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Auraiya News: लेखपालों के आंदोलन में पिस रही जनता, 1500 प्रमाणपत्र अटके
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औरैया। वेतन विसंगतियों व अन्य समस्याओं को दूर कराने की मांगों पर खफा लेखपालों की नाराजगी बढ़ती चली जा रही है। 22 सितंबर को जहां लेखपालों ने अतिरिक्त क्षेत्रों का चार्ज छोड़ा, वहीं आठ अक्तूबर से पूरी तरह ऑनलाइन काम बंद कर दिया। स्थिति यह हो गई है कि आय, जाति, मूल निवास, ईडब्ल्यूएस के 1500 आवेदन जिले की तीनों तहसीलों में पेंडिंग हो गए हैं। शासन और लेखपालों के बीच जनता पिस रही है।
बिधूना, अजीतमल और सदर तहसील में करीब 168 लेखपालों की तैनाती है। कई लेखपालों को दो से तीन क्षेत्रों के चार्ज समेत तहसील की भी जिम्मेदारी सौंपी जाती है। वेतन विसंगतियों और भुगतान समेत प्रोन्नति को लेकर लेखपाल संघ के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर क्रमिक विरोध प्रदर्शन इन दिनों जनपद में जारी है। 22 सितंबर को जनपद के सभी लेखपालों ने तैनाती वाले क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों के बस्ते जमा कर दिए थे। इसके अलावा आय जाति समेत अन्य प्रमाण पत्रों के लिए होने वाले आवेदनों को वापस करना शुरू कर दिया था।
इसके बाद लेखपालों ने प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुपों को भी छोड़ दिया। अब इस कड़ी में आठ अक्तूबर से लेखपालों ने पूरी तरह से ऑनलाइन कार्य बंद कर दिया है। प्रमाण पत्रों के लिए हो रहे आवेदनों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती चली जा रही हैं। बिधूना, अजीतमल और सदर तहसील स्तर पर आवेदन की पेंडेंसी का आंकड़ा 1500 तक पहुंच गया है।
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विभागीय अधिकारी इस मसले को लेकर कर्मियों से संवाद भी कर रहे हैं। लेकिन शासन स्तर से सुध न लेने की वजह से यह मामला और बढ़ता जा रहा है। खास बात यह है कि जनता के जरूरी काम रुक गए हैं। उन्हें भटकना पड़ रहा है।
अमीनों ने खड़े कर दिए हाथ
विभागीय सूत्रों के अनुसार, लेखपालों के विरोध प्रदर्शन पर अधिकारियों ने अमीनों से ऑनलाइन आवेदनों के निस्तारण की तैयारी बनाई। इसके लिए अमीनों की आईडी बनाने का प्रयास किया गया। इन आवेदनों के तकनीकी निस्तारण की वजह से अमीनों ने भी हाथ खड़े कर दिए। यही नहीं, अमीन संघ ने भी लेखपाल संघ के प्रदर्शन को समर्थन दे दिया है। ऐसे में अब व्यवस्थाओं को सुचारु बनाना अधिकारियों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
लंबित निस्तारण की न दिखे खामी, इसका भी निकाला गया तोड़
तहसील सूत्रों की मानें तो आय, जाति, मूल निवास आदि प्रमाण पत्रों के लिए इन दिनों बड़े पैमाने पर आवेदन हो रहे हैं। इन आवेदनों को तहसीलदार स्तर से ही निरस्त कर दिया जा रहा है। ऐसे में लखनऊ स्तर से पेंडेंसी आवेदनों के सापेक्ष कम दिख रही है। ऐसे में प्रदेश स्तर पर होने वाली मानीटरिंग में लोगों की समस्याएं भी नजर नहीं आ रही हैं।
सुपर टेट व रेलवे के आवेदन को बचे चंद दिन
कंचौसी की पायल गुप्ता ने बताया कि 24 सितंबर को जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। अभी तक बन नहीं सका है। सुपर टेट के लिए आवेदन करना है। 15 अक्तूबर अंतिम तारीख है। इसी तरह औरैया की प्रिया बघेल कहती हैं कि रेलवे में एक्सरे टेक्नीशियन में आवेदन करना था। 14 अक्तूबर अंतिम तारीख है। जाति प्रमाण पत्र के लिए दो हफ्ते पहले आवेदन किया था। लेखपाल स्तर से लंबित है।
वर्जन-- -
लेखपालों को 100 रुपये साइकिल भत्ता, 200 रुपये स्टेशनरी मिलते हैं, जबकि उनसे तीन हल्कों का काम एक वेतन पर कराया जाता है। काम का बोझ बढ़ने और सहूलियतें न मिलने के विरोध में लेखपाल संघ प्रदर्शन कर रहा है। मांगें न मानी जाने पर 17 अक्तूबर को ऑफलाइन कार्य का भी पूरी तरह से बहिष्कार होगा। अमीन संघ ने भी समर्थन दे दिया है। - पतंजलि दुबे, जिलाध्यक्ष, लेखपाल संघ
वर्जन-- -
लेखपालों के विरोध प्रदर्शन को लेकर कानूनगो की आईडी बनाकर आय, जाति व मूल निवास के आवेदनों का निस्तारण कराया जा रहा है। प्रदर्शन की वजह से पेंडेंसी कुछ बढ़ी है, लेकिन आने वाले दिनों में इसे कम कर लिया जाएगा।-ब्रह्मानंद, एसडीएम सदर
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बिधूना, अजीतमल और सदर तहसील में करीब 168 लेखपालों की तैनाती है। कई लेखपालों को दो से तीन क्षेत्रों के चार्ज समेत तहसील की भी जिम्मेदारी सौंपी जाती है। वेतन विसंगतियों और भुगतान समेत प्रोन्नति को लेकर लेखपाल संघ के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर क्रमिक विरोध प्रदर्शन इन दिनों जनपद में जारी है। 22 सितंबर को जनपद के सभी लेखपालों ने तैनाती वाले क्षेत्र के अलावा अन्य क्षेत्रों के बस्ते जमा कर दिए थे। इसके अलावा आय जाति समेत अन्य प्रमाण पत्रों के लिए होने वाले आवेदनों को वापस करना शुरू कर दिया था।
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इसके बाद लेखपालों ने प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुपों को भी छोड़ दिया। अब इस कड़ी में आठ अक्तूबर से लेखपालों ने पूरी तरह से ऑनलाइन कार्य बंद कर दिया है। प्रमाण पत्रों के लिए हो रहे आवेदनों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती चली जा रही हैं। बिधूना, अजीतमल और सदर तहसील स्तर पर आवेदन की पेंडेंसी का आंकड़ा 1500 तक पहुंच गया है।
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विभागीय अधिकारी इस मसले को लेकर कर्मियों से संवाद भी कर रहे हैं। लेकिन शासन स्तर से सुध न लेने की वजह से यह मामला और बढ़ता जा रहा है। खास बात यह है कि जनता के जरूरी काम रुक गए हैं। उन्हें भटकना पड़ रहा है।
अमीनों ने खड़े कर दिए हाथ
विभागीय सूत्रों के अनुसार, लेखपालों के विरोध प्रदर्शन पर अधिकारियों ने अमीनों से ऑनलाइन आवेदनों के निस्तारण की तैयारी बनाई। इसके लिए अमीनों की आईडी बनाने का प्रयास किया गया। इन आवेदनों के तकनीकी निस्तारण की वजह से अमीनों ने भी हाथ खड़े कर दिए। यही नहीं, अमीन संघ ने भी लेखपाल संघ के प्रदर्शन को समर्थन दे दिया है। ऐसे में अब व्यवस्थाओं को सुचारु बनाना अधिकारियों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
लंबित निस्तारण की न दिखे खामी, इसका भी निकाला गया तोड़
तहसील सूत्रों की मानें तो आय, जाति, मूल निवास आदि प्रमाण पत्रों के लिए इन दिनों बड़े पैमाने पर आवेदन हो रहे हैं। इन आवेदनों को तहसीलदार स्तर से ही निरस्त कर दिया जा रहा है। ऐसे में लखनऊ स्तर से पेंडेंसी आवेदनों के सापेक्ष कम दिख रही है। ऐसे में प्रदेश स्तर पर होने वाली मानीटरिंग में लोगों की समस्याएं भी नजर नहीं आ रही हैं।
सुपर टेट व रेलवे के आवेदन को बचे चंद दिन
कंचौसी की पायल गुप्ता ने बताया कि 24 सितंबर को जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था। अभी तक बन नहीं सका है। सुपर टेट के लिए आवेदन करना है। 15 अक्तूबर अंतिम तारीख है। इसी तरह औरैया की प्रिया बघेल कहती हैं कि रेलवे में एक्सरे टेक्नीशियन में आवेदन करना था। 14 अक्तूबर अंतिम तारीख है। जाति प्रमाण पत्र के लिए दो हफ्ते पहले आवेदन किया था। लेखपाल स्तर से लंबित है।
वर्जन
लेखपालों को 100 रुपये साइकिल भत्ता, 200 रुपये स्टेशनरी मिलते हैं, जबकि उनसे तीन हल्कों का काम एक वेतन पर कराया जाता है। काम का बोझ बढ़ने और सहूलियतें न मिलने के विरोध में लेखपाल संघ प्रदर्शन कर रहा है। मांगें न मानी जाने पर 17 अक्तूबर को ऑफलाइन कार्य का भी पूरी तरह से बहिष्कार होगा। अमीन संघ ने भी समर्थन दे दिया है। - पतंजलि दुबे, जिलाध्यक्ष, लेखपाल संघ
वर्जन
लेखपालों के विरोध प्रदर्शन को लेकर कानूनगो की आईडी बनाकर आय, जाति व मूल निवास के आवेदनों का निस्तारण कराया जा रहा है। प्रदर्शन की वजह से पेंडेंसी कुछ बढ़ी है, लेकिन आने वाले दिनों में इसे कम कर लिया जाएगा।-ब्रह्मानंद, एसडीएम सदर