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महाशिवरात्रि कल, सजने लगे शिवालय, गूंजेगा बम भोले
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:40 AM IST
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उरई। बुधवार को महाशिवरात्रि पर्व होने पर शिव भक्तों का उत्साह नजर आने लगा है। मंदिरों में साज सज्जा के अलावा मेला लगाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। कहीं पर भोलेनाथ का फूलों से शृंगार होगा तो कहीं पर मंदिर को रंगबिरंगी झालरों से सजाया जाएगा। शिवरात्रि के दिन व रात में शिव की पूजा, आराधना व अभिषेक करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा भगवान शंकर अपने भक्तों की समस्त मनोकामना पूरी करते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. शिवसंपत द्विवेदी ने बताया कि शिवरात्रि का पर्व फल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह शिव और पार्वती के विवाहोत्सव मनाने का पर्व है। इस दिन शिव पार्वती की की गई पूजा अर्चना कभी भी निष्फल नहीं जाती। शिवरात्रि को पूरे दिन और पूरी रात आठों पहर शुभ मुहूर्त रहता है।
शिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त तक का समय शुभ मुहूर्त माना गया है। शिवरात्रि का पर्व वैसे तो रात्रि का पर्व है। इस दिन रात्रि में किया गया पूजन व अभिषेक करने वाले भक्त को शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शहर में संस्कृत महाविद्यालय, ठड़ेश्वरी मंदिर, हुल्की माता मंदिर आदि में तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया है। सरावन स्थित शिव मंदिर में भी भक्त दूर दराज से आते हैं।
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महत्व: शिवरात्रि को रात्रि जागरण करने व शिव का ध्यान करने से व्यक्ति के जीवन में वर्ष भर घटने वाली घटनाएं कल्याणकारी होती हैं। इतना ही नहीं भक्त के सभी संकट भी मिट जाते हैं। इसलिए भी शिवरात्रि पर कई मंदिरों और घरों में पूरी रात शिव का रुद्राभिषेक भी किया जाता है।
दही, शहद, गन्ने का रस, इत्र आदि से करें अभिषेक
शिव पुराण के अनुसार शिव का विशेष द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। बताया कि जल से अभिषेक करने से वृष्टि होती है। दही से अभिषेक करने से पशु, भवन और वाहन की प्राप्ति होती है। इसी तरह गन्ने के रस से लक्ष्मी, शहद मिले जल से धन, तीर्थ जल से मोक्ष, इत्र से बीमारी से मुक्ति, दूध से पुत्र की प्राप्ति, घी से वंश विस्तार, गंगा जल से बुखार ठीक, शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने से पापों का शमन होता है।
फूलों से बाबा का शृंगार, रोशनी से जगमगाएंगे दरबार
अमर उजाला ब्यूरो
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ज्योतिषाचार्य पं. शिवसंपत द्विवेदी ने बताया कि शिवरात्रि का पर्व फल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। यह शिव और पार्वती के विवाहोत्सव मनाने का पर्व है। इस दिन शिव पार्वती की की गई पूजा अर्चना कभी भी निष्फल नहीं जाती। शिवरात्रि को पूरे दिन और पूरी रात आठों पहर शुभ मुहूर्त रहता है।
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शिवरात्रि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त से लेकर दूसरे दिन ब्रह्म मुहूर्त तक का समय शुभ मुहूर्त माना गया है। शिवरात्रि का पर्व वैसे तो रात्रि का पर्व है। इस दिन रात्रि में किया गया पूजन व अभिषेक करने वाले भक्त को शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शहर में संस्कृत महाविद्यालय, ठड़ेश्वरी मंदिर, हुल्की माता मंदिर आदि में तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया है। सरावन स्थित शिव मंदिर में भी भक्त दूर दराज से आते हैं।
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महत्व: शिवरात्रि को रात्रि जागरण करने व शिव का ध्यान करने से व्यक्ति के जीवन में वर्ष भर घटने वाली घटनाएं कल्याणकारी होती हैं। इतना ही नहीं भक्त के सभी संकट भी मिट जाते हैं। इसलिए भी शिवरात्रि पर कई मंदिरों और घरों में पूरी रात शिव का रुद्राभिषेक भी किया जाता है।
दही, शहद, गन्ने का रस, इत्र आदि से करें अभिषेक
शिव पुराण के अनुसार शिव का विशेष द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। बताया कि जल से अभिषेक करने से वृष्टि होती है। दही से अभिषेक करने से पशु, भवन और वाहन की प्राप्ति होती है। इसी तरह गन्ने के रस से लक्ष्मी, शहद मिले जल से धन, तीर्थ जल से मोक्ष, इत्र से बीमारी से मुक्ति, दूध से पुत्र की प्राप्ति, घी से वंश विस्तार, गंगा जल से बुखार ठीक, शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने से पापों का शमन होता है।
फूलों से बाबा का शृंगार, रोशनी से जगमगाएंगे दरबार
अमर उजाला ब्यूरो