{"_id":"5efa35518ebc3e42b9253bd6","slug":"agricalture-auraiya-news-knp568348519","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीजल की कीमतों ने बढ़ाई 500 रुपये प्रति बीघा खेती की लागत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीजल की कीमतों ने बढ़ाई 500 रुपये प्रति बीघा खेती की लागत
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औरैया। लगातार डीजल व पेट्रोल के दामों में इजाफा होने का असर किसानों पर भी पड़ रहा है। खेती का 70 फीसदी कार्य डीजल यंत्रों पर निर्भर है। पिछले 15 दिनों में डीजल की बढ़ी कीमतों के कारण प्रति बीघा खेती में 500 रुपये की लागत बढ़ गई है।
खेत की जुताई की ही लागत 100 रुपये प्रति बीघा तक बढ़ गई है। मंडी तक फसल पहुंचाने के लिए भी अधिक भाड़ा देने पड़ रहा है। इस बढ़ती लागत से किसान मायूस हैं। वहीं छोटे किसानों का कहना है कि अब खेती की साथ दूसरे के यहां मजदूरी करनी पड़ रही है। बड़े किसान लगातार बढ़ती डीजल की कीमतों को देखते हुए अब स्वयं खेती नहीं कर रहे। वह खेती को बंटाई पर दे रहे हैं।
गांव अजलापुर निवासी किसान बालमुकुंद कुशवाहा ने बताया कि खेत की जुताई के लिए 100 रुपये प्रति बीघा अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। खेती पूरी तरह से मशीन पर आधारित है। डीजल के बढ़ते दामों से खेती की लागत में प्रति बीघा 500 रुपये का इजाफा हुआ है। सरकार को फसल का मूल्य भी बढ़ाना चाहिए। नहीं तो किसान मजदूरी करने को विवश होंगे।
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फफूंद निवासी किसान सलीम अहमद मेव ने बताया कि सरकार ने किसान को उसकी आय दोगुना करने का सपना दिखाया, लेकिन डीजल की कीमतें बढ़ाकर उनके सपनों को पूरा नहीं कर पा रही है। सरकार को चाहिए कि वह डीजल के दामों को कम करे और किसानों को डीजल में छूट प्रदान करे।
गांव भौनकपुर निवासी किसान मुनेश कुमार राठौर ने कहा कि किसान को फसल बोने के दौरान सिंचाई के लिए पंप सेट का सहारा लेना पड़ता है। वहीं फसल तैयार होने के बाद मंडी तक ले जाने के लिए भाड़ा देना पड़ता है। फसल की अब जितनी कीमत मिलती है वह खेती में चली जाती है। जिसके चलते अधिकांश किसान अब मजदूरी करने लगे हैं।
किसान नेता एवं फफूंद रजवहा अध्यक्ष गिरधर भक्त मिश्रा ने बताया कि जिले में खेत की जुताई के लिए अलग-अलग कीमत निर्धारित है। इसका मुख्य कारण खेत की स्थिति और साइज पर निर्भर करता है। किसानों को मंडी तक फसल ले जाने के लिए ज्यादा बढ़ा देना पड़ रहा है।
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खेत की जुताई की ही लागत 100 रुपये प्रति बीघा तक बढ़ गई है। मंडी तक फसल पहुंचाने के लिए भी अधिक भाड़ा देने पड़ रहा है। इस बढ़ती लागत से किसान मायूस हैं। वहीं छोटे किसानों का कहना है कि अब खेती की साथ दूसरे के यहां मजदूरी करनी पड़ रही है। बड़े किसान लगातार बढ़ती डीजल की कीमतों को देखते हुए अब स्वयं खेती नहीं कर रहे। वह खेती को बंटाई पर दे रहे हैं।
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गांव अजलापुर निवासी किसान बालमुकुंद कुशवाहा ने बताया कि खेत की जुताई के लिए 100 रुपये प्रति बीघा अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। खेती पूरी तरह से मशीन पर आधारित है। डीजल के बढ़ते दामों से खेती की लागत में प्रति बीघा 500 रुपये का इजाफा हुआ है। सरकार को फसल का मूल्य भी बढ़ाना चाहिए। नहीं तो किसान मजदूरी करने को विवश होंगे।
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फफूंद निवासी किसान सलीम अहमद मेव ने बताया कि सरकार ने किसान को उसकी आय दोगुना करने का सपना दिखाया, लेकिन डीजल की कीमतें बढ़ाकर उनके सपनों को पूरा नहीं कर पा रही है। सरकार को चाहिए कि वह डीजल के दामों को कम करे और किसानों को डीजल में छूट प्रदान करे।
गांव भौनकपुर निवासी किसान मुनेश कुमार राठौर ने कहा कि किसान को फसल बोने के दौरान सिंचाई के लिए पंप सेट का सहारा लेना पड़ता है। वहीं फसल तैयार होने के बाद मंडी तक ले जाने के लिए भाड़ा देना पड़ता है। फसल की अब जितनी कीमत मिलती है वह खेती में चली जाती है। जिसके चलते अधिकांश किसान अब मजदूरी करने लगे हैं।
किसान नेता एवं फफूंद रजवहा अध्यक्ष गिरधर भक्त मिश्रा ने बताया कि जिले में खेत की जुताई के लिए अलग-अलग कीमत निर्धारित है। इसका मुख्य कारण खेत की स्थिति और साइज पर निर्भर करता है। किसानों को मंडी तक फसल ले जाने के लिए ज्यादा बढ़ा देना पड़ रहा है।