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नाबालिग को ले जाने में सहयोग करने पर 10 वर्ष की सजा
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औरैया। विशेष न्यायाधीश पास्को अधिनियम ने एक नाबालिग लड़की को नौकरी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर ले जाने के मामले में सहयोग करने के दोषी को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है।
डीजीसी अभिषेक मिश्रा, विशेष लोक अभियोजक पास्को अधिनियम जितेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि अयाना थाने के एक गांव की ं17 वर्षीय नाबालिग लड़की पांच नवंबर 2016 की शाम पांच बजे शौच के लिए खेत की तरफ गई थी। उसके बाद वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी खोज शुरू की, तो पता चला कि दांदपुर बकेवर गांव निवासी एक नाबालिग लड़का उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। आरोपी लड़की के ननिहाल का रहने वाला है।
इस मामले में लड़की की मां ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें लड़की को भगाने में अरविंद का भी हाथ का भी शक जताया था। पुलिस ने विवेचना कर आरोपपत्र अजय व अरविंद के खिलाफ कोर्ट में दाखिल किया। मुख्य आरोपी की पत्रावली न्यायालय ने 24 फरवरी 2021 को उसके नाबालिग होने के आधार पर अलग कर दी थी। केवल अरविंद की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियुक्त अरविंद 36 वर्षीय शादी शुदा व्यक्ति है।
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उसकी पांच बेटियां व वृद्ध मां है। वह मजदूरी करके परिवार का पेट पालता है। इसलिए उस पर नरम दृष्टिकोण अपनाया जाए। वहीं अभियोजन की ओर से तर्क दिया कि अरविंद ने नाबालिग लड़की को अन्य अभियुक्त के साथ नौकरी का लालच देकर बहला-फुसलाकर भगाने में सहयोग का गंभीर अपराध किया है।
पीड़ित व बचाव पक्ष के वकीलों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश पास्को मनराज सिंह ने अभियुक्त अरविंद को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
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डीजीसी अभिषेक मिश्रा, विशेष लोक अभियोजक पास्को अधिनियम जितेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि अयाना थाने के एक गांव की ं17 वर्षीय नाबालिग लड़की पांच नवंबर 2016 की शाम पांच बजे शौच के लिए खेत की तरफ गई थी। उसके बाद वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसकी खोज शुरू की, तो पता चला कि दांदपुर बकेवर गांव निवासी एक नाबालिग लड़का उसकी बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। आरोपी लड़की के ननिहाल का रहने वाला है।
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इस मामले में लड़की की मां ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें लड़की को भगाने में अरविंद का भी हाथ का भी शक जताया था। पुलिस ने विवेचना कर आरोपपत्र अजय व अरविंद के खिलाफ कोर्ट में दाखिल किया। मुख्य आरोपी की पत्रावली न्यायालय ने 24 फरवरी 2021 को उसके नाबालिग होने के आधार पर अलग कर दी थी। केवल अरविंद की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियुक्त अरविंद 36 वर्षीय शादी शुदा व्यक्ति है।
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उसकी पांच बेटियां व वृद्ध मां है। वह मजदूरी करके परिवार का पेट पालता है। इसलिए उस पर नरम दृष्टिकोण अपनाया जाए। वहीं अभियोजन की ओर से तर्क दिया कि अरविंद ने नाबालिग लड़की को अन्य अभियुक्त के साथ नौकरी का लालच देकर बहला-फुसलाकर भगाने में सहयोग का गंभीर अपराध किया है।
पीड़ित व बचाव पक्ष के वकीलों की दलील सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश पास्को मनराज सिंह ने अभियुक्त अरविंद को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 30 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड अदा न करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।