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किसान समय पर करें गेहूं की बुवाई, बढ़ेगा उत्पादन
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औरैया। गेहूं की फसल की बुवाई समय से करें तो किसान अच्छा उत्पादन कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के प्रभारी का कहना है कि किसान वैज्ञानिक विधि से गेहूं की खेती कर अच्छी उपज पा सकते हैं। गेहूं की बुवाई के लिए 10 नवंबर का द्वितीय सप्ताह उपयुक्त है।
कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के प्रभारी डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल सभी प्रकार की मिट्टी में होती है। दोमट मिट्टी गेहूं की खेती के लिए अच्छी मानी जाती है। कपास की काली मृदा में गेहूं की खेती के लिए सिंचाई की कम आवश्यकता पड़ती है। गेहूं रबी की फसल है। इसे शीतकालीन मौसम में उगाया जाता है। सामान्य तौर पर गेहूं की बुवाई अक्तूबर से दिसंबर के बीच की जाती है और फसल की कटाई अप्रैल से मई तक की जाती है। कई किस्मों की अवधि 135 से 140 दिन है। उन फसलों को नवंबर के प्रथम पखवारे में व जो किस्में पकने में 120 दिन का समय लेते हैं।
उन्हें 15 से 30 नवंबर तक बोना चाहिए। गेहूं का दाना पककर सख्त हो जाए और उनमें नमी का अंश 20 से 25 प्रतिशत तक आए तो फसल की कटाई करनी चाहिए। बौनी किस्म के गेंहू पकने के बाद खेत में नहीं छोड़ना चाहिए। कटाई के पश्चात फसल को दो-तीन दिन बाद खलिहान में सुखा लें। बाद में थ्रेसर से इसकी कटाई की जाती है।
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कंबाइन हार्पेस्टर का प्रयोग करने से कटाई मड़ाई तथा ओसाई एक साथ हो जाती है। गेहूं की बौनी किस्मों से लगभग 50 से 45 क्विंटल दाना के अलावा 60-70 क्विंटल भूसा प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है। देसी किस्मों से इसकी लगभग आधी उपज प्राप्त होती है। असिंचित व्यवस्था में 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के प्रभारी डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल सभी प्रकार की मिट्टी में होती है। दोमट मिट्टी गेहूं की खेती के लिए अच्छी मानी जाती है। कपास की काली मृदा में गेहूं की खेती के लिए सिंचाई की कम आवश्यकता पड़ती है। गेहूं रबी की फसल है। इसे शीतकालीन मौसम में उगाया जाता है। सामान्य तौर पर गेहूं की बुवाई अक्तूबर से दिसंबर के बीच की जाती है और फसल की कटाई अप्रैल से मई तक की जाती है। कई किस्मों की अवधि 135 से 140 दिन है। उन फसलों को नवंबर के प्रथम पखवारे में व जो किस्में पकने में 120 दिन का समय लेते हैं।
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उन्हें 15 से 30 नवंबर तक बोना चाहिए। गेहूं का दाना पककर सख्त हो जाए और उनमें नमी का अंश 20 से 25 प्रतिशत तक आए तो फसल की कटाई करनी चाहिए। बौनी किस्म के गेंहू पकने के बाद खेत में नहीं छोड़ना चाहिए। कटाई के पश्चात फसल को दो-तीन दिन बाद खलिहान में सुखा लें। बाद में थ्रेसर से इसकी कटाई की जाती है।
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कंबाइन हार्पेस्टर का प्रयोग करने से कटाई मड़ाई तथा ओसाई एक साथ हो जाती है। गेहूं की बौनी किस्मों से लगभग 50 से 45 क्विंटल दाना के अलावा 60-70 क्विंटल भूसा प्रति हेक्टेयर प्राप्त होता है। देसी किस्मों से इसकी लगभग आधी उपज प्राप्त होती है। असिंचित व्यवस्था में 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त होती है।