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आखिर कब तक जानलेवा बने रहेंगे बबूल के पेड़
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-बिधूना-अछल्दा मार्ग पर खड़े घने बबूल के पेड़। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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बिधूना(औरैया)। बिधूना-अछल्दा मार्ग पर सड़क किनारे खड़े बबूल के पेड़ हादसे का सबब बन रहे हैं। इन पेड़ों के कारण सामने से आ रहे वाहन नहीं दिखते और दुर्घटना हो जाती है। रात में सफर और मुश्किल भरा होता है। लोगों ने कई बार पेड़ छटवाने की मांग की लेकिन विभाग अनजान बना बैठा है।
बिधूना-अछल्दा मार्ग पर पसुआ से दूध डेयरी तक सड़क किनारे घने बबूल के पेड़ हैं। सड़क पर कई जगह मोड़ पर पेड़ों के कारण वाहनों का अंदाजा नहीं लग पाता है। इस कारण हादसे हो जाते हैं।
प्रशासन भूल गया सफाई
लोकतंत्र सेनानी डॉ. विश्वनाथ सक्सेना ने बताया कि दो वर्ष पहले सौथरा अड्डा व सहार के बीच बबूल के पेड़ों के कारण हुए हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। उस समय जिला प्रशासन ने फुटपाथ की सफाई कराने के लिए कहा था। लेकिन बबलू के पेड़ नहीं हटाए गए।
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रात में सफर होता मुश्किल भरा
संदीप सिंह ने बताया कि रात में सामने से आने वाले वाहन पेड़ों के कारण नहीं दिखते हैं। अक्सर वाहन सवार हादसे का शिकार हो जाते हैं। कई बार पेड़ छटवाने की मांग की जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने प्रयास किया लेकिन कार्रवाई के डर से पीछे हट गए।
बिधूना-अछल्दा मार्ग पर बबूल के पेड़ कटवाने के लिए जल्द ही टीम लगाई जाएगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ी तो वन विभाग से भी सहयोग लिया जाएगा। - अनिल कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग
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बिधूना-अछल्दा मार्ग पर पसुआ से दूध डेयरी तक सड़क किनारे घने बबूल के पेड़ हैं। सड़क पर कई जगह मोड़ पर पेड़ों के कारण वाहनों का अंदाजा नहीं लग पाता है। इस कारण हादसे हो जाते हैं।
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प्रशासन भूल गया सफाई
लोकतंत्र सेनानी डॉ. विश्वनाथ सक्सेना ने बताया कि दो वर्ष पहले सौथरा अड्डा व सहार के बीच बबूल के पेड़ों के कारण हुए हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। उस समय जिला प्रशासन ने फुटपाथ की सफाई कराने के लिए कहा था। लेकिन बबलू के पेड़ नहीं हटाए गए।
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रात में सफर होता मुश्किल भरा
संदीप सिंह ने बताया कि रात में सामने से आने वाले वाहन पेड़ों के कारण नहीं दिखते हैं। अक्सर वाहन सवार हादसे का शिकार हो जाते हैं। कई बार पेड़ छटवाने की मांग की जा चुकी है। स्थानीय लोगों ने प्रयास किया लेकिन कार्रवाई के डर से पीछे हट गए।
बिधूना-अछल्दा मार्ग पर बबूल के पेड़ कटवाने के लिए जल्द ही टीम लगाई जाएगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ी तो वन विभाग से भी सहयोग लिया जाएगा। - अनिल कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग