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बैंक कर्मियों की हड़ताल से 40 करोड़ की क्लियरिंग फंसी
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औरैया। बैंकों का निजीकरण किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर सोमवार से बैंक कर्मियों ने दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। पहले दिन कचहरी के पास स्थित एसबीआई की शाखा के बाहर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। हड़ताल से 40 करोड़ की क्लीयरिंग प्रभावित हुई।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिलामंत्री जितेंद्र तोमर ने कहा कि निजी क्षेत्र के बड़े बैंक आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और एक्सिस, कभी सरकारी थे। लेकिन सरकार ने इन्हें निजी क्षेत्रों को बेच दिया था। सरकारी बैंक आम जनता, किसानों, लघु बचत कर्ताओं, पेंशन भोगियों, पिछड़े वर्गों, महिलाओं व बेरोजगारों के हित में कार्य कर सामाजिक दायित्व का पालन करते हैं। ऐसे में अब इनका निजीकरण होने से सभी वर्ग प्रभावित होंगे। बैंक कर्मियों में भी असुरक्षा की भावना रहेगी।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष रघुवीर तिवारी ने बताया कि बैंकों के निजीकरण से लघु बचत योजनाओं पर ब्याज में कमी, सीमांत और छोटे किसानों की कृषि कार्य से बेदखली, छोटे व मध्यम उद्योगों के लिए व्यापारियों को ऋण लेने में कठिनाई, ग्राहकों के लिए अधिक सेवा शुल्क, स्थायी नौकरियों में कमी आदि समस्याएं आएंगी। सेंट्रल बैंक ऑफ एसोसिएशन के जिलामंत्री कमल दीक्षित ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई। इस मौके पर विनय अग्रवाल, जीपी गुप्ता, श्याम बाबू, आरपी गुप्ता, राम विलास, रामकृपाल सिंह, आशीष कुमार, जितेंद्र कुमार, आशीष कुमार, शिवा कुमार, विनोद कुमार, सलिल सक्सेना, राजकिशोर सिंह, जगदीश सिंह, दीपक चंद्र, कृष्ण कुमार अग्रवाल, पीएम मिश्रा, देशराज सिंह पाल, दिलीप पटारिया, मनोज कुमार, सचिन पोरवाल, शिवानी, आशा देवी, निर्वेश त्रिपाठी, ब्रजेश सिंह आदि बैंक कर्मी मौजूद रहे।
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यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिलामंत्री जितेंद्र तोमर ने कहा कि निजी क्षेत्र के बड़े बैंक आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और एक्सिस, कभी सरकारी थे। लेकिन सरकार ने इन्हें निजी क्षेत्रों को बेच दिया था। सरकारी बैंक आम जनता, किसानों, लघु बचत कर्ताओं, पेंशन भोगियों, पिछड़े वर्गों, महिलाओं व बेरोजगारों के हित में कार्य कर सामाजिक दायित्व का पालन करते हैं। ऐसे में अब इनका निजीकरण होने से सभी वर्ग प्रभावित होंगे। बैंक कर्मियों में भी असुरक्षा की भावना रहेगी।
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यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष रघुवीर तिवारी ने बताया कि बैंकों के निजीकरण से लघु बचत योजनाओं पर ब्याज में कमी, सीमांत और छोटे किसानों की कृषि कार्य से बेदखली, छोटे व मध्यम उद्योगों के लिए व्यापारियों को ऋण लेने में कठिनाई, ग्राहकों के लिए अधिक सेवा शुल्क, स्थायी नौकरियों में कमी आदि समस्याएं आएंगी। सेंट्रल बैंक ऑफ एसोसिएशन के जिलामंत्री कमल दीक्षित ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाई। इस मौके पर विनय अग्रवाल, जीपी गुप्ता, श्याम बाबू, आरपी गुप्ता, राम विलास, रामकृपाल सिंह, आशीष कुमार, जितेंद्र कुमार, आशीष कुमार, शिवा कुमार, विनोद कुमार, सलिल सक्सेना, राजकिशोर सिंह, जगदीश सिंह, दीपक चंद्र, कृष्ण कुमार अग्रवाल, पीएम मिश्रा, देशराज सिंह पाल, दिलीप पटारिया, मनोज कुमार, सचिन पोरवाल, शिवानी, आशा देवी, निर्वेश त्रिपाठी, ब्रजेश सिंह आदि बैंक कर्मी मौजूद रहे।
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