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16 केंद्रों पर नहीं शुरू हुई धान की खरीद
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औरैया। सरकारी धान क्रय केंद्रों पर धान की खरीद बेहद धीमी गति हो रही। अबकी 40 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। हाल यह है कि 11 दिन बीत चुके हैं, अभी तक मात्र 1640.40 क्विंटल ही धान की खरीद हो सकी है। धान खरीद के लिए खोले गए 34 केंद्रों में 16 पर अभी बोहनी तक नहीं हुई है। इससे सहज अंदाज लगाया जा सकता है कि लक्ष्य पूरा करने में दिक्कत हो सकती है। उधर, क्रय केंद्र प्रभारियों को धान खरीद में तेजी लाने को कहा गया है। साथ ही शिथिलता बरतने वालों को कार्रवाई के लिए चेताया गया है।
शासन ने धान खरीद को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। प्रशासन की सक्रियता के बाद भी धान खरीद में फिलहाल तेजी नहीं दिख रही है। धान क्रय केंद्रों के खुले 11 दिन बीतने के बाद बाद भी फार्मर प्रोडयूसर कंपनी के पांच, नैफेड के तीन, पीसीयू के तीन व खाद्य विभाग के सात केंद्रों पर 1640.40 क्विंटल ही धान खरीद हो सकी है।
जिला खाद्य एवं विपणन विभाग की ओर से जिले में 34 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 16 केंद्रों की बोहनी तक नहीं हो सकी है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक जिले भर में नाममात्र के लिए ही धान की कटाई शुरू हुई है। विधिवत धान आना 15 नवंबर के बाद से शुरू होगा, जो धान आ भी रहा है वह नमी अधिक होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही है। यह धान ज्यादातर कानपुर देहात, जालौन जनपद से आ रहा है।
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विपणन विभाग की वेबसाइड पर पंजीकृत 100 क्विंटल से अधिक धान बेचने वाले किसानों की भूमि का सत्यापन होगा। इसके बाद ही किसान अपनी उपज खरीद केंद्र पर बेच सकेगा। सत्यापन कराने के लिए धान खरीद अधिकारी एडीएम ने सभी एसडीएम को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं। इसमें एसडीएम ऐसे किसानों की भूमि का सत्यापन करेंगे, जिन्होंने वेबसाइट पर 100 क्विंटल से अधिक उपज बेचने का रजिस्ट्रेशन कराया है। अफसरों का मानना है कि कुछ लोग पंजीकरण में फर्जी खतौनी व खसरा लगा देते हैं। भूमि के सत्यापन के बाद असलियत सामने आ जाएगी।
एडीएम रेखा एस चौहान का कहना है कि जिले के किसानों को किसी भी सरकारी खरीद केंद्र पर धान खरीद करने की सुविधा मुहैया कराई गई है। शासन से मिले लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा किया जाएगा। आसपास के जिलों के किसानों का धान खरीदने के लिए भी पत्र भेजा जा चुका है।
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शासन ने धान खरीद को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है। शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। प्रशासन की सक्रियता के बाद भी धान खरीद में फिलहाल तेजी नहीं दिख रही है। धान क्रय केंद्रों के खुले 11 दिन बीतने के बाद बाद भी फार्मर प्रोडयूसर कंपनी के पांच, नैफेड के तीन, पीसीयू के तीन व खाद्य विभाग के सात केंद्रों पर 1640.40 क्विंटल ही धान खरीद हो सकी है।
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जिला खाद्य एवं विपणन विभाग की ओर से जिले में 34 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें 16 केंद्रों की बोहनी तक नहीं हो सकी है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक जिले भर में नाममात्र के लिए ही धान की कटाई शुरू हुई है। विधिवत धान आना 15 नवंबर के बाद से शुरू होगा, जो धान आ भी रहा है वह नमी अधिक होने के कारण खरीद नहीं हो पा रही है। यह धान ज्यादातर कानपुर देहात, जालौन जनपद से आ रहा है।
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विपणन विभाग की वेबसाइड पर पंजीकृत 100 क्विंटल से अधिक धान बेचने वाले किसानों की भूमि का सत्यापन होगा। इसके बाद ही किसान अपनी उपज खरीद केंद्र पर बेच सकेगा। सत्यापन कराने के लिए धान खरीद अधिकारी एडीएम ने सभी एसडीएम को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं। इसमें एसडीएम ऐसे किसानों की भूमि का सत्यापन करेंगे, जिन्होंने वेबसाइट पर 100 क्विंटल से अधिक उपज बेचने का रजिस्ट्रेशन कराया है। अफसरों का मानना है कि कुछ लोग पंजीकरण में फर्जी खतौनी व खसरा लगा देते हैं। भूमि के सत्यापन के बाद असलियत सामने आ जाएगी।
एडीएम रेखा एस चौहान का कहना है कि जिले के किसानों को किसी भी सरकारी खरीद केंद्र पर धान खरीद करने की सुविधा मुहैया कराई गई है। शासन से मिले लक्ष्य को शत-प्रतिशत पूरा किया जाएगा। आसपास के जिलों के किसानों का धान खरीदने के लिए भी पत्र भेजा जा चुका है।