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बेकार हो चुके कपड़ों से महिलाओं को मिलेगा रोजगार, बिगड़ते पर्यावरण में आएगा सुधार
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घरों में बेकार हो चुके कपड़ों से पर्यावरण को दूषित होने से बचाने में इस्तेमाल किया जाएगा। महिलाओं को रोजगार मिलेगा। नगर के व्यापारियों, स्वयं संस्थाओं, औद्योगिक इकाइयों की मदद से नगर पालिका अनुपयोगी वस्त्रों और घर-घर से कूड़ा एकत्र करने में इकट्ठा हो रहे कपड़ों के थैले बनवाकर दुकानदारों में वितरित कराए जाएंगे। दो हजार थैले बन चुके हैं। जिनको स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने तैयार किया है।
नगर पालिका के वाहन घर-घर से कूड़ा एकत्र करते हैं। कूड़े में हफ्ते में पांच-छह गट्ठर कपड़ा भी एकत्र हो जाता है। यह कपड़ा वह होता है, जिसे नागरिक बेकार समझ कर कूड़े में डालदेते हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में जाने पर बेकार कपड़े का ढेर लग जाता है। महीने में छह क्विंटल कपड़ा कूड़े के रूप में आ जाता है। कूड़े में आने वाले प्लास्टिक, लोहे, कांच को पालिका बेच कर अच्छी खासी रकम प्राप्त करती है, लेकिन कपड़े का क्या करें, नगरपालिका के सामने यह सवाल खड़ा हो गया। इस बीच पालिका ने गहनता से मंथन किया। जिसमें निकला कि कूड़े में मिल रहा कपड़ा नगर को पॉलिथीन मुक्त करने में काम आ सकता है। कपड़े से थैले बनवाकर वितरित कराए जाएं तो लोग पॉलिथीन में सामान खरीदकर नहीं ले जाएंगे।
इसके लिए पालिका ने एनजीओ, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों से बात की। वह भी सहर्ष तैयार हो गए। ईओ विजेंद्र सिंह पाल ने बताया कि कूड़े में मिले कपड़े को पालिका ने जुबिलेंट फैक्टरी के स्वयं सहायता समूह को दिया। जिसमें काम कर रहीं महिलाओं ने दो हजार थैले तैयार कर लिए हैं। जिस पर नगर पालिका व जुबिलेंटका लोगो लगाया गया है। 29 जून को 20 हजार थैले वितरित किए जाएंगे।
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नगर को पॉलिथीन मुक्त रखने के लिए पालिका 20 हजार थैले बनवाकर वितरित कराएगी। थैलों को विभिन्न संगठनों से जुड़े व्यापारी नेताओं के माध्यम से दुकानदारों को बंटवाया जाएगा। दुकानदारों को थैले इसलिए दिए जाएंगे कि वह ग्राहकों को सामान पॉलिथीन नहीं बल्कि कपड़े के थैले में दें। ग्राहकों से थैले के एवज में पांच रुपये लिए जाएंगे, हालांकि इसके लिए ग्राहक बाध्य नहीं होगा। उसे पांच रुपये भारी लगेंगे तो किसी भी दुकानदार को थैला वापस कर पांच रुपये ले सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं थैले सिलाई का काम करेंगी, उनका खर्चा स्वयं सेवी संस्थाएं, नगर पालिका और औद्योगिक इकाइयां मिल कर वहन करेंगी।
सरकार प्लास्टिक व पॉलिथीन को खत्म या कम करने की तैयारी कर रही है।
इसके बाद दुकानदारों व ग्राहकों के सामने सामान को बेचने और लाने ले जाने की परेशानी न हो, इसके लिए कपड़े के थैले बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इसके साथ पुराने और घरों में जो कपड़ों के ढेर लगे हैं, जिनको लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे, उनका उपयोग होगा। पॉलिथीन कम होने से पर्यावरण सुधरेगा, वहीं जो महिलाएं थैले बनाने में लगी हैं, उनको रोजगार मिलेगा-सुबोध सिंघल, वरिष्ठ महामंत्री उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल
नगर पालिका का यह कदम बेहद सराहनीय है। पॉलिथीन सैकड़ों साल तक भी न तो गलने में आती है और न हीनष्ट होती है। जहां खेतों में पॉलिथीन पहुंच जाने कारण भूमि की उर्वरा शक्तिभी घट रही है, वहीं यह कैंसर का प्रमुख कारण भी है। नगर को पॉलिथीन से मुक्त कराने में पालिका की हर संभव मदद करेंगे। थैले वितरण कराने में भरपूर सहयोग दिया जाएगा। थैले वितरण कराने के लिए पालिका को मुफ्त कपड़ा भी मुहैया कराया जाएगा।
राजीव मित्तल जिला प्रभारी उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल गजरौला
नाले नालियां भी पॉलिथीन के कारण चोक हो रहे हैं। लोग दूध, सब्जी और अन्य सामान खरीद कर लाने के बाद पन्नियों को कूड़े में फेंक देते हैं। जिन पर गोवंशीय पशु मंडराते दिख जाते हैं। कूड़े कचरे के साथ पन्नियों को खा लेते हैं। बाद में पशु की मौत तक हो जाती है। लोगों को पॉलिथीन का विकल्प मिले तो वह छोड़ने में पीछे नहीं हटेंगे। नगर को पालिका ने पॉलिथीन मुक्त करने के लिए अच्छा कदम उठाया है। वह अपने स्तर और अन्य व्यापारियों से पालिका की मदद करेंगे
-सोनू गर्ग नगर संगठन मंत्री उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल गजरौला
नगर पालिका ने औद्योगिक इकाइयों और व्यापारियों संग मिल कर नगर को पालिथिन से मुक्त कराने का जो काम शुरू किया है। वह बेहद सराहनीय कार्य है। नगर में ऐसा कोई व्यापारी या नागरिक नहीं है, जिसके घर बेकार कपड़ों के ढेर न लगे हों। जिनसे लोग छुटकारा पाना चाहते हैं, लेकिन कहां डालें। थैले बनाने में काम आएंगे तो लोगों को पुराने कपड़ों के ढेर से निजात मिलेगी। इससे पालिथिन का चलन कम होगा-राम प्रकाश गर्ग नगर संगठन मंत्री उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल गजरौला।
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नगर पालिका के वाहन घर-घर से कूड़ा एकत्र करते हैं। कूड़े में हफ्ते में पांच-छह गट्ठर कपड़ा भी एकत्र हो जाता है। यह कपड़ा वह होता है, जिसे नागरिक बेकार समझ कर कूड़े में डालदेते हैं। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में जाने पर बेकार कपड़े का ढेर लग जाता है। महीने में छह क्विंटल कपड़ा कूड़े के रूप में आ जाता है। कूड़े में आने वाले प्लास्टिक, लोहे, कांच को पालिका बेच कर अच्छी खासी रकम प्राप्त करती है, लेकिन कपड़े का क्या करें, नगरपालिका के सामने यह सवाल खड़ा हो गया। इस बीच पालिका ने गहनता से मंथन किया। जिसमें निकला कि कूड़े में मिल रहा कपड़ा नगर को पॉलिथीन मुक्त करने में काम आ सकता है। कपड़े से थैले बनवाकर वितरित कराए जाएं तो लोग पॉलिथीन में सामान खरीदकर नहीं ले जाएंगे।
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इसके लिए पालिका ने एनजीओ, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों से बात की। वह भी सहर्ष तैयार हो गए। ईओ विजेंद्र सिंह पाल ने बताया कि कूड़े में मिले कपड़े को पालिका ने जुबिलेंट फैक्टरी के स्वयं सहायता समूह को दिया। जिसमें काम कर रहीं महिलाओं ने दो हजार थैले तैयार कर लिए हैं। जिस पर नगर पालिका व जुबिलेंटका लोगो लगाया गया है। 29 जून को 20 हजार थैले वितरित किए जाएंगे।
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नगर को पॉलिथीन मुक्त रखने के लिए पालिका 20 हजार थैले बनवाकर वितरित कराएगी। थैलों को विभिन्न संगठनों से जुड़े व्यापारी नेताओं के माध्यम से दुकानदारों को बंटवाया जाएगा। दुकानदारों को थैले इसलिए दिए जाएंगे कि वह ग्राहकों को सामान पॉलिथीन नहीं बल्कि कपड़े के थैले में दें। ग्राहकों से थैले के एवज में पांच रुपये लिए जाएंगे, हालांकि इसके लिए ग्राहक बाध्य नहीं होगा। उसे पांच रुपये भारी लगेंगे तो किसी भी दुकानदार को थैला वापस कर पांच रुपये ले सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं थैले सिलाई का काम करेंगी, उनका खर्चा स्वयं सेवी संस्थाएं, नगर पालिका और औद्योगिक इकाइयां मिल कर वहन करेंगी।
सरकार प्लास्टिक व पॉलिथीन को खत्म या कम करने की तैयारी कर रही है।
इसके बाद दुकानदारों व ग्राहकों के सामने सामान को बेचने और लाने ले जाने की परेशानी न हो, इसके लिए कपड़े के थैले बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इसके साथ पुराने और घरों में जो कपड़ों के ढेर लगे हैं, जिनको लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे, उनका उपयोग होगा। पॉलिथीन कम होने से पर्यावरण सुधरेगा, वहीं जो महिलाएं थैले बनाने में लगी हैं, उनको रोजगार मिलेगा-सुबोध सिंघल, वरिष्ठ महामंत्री उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल
नगर पालिका का यह कदम बेहद सराहनीय है। पॉलिथीन सैकड़ों साल तक भी न तो गलने में आती है और न हीनष्ट होती है। जहां खेतों में पॉलिथीन पहुंच जाने कारण भूमि की उर्वरा शक्तिभी घट रही है, वहीं यह कैंसर का प्रमुख कारण भी है। नगर को पॉलिथीन से मुक्त कराने में पालिका की हर संभव मदद करेंगे। थैले वितरण कराने में भरपूर सहयोग दिया जाएगा। थैले वितरण कराने के लिए पालिका को मुफ्त कपड़ा भी मुहैया कराया जाएगा।
राजीव मित्तल जिला प्रभारी उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल गजरौला
नाले नालियां भी पॉलिथीन के कारण चोक हो रहे हैं। लोग दूध, सब्जी और अन्य सामान खरीद कर लाने के बाद पन्नियों को कूड़े में फेंक देते हैं। जिन पर गोवंशीय पशु मंडराते दिख जाते हैं। कूड़े कचरे के साथ पन्नियों को खा लेते हैं। बाद में पशु की मौत तक हो जाती है। लोगों को पॉलिथीन का विकल्प मिले तो वह छोड़ने में पीछे नहीं हटेंगे। नगर को पालिका ने पॉलिथीन मुक्त करने के लिए अच्छा कदम उठाया है। वह अपने स्तर और अन्य व्यापारियों से पालिका की मदद करेंगे
-सोनू गर्ग नगर संगठन मंत्री उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल गजरौला
नगर पालिका ने औद्योगिक इकाइयों और व्यापारियों संग मिल कर नगर को पालिथिन से मुक्त कराने का जो काम शुरू किया है। वह बेहद सराहनीय कार्य है। नगर में ऐसा कोई व्यापारी या नागरिक नहीं है, जिसके घर बेकार कपड़ों के ढेर न लगे हों। जिनसे लोग छुटकारा पाना चाहते हैं, लेकिन कहां डालें। थैले बनाने में काम आएंगे तो लोगों को पुराने कपड़ों के ढेर से निजात मिलेगी। इससे पालिथिन का चलन कम होगा-राम प्रकाश गर्ग नगर संगठन मंत्री उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल गजरौला।