{"_id":"5b78711e42c79246695cca15","slug":"71534619934-auraiya-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में फिर मिले ग्लेंडर फारसी बीमारी से ग्रसित घोड़ा व खच्चर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में फिर मिले ग्लेंडर फारसी बीमारी से ग्रसित घोड़ा व खच्चर
Updated Sun, 19 Aug 2018 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औरैया। कसबा खानपुर में एक बार फिर ग्लैंडर्स फारसी का रोगी घोड़ा और एक खच्चर पाया गया है। पशु चिकित्सा विभाग ने इन दोनों जानवरों का ब्लड का सैंपल हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र में भेजा था। जहां पाजिटिव रिपोर्ट आने के बाद इसका खुलासा हुआ। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने डीएम श्रीकांत मिश्रा के संज्ञान में मामला लाकर घोड़े और खच्चर को मौत की नींद सुलाने के बाद उन्हें दफन करने का आदेश प्राप्त कर लिया है। डीएम की ओर से 20 अगस्त की तिथि निर्धारित की गई है.
लाइलाज बीमारी ग्लैंडर्स फारसी से ग्रसित पशुओं के शहर में दूसरी बार चिह्नित होने पर जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। एक माह पहले कसबा खानपुर में दो घोड़ों में ग्लैंडर्स फारसी बीमारी पाई गई थी। दोनों घोड़ों को डीएम के आदेश पर मार डाला गया था और उन्हें गहरे गड्ढे में दफना दिया गया था। बता दें कि ग्लैंडर्स फारसी एक ऐसी बीमारी है, जो घोड़ों, खच्चरों से मनुष्यों में भी हो सकती है।
ऐसे में स्वास्थ्य महकमे ने कसबा खानपुर के 32 लोगों के खून का सैंपल लिया था। लगभग 18 सैंपल संदेह के आधार पर जांच के लिए हिसार स्थित रा भेजे गए थे। हालांकि किसी भी व्यक्ति में इस बीमारी के वायरस नहीं पाए गए थे। इधर शुक्रवार को खानपुर में इस बीमारी से ग्रसित दो जानवरों के और मिलने पर जिला प्रशासन के कान खड़े हो गए है।
विज्ञापन
कसबा निवासी रहीस के घोड़े व पप्पू के खच्चर में ग्लैंडर्स फारसी बीमारी पाई गई है। हिसार से इन जानवरों के खून के जांच की रिपोर्ट में बीमारी होना बताया गया है। पशु चिकित्साधिकारी की ओर से डीएम को उक्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। 20 अगस्त को दोनोें जानवरों को तय दवाओं के माध्यम से मौत की नींद सुलाने के बाद गड्ढा खोदकर दफनाया जाएगा। इस संबंध में डिप्टी सीवीओ डॉ. मोहर सिंह ने बताया कि दोनों जानवरोें को मौत देने के लिए 20 अगस्त का दिन निर्धारित किया गया है।
विज्ञापन
लाइलाज बीमारी ग्लैंडर्स फारसी से ग्रसित पशुओं के शहर में दूसरी बार चिह्नित होने पर जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। एक माह पहले कसबा खानपुर में दो घोड़ों में ग्लैंडर्स फारसी बीमारी पाई गई थी। दोनों घोड़ों को डीएम के आदेश पर मार डाला गया था और उन्हें गहरे गड्ढे में दफना दिया गया था। बता दें कि ग्लैंडर्स फारसी एक ऐसी बीमारी है, जो घोड़ों, खच्चरों से मनुष्यों में भी हो सकती है।
विज्ञापन
ऐसे में स्वास्थ्य महकमे ने कसबा खानपुर के 32 लोगों के खून का सैंपल लिया था। लगभग 18 सैंपल संदेह के आधार पर जांच के लिए हिसार स्थित रा भेजे गए थे। हालांकि किसी भी व्यक्ति में इस बीमारी के वायरस नहीं पाए गए थे। इधर शुक्रवार को खानपुर में इस बीमारी से ग्रसित दो जानवरों के और मिलने पर जिला प्रशासन के कान खड़े हो गए है।
विज्ञापन
कसबा निवासी रहीस के घोड़े व पप्पू के खच्चर में ग्लैंडर्स फारसी बीमारी पाई गई है। हिसार से इन जानवरों के खून के जांच की रिपोर्ट में बीमारी होना बताया गया है। पशु चिकित्साधिकारी की ओर से डीएम को उक्त रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। 20 अगस्त को दोनोें जानवरों को तय दवाओं के माध्यम से मौत की नींद सुलाने के बाद गड्ढा खोदकर दफनाया जाएगा। इस संबंध में डिप्टी सीवीओ डॉ. मोहर सिंह ने बताया कि दोनों जानवरोें को मौत देने के लिए 20 अगस्त का दिन निर्धारित किया गया है।