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दुष्कर्म के आरोपी को आजीवन कारावास
Updated Mon, 19 Nov 2018 11:47 PM IST
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औरैया। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने थाना अजीतमल क्षेत्र के एक ईंट भट्ठा पर काम करने वाले मजदूर की 13 वर्षीय पुत्री के साथ दूसरे मजदूर द्वारा दुष्कर्म करने पर आजीवन कारावास व एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा से सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार वादी ने ढाई वर्ष पूर्व मुकदमा दर्ज कराया कि वह अजीतमल क्षेत्र के एक ईंट भट्ठा पर ईंट पाथने का काम करता है। वह अपने एक पुत्र व 13 वर्षीय पुत्री के साथ भट्ठे पर रहता है। भट्ठे पर काम कर रहे उरकरा कला कालपी जालौन निवासी सड़ू उर्फ संजय पुत्र कामता प्रसाद ने वादी की पुत्री को बहला-फुसलाकर उससे शारीरिक संबंध बनाए जिससे वह गर्भवती हो गई।
शंका पर पिता ने जानकारी की तो पुत्री ने बताया कि यहीं पर काम करने वाले मजदूर सड़ू ने जबरदस्ती कर बुरा कार्य किया। कोतवाली में सड़ू के विरुद्ध धारा 376, 506 आईपीसी व पॉक्सो का मामला पंजीकृत हुआ। विवेचना के बाद आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया गया। मामला एडीजे लल्लू सिंह की कोर्ट में चला।
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अभियोजन की ओर से एडीजीसी संजय कुमार श्रीवास्तव व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद एडीजे लल्लू सिंह ने आरोपी सड़ू उर्फ संजय पुत्र कामता प्रसाद को आजीवन कारावास एक लाख दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने प्राप्त अर्थदंड में से 50 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति एवं पुनर्वास के लिए पीड़िता को प्रदान करने का आदेश किया।
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अभियोजन के अनुसार वादी ने ढाई वर्ष पूर्व मुकदमा दर्ज कराया कि वह अजीतमल क्षेत्र के एक ईंट भट्ठा पर ईंट पाथने का काम करता है। वह अपने एक पुत्र व 13 वर्षीय पुत्री के साथ भट्ठे पर रहता है। भट्ठे पर काम कर रहे उरकरा कला कालपी जालौन निवासी सड़ू उर्फ संजय पुत्र कामता प्रसाद ने वादी की पुत्री को बहला-फुसलाकर उससे शारीरिक संबंध बनाए जिससे वह गर्भवती हो गई।
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शंका पर पिता ने जानकारी की तो पुत्री ने बताया कि यहीं पर काम करने वाले मजदूर सड़ू ने जबरदस्ती कर बुरा कार्य किया। कोतवाली में सड़ू के विरुद्ध धारा 376, 506 आईपीसी व पॉक्सो का मामला पंजीकृत हुआ। विवेचना के बाद आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया गया। मामला एडीजे लल्लू सिंह की कोर्ट में चला।
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अभियोजन की ओर से एडीजीसी संजय कुमार श्रीवास्तव व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद एडीजे लल्लू सिंह ने आरोपी सड़ू उर्फ संजय पुत्र कामता प्रसाद को आजीवन कारावास एक लाख दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने प्राप्त अर्थदंड में से 50 हजार रुपये की प्रतिपूर्ति एवं पुनर्वास के लिए पीड़िता को प्रदान करने का आदेश किया।