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18 साल बाद भी अफसरों को आशियान की दरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Tue, 10 Mar 2015 12:36 AM IST
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...कहने को औरैया जिला सृजित हुए 18 वर्ष का लंबा सफर बीत चुका है। ऐसे में जिला स्तरीय कार्यालयों को तो ठिकाना मिल गया, लेकिन इन कार्यालयों में बैठने वाले प्रशासनिक अफसर आज भी अपने आशियानों से महरुम हैं। शनिवार को अमर उजाला ने प्रशासनिक अफसरों के शिविर कार्यालयों की टोह ली तो कुछ यूं नजारा उभरकर सामने आया।
सीडीओ आवास पर डीएम का कब्जा - 17 सितंबर 1997 में जिले का स्वरूप लेकर उभरे औरैया की विकासशील परियोजनाएं उधारी के शिविर कार्यालय भवनों से गुजरी रही हैं। जिले के प्रथम अधिकारी को ही लें तो सीडीओ के आवासीय भवन पर डीएम का शिविर कार्यालय संचालित है। ऐसा नहीं कि डीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के शिविर कार्यालयों के पहल नहीं की गई। वर्ष 2008-09 में तत्कालीन डीएम उदय प्रताप सिंह ने ग्राम पंचायत सेहुद में डीएम शिविर कार्यालय के भूमि के चिन्हीकरण की स्वीकृति दी। भूमि पर कार्यालय निर्माण की योजना फलीभूत होने के दरम्यान गांव के किसानों के कोप के चलते डीएम शिविर कार्यालय की योजना धरी रह गई। वर्ष 2012 में तत्कालीन डीएम एस राजलिंगम का ग्राम ऊमरसाना में चयनित भूमि पर आवास निर्माण का प्रस्ताव भी भूमि विवाद की भेंट चढ़ गया।
एडीएम की गिरफ्त में सीएमएस आवास - जब जिले का प्रथम अधिकारी ही बैसाखी पर निर्भर हो तो फिर उसके अधीनस्थ कैसे पीछे रहें। विकास के काल्पनिक पंखों पर सवार अपर जिलाधिकारी ने भी जिला अस्पताल परिसर स्थित सीएमएस आवास को अपनी गिरफ्त में ले रखा है।
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जल निगम का आशियाना बना एसपी का ठिकाना - इसे जिले की विडंबना ही कहा जाएगा कि अव्वल दर्जे के अधिकारियों का स्वयं का ही ठिकाना आज तक स्थायी नहीं हो सका। हाइवे स्थित जल निगम के अधिशासी अभियंता के सरकारी आवास पर एसपी साहब ने अपना ठिकाना बना रखा हैं।
शिविर कार्यालय की स्थापना कराना, हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रशासनिक अधिकारियों के शिविर कार्यालय के लिए सदर एसडीएम को भूमि चयनित करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।- माला श्रीवास्तव, डीएम
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सीडीओ आवास पर डीएम का कब्जा - 17 सितंबर 1997 में जिले का स्वरूप लेकर उभरे औरैया की विकासशील परियोजनाएं उधारी के शिविर कार्यालय भवनों से गुजरी रही हैं। जिले के प्रथम अधिकारी को ही लें तो सीडीओ के आवासीय भवन पर डीएम का शिविर कार्यालय संचालित है। ऐसा नहीं कि डीएम व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के शिविर कार्यालयों के पहल नहीं की गई। वर्ष 2008-09 में तत्कालीन डीएम उदय प्रताप सिंह ने ग्राम पंचायत सेहुद में डीएम शिविर कार्यालय के भूमि के चिन्हीकरण की स्वीकृति दी। भूमि पर कार्यालय निर्माण की योजना फलीभूत होने के दरम्यान गांव के किसानों के कोप के चलते डीएम शिविर कार्यालय की योजना धरी रह गई। वर्ष 2012 में तत्कालीन डीएम एस राजलिंगम का ग्राम ऊमरसाना में चयनित भूमि पर आवास निर्माण का प्रस्ताव भी भूमि विवाद की भेंट चढ़ गया।
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एडीएम की गिरफ्त में सीएमएस आवास - जब जिले का प्रथम अधिकारी ही बैसाखी पर निर्भर हो तो फिर उसके अधीनस्थ कैसे पीछे रहें। विकास के काल्पनिक पंखों पर सवार अपर जिलाधिकारी ने भी जिला अस्पताल परिसर स्थित सीएमएस आवास को अपनी गिरफ्त में ले रखा है।
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जल निगम का आशियाना बना एसपी का ठिकाना - इसे जिले की विडंबना ही कहा जाएगा कि अव्वल दर्जे के अधिकारियों का स्वयं का ही ठिकाना आज तक स्थायी नहीं हो सका। हाइवे स्थित जल निगम के अधिशासी अभियंता के सरकारी आवास पर एसपी साहब ने अपना ठिकाना बना रखा हैं।
शिविर कार्यालय की स्थापना कराना, हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रशासनिक अधिकारियों के शिविर कार्यालय के लिए सदर एसडीएम को भूमि चयनित करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।- माला श्रीवास्तव, डीएम