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दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल कैद
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Wed, 04 Nov 2015 11:36 PM IST
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अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) महफूज अली ने डेढ़ साल पहले फफूंद में एक विवाहिता से दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल कारावास और 32 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
कस्बा फफूंद निवासी पीड़िता ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि 12 मई 2014 की सुबह करीब पांच बजे वह अपने घर के आंगन में सो रही थी। तभी छत से पड़ोस का ही सद्दाम पुत्र गुलाम मोहम्मद निवासी सैय्यदवाड़ा आंगन में आ गया और उससे छेड़खानी करने लगा। जब महिला ने विरोध किया तो उक्त युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
इस मामले का थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। यह मुकदमा एडीजीसी कोर्ट में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी रमेशचंद्र मिश्रा ने बहस की। कहा कि अभियुक्त सद्दाम ने मित्रता का फायदा उठाकर इंसानियत को शर्मिंदा किया है। पीड़िता के पति ने अपनी बदनामी को देखते हुए तलाक दे दिया।
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साथ ही पीड़िता के बच्चों को भी उससे छीन लिया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद एडीजे महफूज अली ने अभियुक्त सद्दाम को धारा 376 में 10 साल के कठोर कारावास व 30 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 452 में पांच साल के सश्रम कारावास व 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सत्र लिपिक भूपेश कुमार के अनुसार सभी सजाए साथ-साथ चलेगी। अर्थदंड जमा होने पर 30 हजार रुपये की धनराशि पीड़िता को अदा करने का आदेश भी कोर्ट ने जारी किया है।
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कस्बा फफूंद निवासी पीड़िता ने थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि 12 मई 2014 की सुबह करीब पांच बजे वह अपने घर के आंगन में सो रही थी। तभी छत से पड़ोस का ही सद्दाम पुत्र गुलाम मोहम्मद निवासी सैय्यदवाड़ा आंगन में आ गया और उससे छेड़खानी करने लगा। जब महिला ने विरोध किया तो उक्त युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
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इस मामले का थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। यह मुकदमा एडीजीसी कोर्ट में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी रमेशचंद्र मिश्रा ने बहस की। कहा कि अभियुक्त सद्दाम ने मित्रता का फायदा उठाकर इंसानियत को शर्मिंदा किया है। पीड़िता के पति ने अपनी बदनामी को देखते हुए तलाक दे दिया।
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साथ ही पीड़िता के बच्चों को भी उससे छीन लिया। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद एडीजे महफूज अली ने अभियुक्त सद्दाम को धारा 376 में 10 साल के कठोर कारावास व 30 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 452 में पांच साल के सश्रम कारावास व 2 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। सत्र लिपिक भूपेश कुमार के अनुसार सभी सजाए साथ-साथ चलेगी। अर्थदंड जमा होने पर 30 हजार रुपये की धनराशि पीड़िता को अदा करने का आदेश भी कोर्ट ने जारी किया है।