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Auraiya News: अरिंद उफनाई, खेतों में मेहनत के साथ उम्मीद भी डूबी

Mon, 05 Oct 2026 12:06 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 12:06 AM IST
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The Arind overflowed; along with the hard work, hopes also drowned in the fields.
बिधूना। करीब 48 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश के बाद अरिंद नदी का जलस्तर बढ़ने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी की समय पर सफाई न होने और जल निकासी की व्यवस्था ठप होने के कारण पानी खेतों में घुस गया। गूरा, तारा का पुरवा, राजपुर और मड़ैया समेत कई गांवों के खेतों में एक सप्ताह से अधिक समय से जलभराव बना हुआ है।
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खेतों में पानी भरा होने से कटाई के लिए तैयार धान और बाजरे की फसलें खराब होने की कगार पर पहुंच गई हैं। किसानों का कहना है कि बारिश के बाद नदी का जलस्तर बढ़ते ही खेतों में पानी पहुंच गया था, लेकिन समय रहते निकासी की व्यवस्था नहीं की गई। इससे फसलें सड़ने लगी हैं।
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किसानों ने नदी की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जलभराव की स्थिति गंभीर होने के बावजूद शुरुआती दिनों में प्रशासन की ओर से नुकसान का जायजा नहीं लिया गया। किसानों ने खेतों से जल्द पानी निकलवाने और फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि पानी की निकासी में देरी हुई तो बची हुई फसल भी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
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नदी किनारे करीब 25 बीघा फसल पानी में डूबी हुई है। धान की फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन खेतों में पानी भरा होने से कटाई रुक गई है। फसल में पहले ही काफी पैसा लगा चुके हैं। यदि जल्द मुआवजा नहीं मिला तो गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
- मुकेश कुमार, गूरा
राजपुर गांव के पास अरिंद नदी किनारे करीब छह से सात बीघा बाजरे की फसल पानी में डूब चुकी है। महंगे बीज खरीदकर मेहनत से फसल तैयार की थी, लेकिन जलभराव से सब बर्बाद हो गया। एक सप्ताह बीतने के बाद भी कोई लेखपाल नुकसान का जायजा लेने नहीं आया।
- रामवीर सिंह, गूरा
गांव के कई किसानों के खेतों में पानी भरा है। इससे धान, बाजरा और तिल की फसलों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन से मांग है कि लेखपाल भेजकर नुकसान का सर्वे कराया जाए और नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए।
- शिवकुमार, तारा का पुरवा
करीब सात बीघा बाजरे की फसल पूरी तरह पानी में डूबी है। पानी का स्तर कम नहीं हो रहा है, जिससे फसल के खराब होने का डर है। जब तक खेत सूखेंगे नहीं, तब तक कटाई संभव नहीं है। प्रशासन की ओर से जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।

- सर्वेश कुमार, राजपुर
वर्जन
जिन गांवों में अरिंद नदी के पानी से खेत प्रभावित हुए हैं, वहां स्थिति की जांच कराई जा रही है। शनिवार से ही लेखपालों की टीमों को सर्वे के कार्य में लगा दिया गया है। प्रभावित किसानों की रिपोर्ट मंगवाकर तुरंत शासन को भेजी जाएगी। जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें नियमानुसार पूरा मुआवजा दिलाया जाएगा। - कमल कुमार सिंह, एसडीएम, बिधूना
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