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Auraiya News: 68 परीक्षा केंद्र, 1300 फुटेज की निगरानी के लिए केवल छह लोग
Tue, 04 Mar 2025 11:31 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 04 Mar 2025 11:31 PM IST
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कंट्रोल रूम में परीक्षा केंद्रों पर नजर रखते कर्मचारी।
- फोटो : कंट्रोल रूम में परीक्षा केंद्रों पर नजर रखते कर्मचारी।
औरैया। जिले में 68 परीक्षा केंद्र, करीब 700 परीक्षा कक्ष और 1300 से अधिक फुटेज की निगरानी के लिए केवल छह लोग। ऐसे में क्या सभी फुटेज पर निगाह रखी जा सकती है?
यह हकीकत है यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी व्यवस्था की। दावा बेहतर निगरानी का भले ही किया जा रहा है, लेकिन इतनी खामियां हैं कि यह प्रभावी नजर नहीं आ रही है।
जिले में यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए 68 केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक परीक्षा केंद्र में यदि 10 कक्ष हुए तो सभी मिलाकर 680 कक्ष हो जाते हैं। इन कक्षों को कैमरे के माध्यम से टीवी स्क्रीन पर निगरानी करनी है। इसके लिए जिला स्तर पर डीआईओएस कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। 680 कक्षों की निगरानी के लिए छह कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
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प्रत्येक कक्ष में एक आगे की ओर और दूसरा कैमरा पीछे की ओर लगाया गया है। ऐसे में फुटेज की संख्या 1360 हो जाती है। जानकार बताते हैं कि एक समय पर एक कर्मचारी स्क्रीन पर 11 से 12 फुटेज ही देख पाता है। जाहिर की कई फुटेज पर निगरानी करने वालों की निगाह नहीं जा पा रही है। यही वजह है कि इसका फायदा नकल करने व कराने वाले उठा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सोमवार को सिद्धार्थ इंटर कॉलेज में नकल कराने के दौरान कर्मचारी कक्ष में पीछे के दरवाजे से दाखिल हुआ था। जाहिर है कि सीसीटीवी कैमरों से परीक्षा की निगरानी की व्यवस्था कारगर सिद्ध नहीं हो रही है।
यही नहीं, कई केंद्रों पर इंटरनेट और बिजली की समस्या भी आड़े आ रही है। इस वजह से लाइव फुटेज नहीं मिल पा रहे है। खास करके ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां पर इंटरनेट धीमा चलने की समस्या है।
कंट्रोल रूम के जरिए परीक्षा केंद्रों की बारीकी से नजर रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कंट्रोल रूम में सुबह और दोपहर की पाली में परीक्षा की निगरानी के लिए छह-छह कर्मचारियों की तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम में लगी टीवी स्क्रीन पर जनपद में बनाए गए 68 परीक्षा केंद्रों के कक्षों पर नजर रखी जाती है।
- जीएस राजपूत, प्रभारी डीआईओएस
महंगी है व्यवस्था
बोर्ड परीक्षा की सुचिता को लेकर शासन स्तर से कंट्रोल रूम समेत परीक्षा कक्षों को हाईटेक बनाने पर भारी भरकम रकम खर्च की गई है। कक्षों में सीसीटीवी कैमरे, डीबीआर, वॉइस रिकॉर्डर व कंट्रोल रूम में मॉनीटरिंग के लिए हाईटेक उपकरण लगाए गए हैं। कर्मचारियों की तैनाती की गई है, लेकिन यह सब बेकार साबित हो रहे हैं।
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इशारों से कराई जा रही नकल
यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईटेक इंतजाम के बाद नकल का तरीका बदल गया है। पहले नकल पर्चियों से होती थी। कक्षों में इमला बोलकर कराई जाती थी। अब केंद्रों में चुनिंदा परीक्षार्थियों को इशारों से नकल कराई जाती है। जानकारों की मानें तो पहले हर परीक्षा में विषय के दो-दो प्रश्न पत्र होते थे। अब केवल एक पेपर होता है। उसमें भी बहुविकल्पी प्रश्नों की संख्या ज्यादा रहती है। इनके अलावा एक दो नंबर के भी सवाल होते हैं। ऐसे में नकल कराने में काफी हद तक आसानी होती है। इशारों से ही काम चल जा रहा है।
केंद्र व्यवस्थापक और कर्मचारी को जेल
नकल प्रकरण में प्रबंधक, केंद्र व्यवस्थापक और कर्मचारी पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी केंद्र व्यवस्थापक व कर्मचारी को जेल भेजा जा चुका है। विवेचना के बाद पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।
-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, जिलाधिकारी औरैया
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यह हकीकत है यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी व्यवस्था की। दावा बेहतर निगरानी का भले ही किया जा रहा है, लेकिन इतनी खामियां हैं कि यह प्रभावी नजर नहीं आ रही है।
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जिले में यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए 68 केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक परीक्षा केंद्र में यदि 10 कक्ष हुए तो सभी मिलाकर 680 कक्ष हो जाते हैं। इन कक्षों को कैमरे के माध्यम से टीवी स्क्रीन पर निगरानी करनी है। इसके लिए जिला स्तर पर डीआईओएस कार्यालय में कंट्रोल रूम बनाया गया है। 680 कक्षों की निगरानी के लिए छह कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
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प्रत्येक कक्ष में एक आगे की ओर और दूसरा कैमरा पीछे की ओर लगाया गया है। ऐसे में फुटेज की संख्या 1360 हो जाती है। जानकार बताते हैं कि एक समय पर एक कर्मचारी स्क्रीन पर 11 से 12 फुटेज ही देख पाता है। जाहिर की कई फुटेज पर निगरानी करने वालों की निगाह नहीं जा पा रही है। यही वजह है कि इसका फायदा नकल करने व कराने वाले उठा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सोमवार को सिद्धार्थ इंटर कॉलेज में नकल कराने के दौरान कर्मचारी कक्ष में पीछे के दरवाजे से दाखिल हुआ था। जाहिर है कि सीसीटीवी कैमरों से परीक्षा की निगरानी की व्यवस्था कारगर सिद्ध नहीं हो रही है।
यही नहीं, कई केंद्रों पर इंटरनेट और बिजली की समस्या भी आड़े आ रही है। इस वजह से लाइव फुटेज नहीं मिल पा रहे है। खास करके ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां पर इंटरनेट धीमा चलने की समस्या है।
कंट्रोल रूम के जरिए परीक्षा केंद्रों की बारीकी से नजर रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। कंट्रोल रूम में सुबह और दोपहर की पाली में परीक्षा की निगरानी के लिए छह-छह कर्मचारियों की तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम में लगी टीवी स्क्रीन पर जनपद में बनाए गए 68 परीक्षा केंद्रों के कक्षों पर नजर रखी जाती है।
- जीएस राजपूत, प्रभारी डीआईओएस
महंगी है व्यवस्था
बोर्ड परीक्षा की सुचिता को लेकर शासन स्तर से कंट्रोल रूम समेत परीक्षा कक्षों को हाईटेक बनाने पर भारी भरकम रकम खर्च की गई है। कक्षों में सीसीटीवी कैमरे, डीबीआर, वॉइस रिकॉर्डर व कंट्रोल रूम में मॉनीटरिंग के लिए हाईटेक उपकरण लगाए गए हैं। कर्मचारियों की तैनाती की गई है, लेकिन यह सब बेकार साबित हो रहे हैं।
इशारों से कराई जा रही नकल
यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईटेक इंतजाम के बाद नकल का तरीका बदल गया है। पहले नकल पर्चियों से होती थी। कक्षों में इमला बोलकर कराई जाती थी। अब केंद्रों में चुनिंदा परीक्षार्थियों को इशारों से नकल कराई जाती है। जानकारों की मानें तो पहले हर परीक्षा में विषय के दो-दो प्रश्न पत्र होते थे। अब केवल एक पेपर होता है। उसमें भी बहुविकल्पी प्रश्नों की संख्या ज्यादा रहती है। इनके अलावा एक दो नंबर के भी सवाल होते हैं। ऐसे में नकल कराने में काफी हद तक आसानी होती है। इशारों से ही काम चल जा रहा है।
केंद्र व्यवस्थापक और कर्मचारी को जेल
नकल प्रकरण में प्रबंधक, केंद्र व्यवस्थापक और कर्मचारी पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपी केंद्र व्यवस्थापक व कर्मचारी को जेल भेजा जा चुका है। विवेचना के बाद पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।
-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, जिलाधिकारी औरैया