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Auraiya News: सुबह-शाम मौसम बदलने से दमा रोगियों को दिक्कत
Thu, 23 Jul 2026 12:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 23 Jul 2026 12:18 AM IST
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फोटो -5- ओपीडी में मरीजों को देखते डॉक्टर। संवाद
औरैया। मानसून के दस्तक देते ही जिले में केवल संक्रामक बीमारियों का खतरा ही नहीं बढ़ा है।
दमा रोगियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। दिन की गर्मी के बीच रात में एसी, कूलर व पंखे की हवा दमा रोगियों की सेहत बिगाड़ रही है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर वह अस्पताल पहुंच रहे हैं।
शहर के जिला संयुक्त चिकित्सालय में रोजाना मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे सुबह से ही पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी तक लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
बारिश के इस मौसम में नमी और वातावरण में बदलाव के कारण दमा और सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए चिकित्सकों ने मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. अवधेश ने बताया कि बारिश के मौसम में हवा में नमी और बैक्टीरिया का प्रसार बढ़ जाता है। ऐसे में सांस व अस्थमा के मरीजों को सीलन और ठंडे वातावरण से बचना चाहिए। साथ ही उबला हुआ पानी पीने और खान-पान में सफाई का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि दमा व सांस की बीमारियों से जुड़ी सभी जरूरी दवाएं और इन्हेलर अस्पताल में उपलब्ध हैं। मरीज डॉक्टर की सलाह जरूर लेंं।
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दमा रोगियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। दिन की गर्मी के बीच रात में एसी, कूलर व पंखे की हवा दमा रोगियों की सेहत बिगाड़ रही है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर वह अस्पताल पहुंच रहे हैं।
शहर के जिला संयुक्त चिकित्सालय में रोजाना मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे सुबह से ही पर्चा काउंटर से लेकर ओपीडी तक लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
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बारिश के इस मौसम में नमी और वातावरण में बदलाव के कारण दमा और सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए चिकित्सकों ने मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
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जिला संयुक्त चिकित्सालय के डॉ. अवधेश ने बताया कि बारिश के मौसम में हवा में नमी और बैक्टीरिया का प्रसार बढ़ जाता है। ऐसे में सांस व अस्थमा के मरीजों को सीलन और ठंडे वातावरण से बचना चाहिए। साथ ही उबला हुआ पानी पीने और खान-पान में सफाई का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
सीएमएस डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि दमा व सांस की बीमारियों से जुड़ी सभी जरूरी दवाएं और इन्हेलर अस्पताल में उपलब्ध हैं। मरीज डॉक्टर की सलाह जरूर लेंं।