{"_id":"6a5a89e9adac32b78204db57","slug":"water-reached-the-madhya-ganga-canal-ahead-of-the-chief-ministers-arrival-jpnagar-news-c-284-1-jpn1023-168447-2026-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amroha News: मुख्यमंत्री के आगमन से पहले पहुंचा मध्य गंगा नहर में पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amroha News: मुख्यमंत्री के आगमन से पहले पहुंचा मध्य गंगा नहर में पानी
विज्ञापन
अमरोहा। मुख्यमंत्री योगी के जिले में आगमन से पहले ही मध्य गंगा नहर का पानी अमरोहा जिले की सीमा में प्रवेश कर गया है। जिले के किसान काफी लंबे अरसे से इसका इंतजार कर रहे थे। हालांकि पानी का प्रवाह अभी काफी कम है और फिलहाल यह ट्रायल के तौर पर छोड़ा गया है। सिंचाई विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में पानी का स्तर धीरे-धीरे बढ़ेगा और नहरों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचेगा।
इस परियोजना से जिले के करीब चार लाख किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने के साथ ही गिरते भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।
जिले में करीब 4990 करोड़ रुपये की लागत से मध्य गंगा नहर परियोजना का निर्माण कराया गया था। इसके तहत चंदौसी और बहजोई शाखाओं के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में रजवाहों का निर्माण किया गया, ताकि खेतों तक आसानी से पानी पहुंच सके। लेकिन अधिकांश नहरें लंबे समय से सूखी पड़ी थीं। अब बिजनौर कैनाल से पानी छोड़े जाने के बाद यह रजबपुर क्षेत्र तक पहुंच गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क में पानी पहुंचने में अभी कुछ समय लगेगा।
धीरे-धीरे पहुंचेगा सभी शाखाओं तक पानी
हसनपुर क्षेत्र के देहरा और चमर पतेई के पास से गुजरने वाली नहरों में पहले कुछ समय के लिए पानी छोड़ा गया था, लेकिन बाद में आपूर्ति बंद हो गई थी। वहीं डिडौली क्षेत्र के कैलसा और शेखूपुरा गुर्जर के पास बनी नहरों में भी अभी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। पानी का फ्लो फिलहाल कम है, इसलिए सभी शाखाओं तक पानी चरणबद्ध तरीके से पहुंचेगा।
विज्ञापन
रजवाहों में उगी घास, सफाई का इंतजार
नहरों से जुड़े कई रजवाहों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। जगह-जगह घास, झाड़ियां और गाद जमा होने से पानी के प्रवाह में बाधा आने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते रजवाहों की सफाई नहीं कराई गई तो पानी खेतों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाएगा। वर्ष 2007-08 में परियोजना शुरू होने के समय किसानों को उम्मीद थी कि सिंचाई के लिए उन्हें ट्यूबवेल और महंगी बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, लेकिन वर्षों बाद भी अधिकांश किसान निजी संसाधनों से सिंचाई करने को मजबूर हैं।
गजरौला क्षेत्र में भी सफाई अधूरी
गजरौला क्षेत्र में भी नहरों की शाखाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। भानपुर खालसा और चौबारा गांव के बीच से गुजरने वाली नहर शाखा के आसपास कूड़ा-कचरा जमा है। पुलिया के दोनों ओर प्लास्टिक के बोरे और अन्य गंदगी साफ दिखाई देती है। बल्दाना असगर अली, सलारपुर और खादगुर्जर गांव के पास से गुजरने वाली नहर शाखाओं में भी घास उगी हुई है और सफाई का कार्य अभी तक नहीं कराया गया है।
भूजल स्तर सुधारने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि नहरों में नियमित पानी आने से खेतों की सिंचाई आसान होगी और क्षेत्र के लगातार गिर रहे भूजल स्तर में भी सुधार होगा। इससे किसानों की ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम होगी, बिजली और डीजल की बचत होगी तथा कृषि लागत में भी कमी आएगी।
नहरों के पास बरतें सावधानी
सिंचाई विभाग ने लोगों से अपील की है कि नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है, इसलिए अनावश्यक रूप से नहरों के आसपास न जाएं और न ही उनमें उतरें। किसानों से पशुओं को भी नहर में न ले जाने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि पानी का प्रवाह धीरे-धीरे बढ़ेगा और समय में कुछ बदलाव भी संभव है, इसलिए सतर्कता बरतना जरूरी है।
........
नहर निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है। नहरों पर करीब चार हजार नौ सौ करोड़ रुपये खर्च हुए। अब बहजोई-चंदौसी शाखा वाली नहरों में पानी चलेगा। बिजनौर से पानी छोड़ दिया गया है। अभी पानी की रफ्तार कम है। इसलिए पानी आने में समय लगेगा। इससे करीब चार लाख किसानों को फायदा मिलेगा। अभी पानी ट्रायल के तौर पर छोड़ा गया है। एक साथ ज्यादा पानी नहीं छोड़ सकते। इससे नुकसान की संभावना रहती है।
-अखिलेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर
विज्ञापन
इस परियोजना से जिले के करीब चार लाख किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने के साथ ही गिरते भूजल स्तर में भी सुधार की उम्मीद है।
जिले में करीब 4990 करोड़ रुपये की लागत से मध्य गंगा नहर परियोजना का निर्माण कराया गया था। इसके तहत चंदौसी और बहजोई शाखाओं के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में रजवाहों का निर्माण किया गया, ताकि खेतों तक आसानी से पानी पहुंच सके। लेकिन अधिकांश नहरें लंबे समय से सूखी पड़ी थीं। अब बिजनौर कैनाल से पानी छोड़े जाने के बाद यह रजबपुर क्षेत्र तक पहुंच गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क में पानी पहुंचने में अभी कुछ समय लगेगा।
विज्ञापन
धीरे-धीरे पहुंचेगा सभी शाखाओं तक पानी
हसनपुर क्षेत्र के देहरा और चमर पतेई के पास से गुजरने वाली नहरों में पहले कुछ समय के लिए पानी छोड़ा गया था, लेकिन बाद में आपूर्ति बंद हो गई थी। वहीं डिडौली क्षेत्र के कैलसा और शेखूपुरा गुर्जर के पास बनी नहरों में भी अभी नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। पानी का फ्लो फिलहाल कम है, इसलिए सभी शाखाओं तक पानी चरणबद्ध तरीके से पहुंचेगा।
विज्ञापन
रजवाहों में उगी घास, सफाई का इंतजार
नहरों से जुड़े कई रजवाहों की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। जगह-जगह घास, झाड़ियां और गाद जमा होने से पानी के प्रवाह में बाधा आने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते रजवाहों की सफाई नहीं कराई गई तो पानी खेतों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाएगा। वर्ष 2007-08 में परियोजना शुरू होने के समय किसानों को उम्मीद थी कि सिंचाई के लिए उन्हें ट्यूबवेल और महंगी बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, लेकिन वर्षों बाद भी अधिकांश किसान निजी संसाधनों से सिंचाई करने को मजबूर हैं।
गजरौला क्षेत्र में भी सफाई अधूरी
गजरौला क्षेत्र में भी नहरों की शाखाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। भानपुर खालसा और चौबारा गांव के बीच से गुजरने वाली नहर शाखा के आसपास कूड़ा-कचरा जमा है। पुलिया के दोनों ओर प्लास्टिक के बोरे और अन्य गंदगी साफ दिखाई देती है। बल्दाना असगर अली, सलारपुर और खादगुर्जर गांव के पास से गुजरने वाली नहर शाखाओं में भी घास उगी हुई है और सफाई का कार्य अभी तक नहीं कराया गया है।
भूजल स्तर सुधारने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि नहरों में नियमित पानी आने से खेतों की सिंचाई आसान होगी और क्षेत्र के लगातार गिर रहे भूजल स्तर में भी सुधार होगा। इससे किसानों की ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम होगी, बिजली और डीजल की बचत होगी तथा कृषि लागत में भी कमी आएगी।
नहरों के पास बरतें सावधानी
सिंचाई विभाग ने लोगों से अपील की है कि नहरों में पानी छोड़ा जा चुका है, इसलिए अनावश्यक रूप से नहरों के आसपास न जाएं और न ही उनमें उतरें। किसानों से पशुओं को भी नहर में न ले जाने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि पानी का प्रवाह धीरे-धीरे बढ़ेगा और समय में कुछ बदलाव भी संभव है, इसलिए सतर्कता बरतना जरूरी है।
........
नहर निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है। नहरों पर करीब चार हजार नौ सौ करोड़ रुपये खर्च हुए। अब बहजोई-चंदौसी शाखा वाली नहरों में पानी चलेगा। बिजनौर से पानी छोड़ दिया गया है। अभी पानी की रफ्तार कम है। इसलिए पानी आने में समय लगेगा। इससे करीब चार लाख किसानों को फायदा मिलेगा। अभी पानी ट्रायल के तौर पर छोड़ा गया है। एक साथ ज्यादा पानी नहीं छोड़ सकते। इससे नुकसान की संभावना रहती है।
-अखिलेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, मध्य गंगा नहर