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श्रीराम कथा जीवन का संविधान है
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दिबियापुर (औरैया)। श्रीराम कथा जीवन का संविधान है। यह समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान से जीने का भाव सिखाती है। यह बात रविवार को कैलाश बाग में हो रहे मानस सत्संग समारोह में मैनपुरी से आए कथा वाचक पं. ज्ञान प्रकाश शुक्ला ने कही। इस प्रसंग में उन्होंने श्रीराम चरित मानस और श्री राम के आचरण के बारे में समाज और मानव जीवन के लिए स्थापित किए गए आदर्शों का मनोहारी चित्रण किया।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर उस समय पृथ्वी पर अत्याचारियों के शासन का अंत किया। एक ऐसे राज्य की स्थापना की, जिसमें न कोई बुद्धिहीन न कोई दुखी न कोई निर्धन और न कोई दीन हीन रहा है।
आज तक सृष्टि में रामराज से बढ़कर कोई भी सुंदर राज नहीं हुआ। समाज के कल्याण और प्रकृति के कल्याण के लिए राम राज से सुंदर और उत्तम कोई व्यवस्था नहीं है। कथा आयोजकों ने बताया कि श्रीराम कथा रोजाना रात आठ से नौ बजे तक होती है।
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इस दौरान रामबाबू द्विवेदी, डॉ. रामचंद्र दीक्षित, ओम प्रकाश त्रिपाठी, देवी चरण वर्मा, एमपी शुक्ला, लालजी पांडे, अरुण कुमार त्रिपाठी, शिव कुमार द्विवेदी, गगन कुमार मिश्र, सोने लाल प्रजापति, प्रदीप शुक्ला, श्रीकृष्ण यादव, महेंद्र प्रताप रघुवंशी, राधाकृष्ण शर्मा, महेश चंद्र पांडेय व अतुल कुमार द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर उस समय पृथ्वी पर अत्याचारियों के शासन का अंत किया। एक ऐसे राज्य की स्थापना की, जिसमें न कोई बुद्धिहीन न कोई दुखी न कोई निर्धन और न कोई दीन हीन रहा है।
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आज तक सृष्टि में रामराज से बढ़कर कोई भी सुंदर राज नहीं हुआ। समाज के कल्याण और प्रकृति के कल्याण के लिए राम राज से सुंदर और उत्तम कोई व्यवस्था नहीं है। कथा आयोजकों ने बताया कि श्रीराम कथा रोजाना रात आठ से नौ बजे तक होती है।
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इस दौरान रामबाबू द्विवेदी, डॉ. रामचंद्र दीक्षित, ओम प्रकाश त्रिपाठी, देवी चरण वर्मा, एमपी शुक्ला, लालजी पांडे, अरुण कुमार त्रिपाठी, शिव कुमार द्विवेदी, गगन कुमार मिश्र, सोने लाल प्रजापति, प्रदीप शुक्ला, श्रीकृष्ण यादव, महेंद्र प्रताप रघुवंशी, राधाकृष्ण शर्मा, महेश चंद्र पांडेय व अतुल कुमार द्विवेदी आदि मौजूद रहे।