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मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मबल दिलाएगा महिलाओं को सम्मान
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औरैया। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम के तहत अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर गोष्ठी हुई, जिसमें महिलाओं को उनके अधिकार बताए गए। वक्ताओं का कहना था कि महिलाओं को सम्मान उनकी मजबूत इच्छाशक्ति से मिलेगा।
पोरवाल धर्मशाला में कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार ने महिलाओं से कहा कि महिला सशक्तीकरण की शुरुआत घर से होनी चाहिए। शिक्षा वह अहम कड़ी है जो महिलाओं से संबंधित तमाम विसंगतियों को समाप्त कर देगी। स्वावलंबन से समाज में उनकी पहचान बनेगी। कहा कि बेटियां किसी भी बाधा की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। मजबूत इरादों और इच्छाशक्ति की बदौलत लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। वर्तमान में महिलाएं देश के कई उच्च पदों पर काम कर रहीं हैं। उन्होंने बेटियों को ऐसी महिलाओं से प्रेरणा लेने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने निजी कार्यों से निकलकर अपनी पहचान बनानी होगी। मध्यकाल में महिलाएं शोषित रहीं, लेकिन समय आ गया है कि महिलाएं स्वयं निर्णय लें। जिस दिन नारी, पुरुष का भेद समाप्त होगा, निश्चित ही देश सशक्त होगा। आज पढ़ी-लिखी महिलाएं भी घर में रहकर घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। वह अपने को हीन न समझें और घर से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनें।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी संस्था विचित्र पहल की शाखा तुलसी की अध्यक्षा मीरा गुप्ता ने महिलाओं को नारी गरिमा बनाए रखने की शपथ दिलाई। इस मौके पर कई अन्य लोगों ने भी विचार व्यक्त किए।
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समाजसेवी मीरा गुप्ता ने कहा कि जिस दिन नारी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ स्वयं अपना लक्ष्य निर्धारित करेगी, निश्चित ही महिला सशक्तीकरण अभियान सफल होगा। जब तक घर से महिला सशक्तीकरण की शुरुआत नहीं होगी, तब तक सारे नारे और अभियान अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकेंगे।
समाजसेवी ज्ञान सक्सेना ने कहा कि नारी पुरुष के साथ अब कंधे से कंधा मिलकर समाज में आगे बढ़ रही है। इनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। बेटों की तरह बेटियों को भी उच्चशिक्षा दिलाए जाने की दिशा में सभी को पहल करनी होगी। तभी महिला सशक्तीकरण अभियान सफल होगा।
-महिला दिवस पर अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
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पोरवाल धर्मशाला में कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व दस्यु सुंदरी सीमा परिहार ने महिलाओं से कहा कि महिला सशक्तीकरण की शुरुआत घर से होनी चाहिए। शिक्षा वह अहम कड़ी है जो महिलाओं से संबंधित तमाम विसंगतियों को समाप्त कर देगी। स्वावलंबन से समाज में उनकी पहचान बनेगी। कहा कि बेटियां किसी भी बाधा की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य को प्राप्त करें। मजबूत इरादों और इच्छाशक्ति की बदौलत लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। वर्तमान में महिलाएं देश के कई उच्च पदों पर काम कर रहीं हैं। उन्होंने बेटियों को ऐसी महिलाओं से प्रेरणा लेने की बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने निजी कार्यों से निकलकर अपनी पहचान बनानी होगी। मध्यकाल में महिलाएं शोषित रहीं, लेकिन समय आ गया है कि महिलाएं स्वयं निर्णय लें। जिस दिन नारी, पुरुष का भेद समाप्त होगा, निश्चित ही देश सशक्त होगा। आज पढ़ी-लिखी महिलाएं भी घर में रहकर घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं। वह अपने को हीन न समझें और घर से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनें।
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कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी संस्था विचित्र पहल की शाखा तुलसी की अध्यक्षा मीरा गुप्ता ने महिलाओं को नारी गरिमा बनाए रखने की शपथ दिलाई। इस मौके पर कई अन्य लोगों ने भी विचार व्यक्त किए।
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समाजसेवी मीरा गुप्ता ने कहा कि जिस दिन नारी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ स्वयं अपना लक्ष्य निर्धारित करेगी, निश्चित ही महिला सशक्तीकरण अभियान सफल होगा। जब तक घर से महिला सशक्तीकरण की शुरुआत नहीं होगी, तब तक सारे नारे और अभियान अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकेंगे।
समाजसेवी ज्ञान सक्सेना ने कहा कि नारी पुरुष के साथ अब कंधे से कंधा मिलकर समाज में आगे बढ़ रही है। इनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। बेटों की तरह बेटियों को भी उच्चशिक्षा दिलाए जाने की दिशा में सभी को पहल करनी होगी। तभी महिला सशक्तीकरण अभियान सफल होगा।
-महिला दिवस पर अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो