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भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला को सुनकर गीतों पर झूमे भक्तगण
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औरैया। पक्का तालाब के रामजानकी मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा में शनिवार को आचार्य ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। इस दौरान भक्तिगीतों पर श्रोता झूमते रहे।
आचार्य कृष्णकांत महंत जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण बाल लीला का सुंदर चित्रण किया। आचार्य ने माखन चोरी, गोवर्धन पूजा आदि प्रसंग सुनाए। कहा कि भगवान की अद्भुत लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणादायक हैं। बालकृष्ण सभी का मन मोह लेते थे। यशोदा मां के पास उनकी हर रोज शिकायत आती थी। मां उन्हें कहती थी कि प्रतिदिन तुम माखन चुरा के खाया करते हो तो वह तुरंत मुंह खोलकर मां को दिखा दिया करते थे कि मैंने माखन नहीं खाया।
आचार्य ने एक प्रसंग सुनाया कि भगवान कृष्ण अपनी सखाओं और गोप-ग्वालों के साथ गोवर्धन पर्वत गए तो वहां पर गोपिकाएं उत्सव मना रही थीं। कृष्ण के पूछने पर उन्होंने बताया कि आज के दिन ही स्वामी इंद्र का पूजन होता है। इसे इंद्रोज यज्ञ कहते हैं। इंद्र ब्रज में वर्षा करते हैं, जिससे प्रचुर अन्न पैदा होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इंद्र में क्या शक्ति है। उनसे अधिक शक्तिशाली तो गोवर्धन पर्वत है। इसके कारण ही वर्षा होती है अत: हमें गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। बहुत विवाद के बाद श्री कृष्ण की यह बात मानी गई और ब्रज में गोवर्धन पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं।
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-रामजानकी मंदिर परिसर में आयोजित हो रही श्रीमद् भागवत कथा
अमर उजाला ब्यूरो
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आचार्य कृष्णकांत महंत जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण बाल लीला का सुंदर चित्रण किया। आचार्य ने माखन चोरी, गोवर्धन पूजा आदि प्रसंग सुनाए। कहा कि भगवान की अद्भुत लीलाएं मानव जीवन के लिए प्रेरणादायक हैं। बालकृष्ण सभी का मन मोह लेते थे। यशोदा मां के पास उनकी हर रोज शिकायत आती थी। मां उन्हें कहती थी कि प्रतिदिन तुम माखन चुरा के खाया करते हो तो वह तुरंत मुंह खोलकर मां को दिखा दिया करते थे कि मैंने माखन नहीं खाया।
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आचार्य ने एक प्रसंग सुनाया कि भगवान कृष्ण अपनी सखाओं और गोप-ग्वालों के साथ गोवर्धन पर्वत गए तो वहां पर गोपिकाएं उत्सव मना रही थीं। कृष्ण के पूछने पर उन्होंने बताया कि आज के दिन ही स्वामी इंद्र का पूजन होता है। इसे इंद्रोज यज्ञ कहते हैं। इंद्र ब्रज में वर्षा करते हैं, जिससे प्रचुर अन्न पैदा होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि इंद्र में क्या शक्ति है। उनसे अधिक शक्तिशाली तो गोवर्धन पर्वत है। इसके कारण ही वर्षा होती है अत: हमें गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। बहुत विवाद के बाद श्री कृष्ण की यह बात मानी गई और ब्रज में गोवर्धन पूजा की तैयारियां शुरू हो गईं।
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अमर उजाला ब्यूरो