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Auraiya News: राम जानकी विवाह होते ही बजने लगी बधाइयां
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संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया।
शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर बीहड़ांचल स्थित देवकली मंदिर के पास आनंदम कृपा धाम में चल रही श्री राम कथा के चौथे दिन आचार्य अंकुश जी महाराज ने कथा का श्रवण कराया। कथा में जैसे ही श्री राम और मां जानकी ने एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली, उपस्थित श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की।
श्रीराम कथा सुनाते हुए आचार्य अंकुश जी महाराज ने कहा कि अहंकार सदैव विनाश का कारण बनता है। अहंकारी व्यक्ति को कहीं भी सम्मान और लाभ नहीं मिलता। कहा कि सीता स्वयंवर में पहुंचा रावण बहुत बलवान और प्रकांड विद्वान होने के बाद भी भगवान की लीला के आगे बेवस साबित हुआ। जबकि भगवान राम ने गुरु विश्वामित्र के आदेश पर एक ही झटके में न केवल शिव के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा ही चढ़ाई बल्कि उसे दो टुकड़ों में विभाजित कर दिया।
कहा कि इसी प्रकार किसी भी व्यक्ति को अपने मन में अहंकार नहीं पालना चाहिए। कहा कि प्रभू इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। आनंदम कृपा धाम परिवार के कार्यक्रम आयोजक ने श्रद्धालुओं से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान के आदर्शों को अपनाने और भगवान राम की कथा का श्रवण करने की अपील की है।
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औरैया।
शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर बीहड़ांचल स्थित देवकली मंदिर के पास आनंदम कृपा धाम में चल रही श्री राम कथा के चौथे दिन आचार्य अंकुश जी महाराज ने कथा का श्रवण कराया। कथा में जैसे ही श्री राम और मां जानकी ने एक-दूसरे के गले में वरमाला डाली, उपस्थित श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की।
श्रीराम कथा सुनाते हुए आचार्य अंकुश जी महाराज ने कहा कि अहंकार सदैव विनाश का कारण बनता है। अहंकारी व्यक्ति को कहीं भी सम्मान और लाभ नहीं मिलता। कहा कि सीता स्वयंवर में पहुंचा रावण बहुत बलवान और प्रकांड विद्वान होने के बाद भी भगवान की लीला के आगे बेवस साबित हुआ। जबकि भगवान राम ने गुरु विश्वामित्र के आदेश पर एक ही झटके में न केवल शिव के पिनाक धनुष पर प्रत्यंचा ही चढ़ाई बल्कि उसे दो टुकड़ों में विभाजित कर दिया।
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कहा कि इसी प्रकार किसी भी व्यक्ति को अपने मन में अहंकार नहीं पालना चाहिए। कहा कि प्रभू इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। आनंदम कृपा धाम परिवार के कार्यक्रम आयोजक ने श्रद्धालुओं से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान के आदर्शों को अपनाने और भगवान राम की कथा का श्रवण करने की अपील की है।
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