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आधी नगर पंचायतों में भाजपा का कब्जा
Updated Sat, 02 Dec 2017 01:26 AM IST
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उरई। जनपद की छह नगर पंचायतों में से 3 पर भाजपा प्रत्याशियों ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। जबकि एक-एक सीट पर सपा और बसपा ने जीत हासिल की और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। उमरी, कदौरा और नदीगांव में भाजपा दूसरे स्थान पर रही। इससे साफ है कि भाजपा ने ग्रामीण इलाकों में बढ़त बनाकर सपा और बसपा के वोट बैंक में सेंध लगाने का काम किया है। फिर राजनैतिक आका इसे आधा गिलास खाली और आधा भरा वाली स्थिति ही बता रहे हैं। चाहे तो भाजपा संतोष कर बैठ जाए या फिर बाकी की तीनों सीटों पर भी कब्जा करने के लिए अभी से ही सक्रिय हो जाए। प्रस्तुत है सभी नगर पंचायतों के परिणाम और जीते प्रत्याशियों के वादों पर आधारित खबर-
ऊमरी में रेखा ने खोला सपा का खाता
माधौगढ़। जनपद में सबसे पहले ऊमरी नगर पंचायत (अनुसूचित जाति) का परिणाम भी आया और सभी को चौंका भी गया। भाजपा की पहली हार और सपा की पहली जीत उमरी से ही हुई। यहां 14 पुरुषों और तीन महिलाओं के बीच चुनाव में डटी सपा की रेखा देवी पत्नी कैलाश ने 147 वोटों से जीत हासिल की। रेखा को कुल 1075 वोट मिले, जबकि भाजपा के प्रत्याशी वीरेंद्र दोहरे को 927 वोट मिले और 223 वोट अवैध घोषित किए गए। कुल 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। 45 वर्षीय रेखा गृहणी हैं, और उनके पति कैलाश सपा के सक्रिय सदस्य रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बसपा की बगावत ही उमरी में सपा की जीत का आधार बनी। पुरूषों के बीच जीत हासिल करने वाली रेखा का कहना है कि उनका मकसद क्षेत्र का विकास करना है और वे करेंगी, क्योकि जहां सारे दावेदार जाति का गणित लगा रहे थे, वहां पर उन्होंने सिर्फ विकास की बात की और जनता ने उन्हें जीत दिलाई। इसलिए यहां पानी, बिजली और सड़क की समस्या का सबसे पहले निदान किया जाएगा।
कदौरा में बसपा ने लहराया परचम
कदौरा। नगर पंचायत कदौरा में बसपा ने भाजपा को हराकर पार्टी का परचम फहराया। यहां बसपा प्रत्याशी जमीर आलम को 1995 वोटों से जीत हासिल हुई। जमीर के खाते में कुल 3847 वोट आए, जबकि उनके सामने भाजपा के महेश गुप्ता को 1852 वोट ही मिले। जमीर शुरूआत से ही बढ़त बनाकर चले और आखिर में उनकी जीत की घोषणा की गई। जमीर ने 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी बसपा से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें नगर पंचायत का चुनाव लड़ाने का फैसला कर लिया था। जमीर पेशे से लखनऊ कें बिल्डर हैं, लेकिन बसपा से उनका जुड़ाव काफी समय से रहा है। कारोबार और राजनीति एक साथ करने के पीछे जमीर का मानना है कि वे अपने इलाके के लिए कुछ करना चाहते थे, लखनऊ वालों को बहुत सुविधाएं दी हैं, अब अपने घर के लोगों के लिए कुछ करने का मौका मिला है तो पीछे नहीं हटूंगा और पक्की सड़कें व शौचालय बनवाकर जनता के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा।
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कोटरा में मिली भाजपा को पहली जीत
कोटरा। नगर पंचायत कोटरा में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार आशाराम ने पार्टी की जीत का खाता खोला। भाजपा के लिए सबसे पहला संतोषजनक परिणाम कोटरा से ही आया। आशाराम ने सपा के प्रत्याशी मधुसूदन उर्फ मुन्ना को 562 वोटों से हराया। आशाराम को कुल 1148 वोट मिले, जबकि मुन्ना को 595 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। आशाराम पार्टी के सक्रिय सदस्य होने के साथ साथ पेशे से किराना कारोबारी भी हैं। आशाराम का कहना है कि कोटरा इलाके में समस्याओं की भरमार हैं। उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा भी था। वे क्षेत्र की पेयजल समस्या का निदान कराएंगे। इसके अलावा बारिश दिनों में होने वाले जलभराव से निपटने के लिए नाले और नालियों का भी निर्माण कराएंगे। यहां भी वोटों की गिनती में आशाराम शुरू से ही आगे चल रहे थे।
नदीगांव में निर्दलीय भानू का बजा डंका
कोंच। अति संवेदनशील नगर पंचायत नदीगांव में निर्दलीय प्रत्याशी भानू प्रकाश वर्मा ने भाजपा प्रत्याशी दशरथ वर्मा को हराकर सभी को चौंका दिया। गुड्डा गुड़िया चुनाव चिह्न पर भानू को कुल 3011 वोट मिले, जबकि दशरथ को 1263 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस तरह भानू ने कुल 1748 वोटों से जीत दर्ज की। पेशे से किसान भानू को चुनाव लड़ाने वालों में पीछे से कुछ भाजपाई भी थे, जिन्होंने भानू का चुनाव पूरी तरह से अपने हाथ में लिया हुआ था और यही भाजपा प्रत्याशी के लिए नुकसान कर गया। कांग्रेस प्रत्याशी ने इस सीट से ऐन वक्त पर अपना नाम ही वापस ले लिया था, उस वक्त ही भानू की जीत के कयास लगने लगे थे। फिलहाल भानू का कहना है कि उनकी जीत विकास की जीत है, और वे क्षेत्र की नाली, खरंजा और सड़कों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराएंगे और नदीगांव को एक स्वच्छ, साफ सुथरी नगर पंचायत बनाने का हर संभव प्रयास करेंगे।
माधौगढ़ में भाजपा ने बसपा को हराया
माधौगढ़। नगर पंचायत माधौगढ़ में भाजपा के धुरंधर प्रत्याशी राजकिशोर गुप्ता ने जीत दर्ज की। उन्होंने बसपा के आलोक मिश्रा को 607 मतों से हराया। राजकिशोर को कुल 1682 मत प्राप्त हुए, जबकि आलोक को 1075 वोट ही मिले। राजकिशोर पूर्व में नगर अध्यक्ष और महामंत्री भी रह चुके हैं। पेशे से कारोबारी हैं। शुरूआत में राजकिशोर बसपा से पिछड़े थे, लेकिन बाद में बसपा के वोट बैंक में लगी भाजपा की सेंध काम आई और राजकिशोर ने जीत हासिल की। यहां निर्दलीय तीसरे और सपा प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहे। राजकिशोर का कहना है कि वे अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थे, परिणाम तो सिर्फ वोटों के अंतर का देखना था। राजकिशोर के मुताबिक क्षेत्र में पानी, बिजली और सड़क की समस्याएं हैं, जिन्हें सभी को साथ लेकर दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
रामपुरा में भाजपा के खाते में आई जीत
माधौगढ़। नगर पंचायत रामपुरा में भी भाजपा प्रत्याशी शैलेंद्र सिंह ने जीत हासिल की। शैलेंद्र की टक्कर निर्दलीय प्रत्याशी नवीन उर्फ पिंकी त्रिपाठी से हुई। शैलेंद्र के खाते में कुल 1636 मत आए जबकि नवीन को 1099 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस तरह शैलेंद्र ने 537 मतों से जीत अपने खाते में की। शैलेंद्र भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं, और साथ ही पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया है। ब्राहम्ण बाहुल्य सीट पर शुरूआत में शैलेंद्र को हल्के में लिया जा रहा था लेकिन परिणामों ने उलटफेर करते हुए उन्हें जीत दिलाई। शुरूआत की मतगणना में भाजपा की टक्कर बसपा से होती रही और फिर बसपा-सपा को पछाड़ कर निर्दलीय नवीन आगे आ गए। शैलेंद्र का कहना है कि काफी समय बाद जनता की सेवा का मौका मिला है और वह अब मतदाताओं के लिए कहने को भी कुछ नहीं छोड़ेंगे। रामपुरा नगर पंचायत पूरे जनपद में सबसे अलग होगी।
एक-एक सीटें सपा, बसपा और निर्दलीय के खाते में पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो
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ऊमरी में रेखा ने खोला सपा का खाता
माधौगढ़। जनपद में सबसे पहले ऊमरी नगर पंचायत (अनुसूचित जाति) का परिणाम भी आया और सभी को चौंका भी गया। भाजपा की पहली हार और सपा की पहली जीत उमरी से ही हुई। यहां 14 पुरुषों और तीन महिलाओं के बीच चुनाव में डटी सपा की रेखा देवी पत्नी कैलाश ने 147 वोटों से जीत हासिल की। रेखा को कुल 1075 वोट मिले, जबकि भाजपा के प्रत्याशी वीरेंद्र दोहरे को 927 वोट मिले और 223 वोट अवैध घोषित किए गए। कुल 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। 45 वर्षीय रेखा गृहणी हैं, और उनके पति कैलाश सपा के सक्रिय सदस्य रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बसपा की बगावत ही उमरी में सपा की जीत का आधार बनी। पुरूषों के बीच जीत हासिल करने वाली रेखा का कहना है कि उनका मकसद क्षेत्र का विकास करना है और वे करेंगी, क्योकि जहां सारे दावेदार जाति का गणित लगा रहे थे, वहां पर उन्होंने सिर्फ विकास की बात की और जनता ने उन्हें जीत दिलाई। इसलिए यहां पानी, बिजली और सड़क की समस्या का सबसे पहले निदान किया जाएगा।
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कदौरा में बसपा ने लहराया परचम
कदौरा। नगर पंचायत कदौरा में बसपा ने भाजपा को हराकर पार्टी का परचम फहराया। यहां बसपा प्रत्याशी जमीर आलम को 1995 वोटों से जीत हासिल हुई। जमीर के खाते में कुल 3847 वोट आए, जबकि उनके सामने भाजपा के महेश गुप्ता को 1852 वोट ही मिले। जमीर शुरूआत से ही बढ़त बनाकर चले और आखिर में उनकी जीत की घोषणा की गई। जमीर ने 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भी बसपा से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उन्हें नगर पंचायत का चुनाव लड़ाने का फैसला कर लिया था। जमीर पेशे से लखनऊ कें बिल्डर हैं, लेकिन बसपा से उनका जुड़ाव काफी समय से रहा है। कारोबार और राजनीति एक साथ करने के पीछे जमीर का मानना है कि वे अपने इलाके के लिए कुछ करना चाहते थे, लखनऊ वालों को बहुत सुविधाएं दी हैं, अब अपने घर के लोगों के लिए कुछ करने का मौका मिला है तो पीछे नहीं हटूंगा और पक्की सड़कें व शौचालय बनवाकर जनता के विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा।
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कोटरा में मिली भाजपा को पहली जीत
कोटरा। नगर पंचायत कोटरा में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार आशाराम ने पार्टी की जीत का खाता खोला। भाजपा के लिए सबसे पहला संतोषजनक परिणाम कोटरा से ही आया। आशाराम ने सपा के प्रत्याशी मधुसूदन उर्फ मुन्ना को 562 वोटों से हराया। आशाराम को कुल 1148 वोट मिले, जबकि मुन्ना को 595 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। आशाराम पार्टी के सक्रिय सदस्य होने के साथ साथ पेशे से किराना कारोबारी भी हैं। आशाराम का कहना है कि कोटरा इलाके में समस्याओं की भरमार हैं। उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा भी था। वे क्षेत्र की पेयजल समस्या का निदान कराएंगे। इसके अलावा बारिश दिनों में होने वाले जलभराव से निपटने के लिए नाले और नालियों का भी निर्माण कराएंगे। यहां भी वोटों की गिनती में आशाराम शुरू से ही आगे चल रहे थे।
नदीगांव में निर्दलीय भानू का बजा डंका
कोंच। अति संवेदनशील नगर पंचायत नदीगांव में निर्दलीय प्रत्याशी भानू प्रकाश वर्मा ने भाजपा प्रत्याशी दशरथ वर्मा को हराकर सभी को चौंका दिया। गुड्डा गुड़िया चुनाव चिह्न पर भानू को कुल 3011 वोट मिले, जबकि दशरथ को 1263 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस तरह भानू ने कुल 1748 वोटों से जीत दर्ज की। पेशे से किसान भानू को चुनाव लड़ाने वालों में पीछे से कुछ भाजपाई भी थे, जिन्होंने भानू का चुनाव पूरी तरह से अपने हाथ में लिया हुआ था और यही भाजपा प्रत्याशी के लिए नुकसान कर गया। कांग्रेस प्रत्याशी ने इस सीट से ऐन वक्त पर अपना नाम ही वापस ले लिया था, उस वक्त ही भानू की जीत के कयास लगने लगे थे। फिलहाल भानू का कहना है कि उनकी जीत विकास की जीत है, और वे क्षेत्र की नाली, खरंजा और सड़कों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर कराएंगे और नदीगांव को एक स्वच्छ, साफ सुथरी नगर पंचायत बनाने का हर संभव प्रयास करेंगे।
माधौगढ़ में भाजपा ने बसपा को हराया
माधौगढ़। नगर पंचायत माधौगढ़ में भाजपा के धुरंधर प्रत्याशी राजकिशोर गुप्ता ने जीत दर्ज की। उन्होंने बसपा के आलोक मिश्रा को 607 मतों से हराया। राजकिशोर को कुल 1682 मत प्राप्त हुए, जबकि आलोक को 1075 वोट ही मिले। राजकिशोर पूर्व में नगर अध्यक्ष और महामंत्री भी रह चुके हैं। पेशे से कारोबारी हैं। शुरूआत में राजकिशोर बसपा से पिछड़े थे, लेकिन बाद में बसपा के वोट बैंक में लगी भाजपा की सेंध काम आई और राजकिशोर ने जीत हासिल की। यहां निर्दलीय तीसरे और सपा प्रत्याशी चौथे नंबर पर रहे। राजकिशोर का कहना है कि वे अपनी जीत के प्रति आश्वस्त थे, परिणाम तो सिर्फ वोटों के अंतर का देखना था। राजकिशोर के मुताबिक क्षेत्र में पानी, बिजली और सड़क की समस्याएं हैं, जिन्हें सभी को साथ लेकर दूर करने का प्रयास किया जाएगा।
रामपुरा में भाजपा के खाते में आई जीत
माधौगढ़। नगर पंचायत रामपुरा में भी भाजपा प्रत्याशी शैलेंद्र सिंह ने जीत हासिल की। शैलेंद्र की टक्कर निर्दलीय प्रत्याशी नवीन उर्फ पिंकी त्रिपाठी से हुई। शैलेंद्र के खाते में कुल 1636 मत आए जबकि नवीन को 1099 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस तरह शैलेंद्र ने 537 मतों से जीत अपने खाते में की। शैलेंद्र भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं, और साथ ही पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया है। ब्राहम्ण बाहुल्य सीट पर शुरूआत में शैलेंद्र को हल्के में लिया जा रहा था लेकिन परिणामों ने उलटफेर करते हुए उन्हें जीत दिलाई। शुरूआत की मतगणना में भाजपा की टक्कर बसपा से होती रही और फिर बसपा-सपा को पछाड़ कर निर्दलीय नवीन आगे आ गए। शैलेंद्र का कहना है कि काफी समय बाद जनता की सेवा का मौका मिला है और वह अब मतदाताओं के लिए कहने को भी कुछ नहीं छोड़ेंगे। रामपुरा नगर पंचायत पूरे जनपद में सबसे अलग होगी।
एक-एक सीटें सपा, बसपा और निर्दलीय के खाते में पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो