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ओडीएफ को पलीता, शौचालयों में ताले
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फोटो - 19एयूआरपी03- गांव नवी मोहन में बंद पड़ा सामुदायिक शौचालय । संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। जिले की 477 ग्राम पंचायतों में 437 में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण पूर्ण होने का प्रशासन दावा कर रहा है। हकीकत यह है कि अधिकांश सामुदायिक शौचालयों में ताले पड़े हैं, इससे लोगों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
जिले के औरैया, अजीतमल, भाग्यनगर, अछल्दा, एरवाकटरा, सहार व बिधूना ब्लॉक की 477 ग्राम पंचायतों में 456 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। जिसमें 437 सामुदायिक शौचालयों में विभाग ने जिओ टैगिंग कर निर्माण पूरा होने का दावा कर रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश शौचालय निर्माण के बाद से बंद पड़े हैं। जिससे ग्रामीण इन सामुदायिक शौचालयों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनके रख-रखाव के लिए स्वयं सहायता समूहों के एक-एक सदस्य को इनकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है और प्रतिमाह इनको छह हजार रुपये मानदेय व तीन हजार रुपये रख-रखाव के लिए दिए जा रहे हैं। प्रशासन 437 सामुदायिक शौचालयों के पूर्ण होने का दावा कर रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि कई शौचालयों में सबमर्सिबल, पाइप लाइन की फिटिंग समेत कई कार्य अधूरे पड़े हैं। जिन्हें बाहर से रंगाई-पुताई कर पूर्ण दिखा दिया गया है।
ग्रामीण बोले
सामुदायिक शौचालय ग्रामीणों के किसी काम नहीं आ रहे हैं। गांव से दूर बनाए जाने के कारण लोग वहां जाना नहीं चाहते हैं। इसलिए वह काम के नहीं रह गए हैं। - सज्जन अवस्थी
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शौचालय निर्माण में ग्राम पंचायत की ओर से पूरी तरह से मनमानी की गई। बनकर तैयार हो जाने के बावजूद हर समय इसमें ताला पड़ा रहता है। - रमाशंकर
बोले जिम्मेदार
जिले की 477 ग्राम पंचायतों में 456 में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण होना है। जिसमें 437 में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। जो सामुदायिक शौचालय नहीं खुल रहे हैं, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- संदीप वर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी।
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जिले के औरैया, अजीतमल, भाग्यनगर, अछल्दा, एरवाकटरा, सहार व बिधूना ब्लॉक की 477 ग्राम पंचायतों में 456 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। जिसमें 437 सामुदायिक शौचालयों में विभाग ने जिओ टैगिंग कर निर्माण पूरा होने का दावा कर रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि अधिकांश शौचालय निर्माण के बाद से बंद पड़े हैं। जिससे ग्रामीण इन सामुदायिक शौचालयों का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनके रख-रखाव के लिए स्वयं सहायता समूहों के एक-एक सदस्य को इनकी देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है और प्रतिमाह इनको छह हजार रुपये मानदेय व तीन हजार रुपये रख-रखाव के लिए दिए जा रहे हैं। प्रशासन 437 सामुदायिक शौचालयों के पूर्ण होने का दावा कर रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि कई शौचालयों में सबमर्सिबल, पाइप लाइन की फिटिंग समेत कई कार्य अधूरे पड़े हैं। जिन्हें बाहर से रंगाई-पुताई कर पूर्ण दिखा दिया गया है।
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ग्रामीण बोले
सामुदायिक शौचालय ग्रामीणों के किसी काम नहीं आ रहे हैं। गांव से दूर बनाए जाने के कारण लोग वहां जाना नहीं चाहते हैं। इसलिए वह काम के नहीं रह गए हैं। - सज्जन अवस्थी
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शौचालय निर्माण में ग्राम पंचायत की ओर से पूरी तरह से मनमानी की गई। बनकर तैयार हो जाने के बावजूद हर समय इसमें ताला पड़ा रहता है। - रमाशंकर
बोले जिम्मेदार
जिले की 477 ग्राम पंचायतों में 456 में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण होना है। जिसमें 437 में निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। जो सामुदायिक शौचालय नहीं खुल रहे हैं, उन्हें चिह्नित किया जाएगा। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- संदीप वर्मा, जिला पंचायत राज अधिकारी।