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Auraiya News: 245 पंचायतों में प्रधान पद की दावेदारी में रोड़ा बनेंगे ऑडिट
Mon, 19 Jan 2026 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 19 Jan 2026 11:37 PM IST
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फोटो-9- विकास भवन। संवाद
औरैया। विकास कार्यों के ऑडिट में लापरवाही 245 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के दावेदारों के लिए रोड़ा बनेगी। वर्ष 2016 से अब तक लंबित ऑडिट को लेकर अब नो ड्यूज न देने का निर्णय लिया है। इसके लिए संबंधित वर्तमान व पूर्व प्रधानों को नोटिस जारी किए गए हैं। इससे खलबली मच गई है।
गांवों में होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता हो, इसके लिए इनका ऑडिट कराया जाता है। सचिवों से प्रत्येक कार्य से जुड़ा लेखा-जोखा व क्रय विक्रय के कागजात लिए जाते हैं। जनवरी के शुरूआती दिनों में शासन स्तर से जिले में हुए पंचायती राज विभाग के विकास कार्यों के ऑडिट की समीक्षा की गई थी।
डीपीआरओ व सीडीओ को लंबित प्रकरणों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद डीपीआरओ ने 245 पंचायतों के तत्कालीन सचिवों व प्रधानों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन इसके बाद भी चुनिंदा पंचायतों की ओर से ही ऑडिट पूरे कराए जा सके।
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ऐसे में ऑडिट न कराने वाली पंचायतों के प्रधानों व सचिवों को अंतिम चेतावनी जारी की गई है। इसमें आरसी जारी करने, प्राथमिकी कराने और नोड्यूज न देने की चेतावनी शामिल की गई है। लंबित पड़े प्रस्तरों के ऑडिट पूरा कराने के लिए सचिव व प्रधानों को अब एक माह के अंदर ही सभी प्रपत्र देने होंगे। ऐसा न करने की स्थिति में उन पर रिकवरी जारी होने के साथ ही प्राथमिकी दर्ज होगी।
प्रधानों के लिए खास तौर पर इस चेतावनी में नोड्यूज न जारी करने का निर्णय लिया गया है। जिस प्रधान के कार्यकाल के ऑडिट लंबित होंगे उन्हें पंचायती राज विभाग नोड्यूज ही नहीं देगा। ऐसे में वो प्रधान आगामी पंचायत चुनाव में अपनी दावेदारी भी नहीं कर पाएंगे।
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बिधूना व एरवाकटरा 19 पंचायतें निशाने पर
ऑडिट के लंबित प्रस्तर के सबसे ज्यादा मामले बिधूना व एरवाकटरा ब्लॉक के हैं। यहां पर साल 2016-17 में हुए 79 कार्यों के प्रस्तरों का ऑडिट कागजों के अभाव में अधूरा पड़ा है। यहां की 19 पंचायतें अब प्रशासन की चेतावनी के बाद कार्रवाई की जद में आ गई है।
साल लंबित प्रस्तर पंचायतें
2016-17 79 19
2017-18 9 6
2018-19 8 8
2019-20 94 94
2020-21 88 88
2021-22 24 24
2022-23 3 3
2023-24 5 3
जिन पंचायतों के ऑडिट लंबित हैं, वहां के तत्कालीन सचिव व प्रधानों को अंतिम चेतावनी जारी की गई है। ऑडिट के लिए जरूरी कागजात न देने पर रिकवरी व प्राथमिकी की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं प्रधानों को आगामी चुनाव में नोड्यूज नहीं मिल पाएंगे।
-श्रीकांत यादव, डीपीआरओ
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गांवों में होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता हो, इसके लिए इनका ऑडिट कराया जाता है। सचिवों से प्रत्येक कार्य से जुड़ा लेखा-जोखा व क्रय विक्रय के कागजात लिए जाते हैं। जनवरी के शुरूआती दिनों में शासन स्तर से जिले में हुए पंचायती राज विभाग के विकास कार्यों के ऑडिट की समीक्षा की गई थी।
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डीपीआरओ व सीडीओ को लंबित प्रकरणों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद डीपीआरओ ने 245 पंचायतों के तत्कालीन सचिवों व प्रधानों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन इसके बाद भी चुनिंदा पंचायतों की ओर से ही ऑडिट पूरे कराए जा सके।
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ऐसे में ऑडिट न कराने वाली पंचायतों के प्रधानों व सचिवों को अंतिम चेतावनी जारी की गई है। इसमें आरसी जारी करने, प्राथमिकी कराने और नोड्यूज न देने की चेतावनी शामिल की गई है। लंबित पड़े प्रस्तरों के ऑडिट पूरा कराने के लिए सचिव व प्रधानों को अब एक माह के अंदर ही सभी प्रपत्र देने होंगे। ऐसा न करने की स्थिति में उन पर रिकवरी जारी होने के साथ ही प्राथमिकी दर्ज होगी।
प्रधानों के लिए खास तौर पर इस चेतावनी में नोड्यूज न जारी करने का निर्णय लिया गया है। जिस प्रधान के कार्यकाल के ऑडिट लंबित होंगे उन्हें पंचायती राज विभाग नोड्यूज ही नहीं देगा। ऐसे में वो प्रधान आगामी पंचायत चुनाव में अपनी दावेदारी भी नहीं कर पाएंगे।
बिधूना व एरवाकटरा 19 पंचायतें निशाने पर
ऑडिट के लंबित प्रस्तर के सबसे ज्यादा मामले बिधूना व एरवाकटरा ब्लॉक के हैं। यहां पर साल 2016-17 में हुए 79 कार्यों के प्रस्तरों का ऑडिट कागजों के अभाव में अधूरा पड़ा है। यहां की 19 पंचायतें अब प्रशासन की चेतावनी के बाद कार्रवाई की जद में आ गई है।
साल लंबित प्रस्तर पंचायतें
2016-17 79 19
2017-18 9 6
2018-19 8 8
2019-20 94 94
2020-21 88 88
2021-22 24 24
2022-23 3 3
2023-24 5 3
जिन पंचायतों के ऑडिट लंबित हैं, वहां के तत्कालीन सचिव व प्रधानों को अंतिम चेतावनी जारी की गई है। ऑडिट के लिए जरूरी कागजात न देने पर रिकवरी व प्राथमिकी की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। वहीं प्रधानों को आगामी चुनाव में नोड्यूज नहीं मिल पाएंगे।
-श्रीकांत यादव, डीपीआरओ