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चीन, थाइलैंड भेजे जाने थे कछुए
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बिधूना पुलिस की गिरफ्त में कछुआ तस्कर का आरोपी सूरज। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। जिले के बिधूना कोतवाली क्षेत्र के कीरतपुर के एक खंडहर से बरामद कछुए सुंदरी प्रजाति के हैं। पकड़ा गया तस्कर इन कछुओं को कानपुर भेजता था, जहां से इन्हें कलकत्ता और फिर वहां से चीन व थाइलैंड भेजा जाता था। कछुओं की हड्डियों से दवा बनती है, साथ ही मांस से बना सूप मर्दाना ताकत बढ़ाने के लिए दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है। पुलिस अब तस्करी में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
बिधूना कोतवाली क्षेत्र के कीरतपुर के एक खंडहर में मंगलवार देर रात पुलिस व वन विभाग की टीम ने छापा मारा था। खंडहर से टीम को 709 कछुए बरामद हुए थे। इनकी कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने मौके से कीरतपुर निवासी सूरज को पकड़ा था। पुलिस व वन विभाग की टीम ने उससे पूछताछ की।
वन रेंजर ताजपुर कुबेर सिंह ने बताया कि खंडहर में मिले कछुए सुंदरी प्रजाति के हैं। पूछताछ में तस्कर ने बताया कि वह अपने साथी के साथ मिलकर गांवों के तालाबों व नदी से कछुए एकत्र करता था। इसके बाद वह कानपुर भेज देता था। कानपुर से यह कछुए कलकत्ता भेजे जाते हैं। जहां से इन्हें चीन और थाईलैंड भेजा जाता है।
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चिप्स व मर्दाना ताकत की बनती दवा
वन रेंजर कुबेर यादव ने बताया कि कछुओं के शरीर की निचली सतह प्लैस्ट्रॉन को काटकर पानी में उबाली जाती है और फिर सुखाकर इससे चिप्स बनते हैं। जो करीब तीन हजार रुपये किलो तक में बिकते हैं। एक किलो कछुए से करीब 250 ग्राम चिप्स तैयार किए जाते हैं। कछुओं की हड्डियों के बुरादे से दवा बनती है।
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बिधूना कोतवाली क्षेत्र के कीरतपुर के एक खंडहर में मंगलवार देर रात पुलिस व वन विभाग की टीम ने छापा मारा था। खंडहर से टीम को 709 कछुए बरामद हुए थे। इनकी कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने मौके से कीरतपुर निवासी सूरज को पकड़ा था। पुलिस व वन विभाग की टीम ने उससे पूछताछ की।
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वन रेंजर ताजपुर कुबेर सिंह ने बताया कि खंडहर में मिले कछुए सुंदरी प्रजाति के हैं। पूछताछ में तस्कर ने बताया कि वह अपने साथी के साथ मिलकर गांवों के तालाबों व नदी से कछुए एकत्र करता था। इसके बाद वह कानपुर भेज देता था। कानपुर से यह कछुए कलकत्ता भेजे जाते हैं। जहां से इन्हें चीन और थाईलैंड भेजा जाता है।
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चिप्स व मर्दाना ताकत की बनती दवा
वन रेंजर कुबेर यादव ने बताया कि कछुओं के शरीर की निचली सतह प्लैस्ट्रॉन को काटकर पानी में उबाली जाती है और फिर सुखाकर इससे चिप्स बनते हैं। जो करीब तीन हजार रुपये किलो तक में बिकते हैं। एक किलो कछुए से करीब 250 ग्राम चिप्स तैयार किए जाते हैं। कछुओं की हड्डियों के बुरादे से दवा बनती है।