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बारिश से बढ़ी मुश्किलें, किसान भी परेशान
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:10 AM IST
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बारिश से बढ़ी मुश्किलें, किसान भी परेशान
उरई। भादों की शुरूआत से ही बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुरुवार की देर रात से ही हो रही बूंदाबांदी सुबह होते-होते रिमझिम बारिश में तब्दील हो गई। जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित बनी रही। बच्चे बूंदाबांदी के बीच जलभराव से होते हुए स्कूलों को पहुंचे। इसी तरह रोजमर्रा के काम पर जाने वालों को भी छाता अथवा रेनकोट का सहारा लेना पड़ा।
बाजारों में भी सन्नाटा रहा और दुकानदार सुबह दुकान खोलते ही सफाई के बजाए पानी निकालते दिखाई दिए। गलियों में भी जलभराव की स्थिति रही। जहां नाले नालियां चोक थीं, वहां गंदगी सड़कों पर तैरती नजर आई। दोपहर बारह बजे तक रिमझिम बारिश का सिलसिला जारी रहा। बारिश ने अन्नदाता के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी है। किसानों का कहना है कि बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत कभी सूखे तो कभी बाढ़ के कारण खराब ही बनी रहती है।
शहर के रामनगर, सुशील नगर, उमरारखेड़ा, शांतिनगर, इंदिरा नगर आदि इलाकों में बारिश के कारण लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ा। बलदाऊ चौक, स्टेशन रोड, घंटाघर, जिला परिषद, कालपी स्टैंड के आसपास की बाजारों में जन्माष्टमी का त्योहार नजदीक होने के बाद भी दोपहर तक सन्नाटा पसरा रहा। कुछ एक दुकानों में पानी भर गया तो दुकानदार नगर पालिका को कोसते नजर आए। यही हाल गांव कस्बों का भी रहा। जहां की कच्ची सड़कें कीचड़ से सनी नजर आईं और लोगों को मजबूरन उससे होते हुए अपने जरूरी कामकाज निपटाने पड़े।
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मुहम्मदाबाद प्रतिनिधि के मुताबिक, डकोर, ऐरी रामपुरा, मुहाना, बंदौली आदि गांवों की सड़कें कीचड़ और दलदल से पट गईं। बच्चे जलभराव से होते हुए स्कूल पहुंचे तो वहां भी पानी भरा मिला। मुहाना के गड्ढों में हुए जलभराव से राहगीर परेशान रहे। कदौरा प्रतिनिधि के मुताबिक, बस स्टैंड से लेकर बाजार तक पानी ही पानी नजर आ रहा था। जलभराव के कारण बाजार की दुकानें भी देर से खुलीं। नाले चोक होने से गलियां भी बरसात के पानी से लबालब दिखीं।
आटा प्रतिनिधि के अनुसार लगातार हो रही बारिश के कारण गली कूंचों का जलभराव लोगों के घरों के भीतर तक पहुंच गया। जिससे गृहस्थी का सामान भी खराब हो गया। अकोड़ी और संधि गांव में तो रोड पर पक्का तालाब के ऊपर से पानी बह रहा था।
पूरे दिन महिलाएं और बच्चे पानी उलीचते नजर आए। एट में भी बारिश के कारण सड़कों पर पैदल चलना दुश्वार रहा। सिरसाकलार, माधौगढ़, सरावन में भी बारिश ने लोगों को घरों में कैद रखा, जो बाहर निकले उन्हें सड़कों की गंदगी, जलभराव और कीचड़ से गुजरना पड़ा।
रुकी नहीं बारिश तो बढ़ेगा नुकसान
एट के किसान गोविंद सिंह कहते हैं कि ऐसे ही बारिश होती रही तो पिपरमेंट और धान की फसलों को काफी नुकसान होगा। पिछली बार सूखे और अन्ना जानवरों की वजह से फसलों को काफी नुकसान हो चुका है। भरपाई करने वाला कोई नहीं दिखाई देता है।
अरमानों पर फिर रहा पानी
पहाड़गांव के किसान कपिल राजपूत बोले कि तिल की फसल तो पहले ही बर्बाद हो चुकी है, यही हाल रहा तो रोपा भी नहीं बचेगा। किसान कहां कहां से रुपयों का इंतजाम कर खेती करता है, कुदरत का कहर हर बार अरमानों पर फेर देता है।
इस बार किसानों को लगेगा तगड़ा झटका
सिरसाकलार के किसान शिवनारायण का कहना है कि पहले लेट हुई बारिश से बाजरा की बुआई लेट हो पाई। अब जब बाजरा जमने को है तो लगातार बारिश से नुकसान की आशंका है। ऐसे रुक रुक कर हो रही बारिश से अरहर और ज्वार दोनों को ही नुकसान होना तय है। साथ ही किसान को भी तगड़ा झटका लगेगा।
गुरुवार की देर रात से हो रही रिमझिम बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त
अमर उजाला ब्यूरो
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उरई। भादों की शुरूआत से ही बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गुरुवार की देर रात से ही हो रही बूंदाबांदी सुबह होते-होते रिमझिम बारिश में तब्दील हो गई। जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित बनी रही। बच्चे बूंदाबांदी के बीच जलभराव से होते हुए स्कूलों को पहुंचे। इसी तरह रोजमर्रा के काम पर जाने वालों को भी छाता अथवा रेनकोट का सहारा लेना पड़ा।
बाजारों में भी सन्नाटा रहा और दुकानदार सुबह दुकान खोलते ही सफाई के बजाए पानी निकालते दिखाई दिए। गलियों में भी जलभराव की स्थिति रही। जहां नाले नालियां चोक थीं, वहां गंदगी सड़कों पर तैरती नजर आई। दोपहर बारह बजे तक रिमझिम बारिश का सिलसिला जारी रहा। बारिश ने अन्नदाता के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच दी है। किसानों का कहना है कि बुंदेलखंड के किसानों की किस्मत कभी सूखे तो कभी बाढ़ के कारण खराब ही बनी रहती है।
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शहर के रामनगर, सुशील नगर, उमरारखेड़ा, शांतिनगर, इंदिरा नगर आदि इलाकों में बारिश के कारण लोगों को जलभराव का सामना करना पड़ा। बलदाऊ चौक, स्टेशन रोड, घंटाघर, जिला परिषद, कालपी स्टैंड के आसपास की बाजारों में जन्माष्टमी का त्योहार नजदीक होने के बाद भी दोपहर तक सन्नाटा पसरा रहा। कुछ एक दुकानों में पानी भर गया तो दुकानदार नगर पालिका को कोसते नजर आए। यही हाल गांव कस्बों का भी रहा। जहां की कच्ची सड़कें कीचड़ से सनी नजर आईं और लोगों को मजबूरन उससे होते हुए अपने जरूरी कामकाज निपटाने पड़े।
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मुहम्मदाबाद प्रतिनिधि के मुताबिक, डकोर, ऐरी रामपुरा, मुहाना, बंदौली आदि गांवों की सड़कें कीचड़ और दलदल से पट गईं। बच्चे जलभराव से होते हुए स्कूल पहुंचे तो वहां भी पानी भरा मिला। मुहाना के गड्ढों में हुए जलभराव से राहगीर परेशान रहे। कदौरा प्रतिनिधि के मुताबिक, बस स्टैंड से लेकर बाजार तक पानी ही पानी नजर आ रहा था। जलभराव के कारण बाजार की दुकानें भी देर से खुलीं। नाले चोक होने से गलियां भी बरसात के पानी से लबालब दिखीं।
आटा प्रतिनिधि के अनुसार लगातार हो रही बारिश के कारण गली कूंचों का जलभराव लोगों के घरों के भीतर तक पहुंच गया। जिससे गृहस्थी का सामान भी खराब हो गया। अकोड़ी और संधि गांव में तो रोड पर पक्का तालाब के ऊपर से पानी बह रहा था।
पूरे दिन महिलाएं और बच्चे पानी उलीचते नजर आए। एट में भी बारिश के कारण सड़कों पर पैदल चलना दुश्वार रहा। सिरसाकलार, माधौगढ़, सरावन में भी बारिश ने लोगों को घरों में कैद रखा, जो बाहर निकले उन्हें सड़कों की गंदगी, जलभराव और कीचड़ से गुजरना पड़ा।
रुकी नहीं बारिश तो बढ़ेगा नुकसान
एट के किसान गोविंद सिंह कहते हैं कि ऐसे ही बारिश होती रही तो पिपरमेंट और धान की फसलों को काफी नुकसान होगा। पिछली बार सूखे और अन्ना जानवरों की वजह से फसलों को काफी नुकसान हो चुका है। भरपाई करने वाला कोई नहीं दिखाई देता है।
अरमानों पर फिर रहा पानी
पहाड़गांव के किसान कपिल राजपूत बोले कि तिल की फसल तो पहले ही बर्बाद हो चुकी है, यही हाल रहा तो रोपा भी नहीं बचेगा। किसान कहां कहां से रुपयों का इंतजाम कर खेती करता है, कुदरत का कहर हर बार अरमानों पर फेर देता है।
इस बार किसानों को लगेगा तगड़ा झटका
सिरसाकलार के किसान शिवनारायण का कहना है कि पहले लेट हुई बारिश से बाजरा की बुआई लेट हो पाई। अब जब बाजरा जमने को है तो लगातार बारिश से नुकसान की आशंका है। ऐसे रुक रुक कर हो रही बारिश से अरहर और ज्वार दोनों को ही नुकसान होना तय है। साथ ही किसान को भी तगड़ा झटका लगेगा।
गुरुवार की देर रात से हो रही रिमझिम बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त
अमर उजाला ब्यूरो