लॉगिन करके अपनी पूरी विवेचना का विवरण देख सकते हैं। इसके अलावा अधिकारी भी एप के माध्यम से विवेचना में अपना सुझाव देते हैं।
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अगस्त में बेहतर प्रदर्शन करने वाले थाने
थाना समयबद्ध पूरी विवेचन
बिधूना 40
बेला 20
कुदरकोट 09
सहार 06
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इन थानों में रह गईं विवेचनाएं लंबित
थाना कुल विवेचना समय पर पूरी नहीं
दिबियापुर 46 07
अछल्दा 24 03
औरैया 78 03
अयाना 19 02
अजीतमल 32 02
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समयबद्ध विवेचना के निस्तारण और लोगों को न्याय दिलाने की दिशा में पुलिस एप के माध्यम से काम कर रही है। एफआईआर मॉनिटरिंग एप सबसे पहले जिले की पुलिस ने बनाया था। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया। इससे विवेचकों की जवाबदेही तय हुई है।
- अभिषेक भारती, एसपी, औरैया
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जिले में बीएनएस, बीएसएस, बीएसए कानून लागू होने के बाद जनवरी से मई तक विवेचनाओं के समयबद्ध निस्तारण की दर महज 55 फीसदी थी। इसकी नियमित निगरानी न होने से लंबित विवेचनाओं का बोझ बढ़ रहा था। समस्या को देखते हुए एसपी अभिषेक भारती और एएसआई रजनीश वर्मा ने अप्रैल 2026 में एप तैयार करने पर काम शुरू किया। जून में एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ ने एप को लॉन्च किया। इसके बाद एप की जानकारी डीजीपी कार्यालय को भेजी गई।
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पुलिस मुख्यालय ने औरैया पुलिस के इस प्रयास की सराहना करते हुए कुछ मामूली बदलाव करके इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया। एप लागू होने के बाद जिले में जून से अगस्त तक जिले में समयबद्ध विवेचना निस्तारण की दर बढ़कर 82 फीसदी पहुंच गई। ऐसा इसलिए संभव हो पाया है कि अब एप के माध्यम से विवेचक लापरवाही नहीं बरत पा रहे हैं। एप से निगरानी तेज हो रही।
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10 दिन पहले मिलता है अलर्ट
एप में एसपी, एएसपी, सीओ, इंस्पेक्टर, दरोगा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के नाम और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। मुकदमे की विवेचना पूरी करने की निर्धारित अवधि खत्म होने से 10 दिन पहले ही विवेचक और सीओ को व्हाट्सएप पर मैसेज पहुंच जाता है। इससे अधिकारियों को समय रहते लंबित विवेचनाओं की जानकारी मिल जाती है और विवेचक पर भी समय से कार्रवाई पूरी करने का दबाव रहता है।
अब रजिस्टर पलटने की जरूरत नहीं पहले विवेचनाओं की समीक्षा के लिए अधिकारियों को थाने जाकर या कार्यालय में विवेचना रजिस्टर के पन्ने पलटकर मुकदमे की प्रगति देखनी पड़ती थी। अब एप के माध्यम से ही मुकदमे की स्थिति देखी जा सकती है। एप में ही स्मार्ट ओआर के जरिये अधिकारी विवेचना पढ़कर मौके पर ही दिशा-निर्देश दे रहे हैं। अगली समीक्षा में यह भी पता चल जाता है कि पूर्व में दिए गए निर्देशों पर कितना अमल हुआ।
इस तरह एप करता है काम एफआईआर मॉनिटरिंग एप पुलिस के सीसीटीएनएस के सर्वर से लिंक है। सीसीटीएनएस पर एफआईआर ऑनलाइन होते ही संबंधित प्राथमिकी का ब्योरा अधिकारियों और विवेचक के पास पहुंच जाता है। एप पर लॉगिन करने के लिए हर थाने, विवेचक सहित अन्य अधिकारियों का आईडी बनी है। वह लॉगिन करके अपनी पूरी विवेचना का विवरण देख सकते हैं। इसके अलावा अधिकारी भी एप के माध्यम से विवेचना में अपना सुझाव देते हैं।
अगस्त में बेहतर प्रदर्शन करने वाले थाने
थाना समयबद्ध पूरी विवेचन
बिधूना 40
बेला 20
कुदरकोट 09
सहार 06
इन थानों में रह गईं विवेचनाएं लंबित
थाना कुल विवेचना समय पर पूरी नहीं
दिबियापुर 46 07
अछल्दा 24 03
औरैया 78 03
अयाना 19 02
अजीतमल 32 02
समयबद्ध विवेचना के निस्तारण और लोगों को न्याय दिलाने की दिशा में पुलिस एप के माध्यम से काम कर रही है। एफआईआर मॉनिटरिंग एप सबसे पहले जिले की पुलिस ने बनाया था। इसके बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया गया। इससे विवेचकों की जवाबदेही तय हुई है।
- अभिषेक भारती, एसपी, औरैया