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Amroha News: फर्जीवाड़े की जांच कर रहे अधिकारियों के सामने भिड़े ग्रामीण, टीम लौटी
Sun, 30 Mar 2025 01:32 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Sun, 30 Mar 2025 01:32 AM IST
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अमरोहा। मनरेगा में फर्जीवाड़े की जांच करने पलौला गांव पहुंचे अधिकारियों के सामने ही ग्रामीण आमने-सामने आ गए। जमकर गहमागहमी हुई, जिसके बाद अधिकारी लौट गए। सभी के मौखिक बयान लिए गए हैं। जिस समय ग्रामीण आपस में झगड़ने लगे, उसे समय अधिकारी उनके बयान दर्ज कर रहे थे। अधिकारियों के हस्तक्षेप के कारण ग्रामीणों में मारपीट होने से बच गई।
जोया ब्लॉक के पलौला गांव में मनरेगा में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां पर रहने वाले मोहम्मद गजनबी के साथ क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की शादी हुई है। शबीना की सास गुले आयशा ग्राम प्रधान हैं। खुद के प्रधान होते हुए उन्होंने ब्लॉक के अधिकारी-कर्मचारियों की सांठगांठ करके परिवार के ही आठ लोगों के मनरेगा जॉब कार्ड बनवा लिए। इसके बाद मोहम्मद शमी की बहन शबीना, उनके पत्नी गजनबी और एमबीबीएस व एलएलबी कर रहे शबीना के दो देवर समेत आठ लोगों के खाते में 4.55 लाख की मजदूरी भेजी गई। जबकि, यह लोग एक दिन भी मजदूरी करने नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं सऊदी अरब और बंगाल में रहने वाले लोगों के खाते में भी मनरेगा मजदूरी भेजी गई। मनरेगा में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो प्रशासन में खलबली मच गई। डीएम निधि गुप्ता वत्स ने परियोजना निदेशक अमरेंद्र प्रताप सिंह को जांच के निर्देश दिए।
इसके बाद खुद ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर 15 लोगों को गलत तरीके से मनरेगा मजदूरी देने की शिकायत दर्ज कराई गई। उनकी सूची भी डीएम को सौंपी थी। फर्जीवाड़ा सुर्खियों में आया तो केंद्र और प्रदेश सरकार ने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद से अधिकारी तीन साल का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। शुक्रवार की शाम अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि पूरे फर्जीवाड़े में ग्राम प्रधान, कंप्यूटर ऑपरेटर, तत्कालीन रोजगार सेवक, ग्राम सचिव और एपीओ मनरेगा दोषी हैं।
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शनिवार को परियोजना निदेशक अमरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में मनरेगा लोकपाल कृपाल सिंह और बीडीओ जोया लोकचंद आनंद कर्मचारियों के साथ जांच करने पलौला गांव पहुंचे। यहां प्राथमिक विद्यालय में शिकायत करने वाले ग्रामीणों और प्रधान पक्ष को बुलाया गया। मौके पर प्रधान पक्ष के परिवार से कोई सदस्य सामने नही आया। अधिकारी लोगों के बयान दर्ज कर रहे थे, तभी दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। ग्रामीणों में गहमागहमी शुरू गई। यह देख कर अधिकारियों के होश उड़ गए। ग्रामीणों में विवाद बढ़ता देख अधिकारी वापस लौट गए।
कई मस्टररोल पर केवल प्रधान के हस्ताक्षर
बताया जा रहा है कि जरूरी प्रक्रिया पूरे किए बिना ही मनरेगा का भुगतान किया गया है। कई मस्टररोल पर फर्जी तरीके से प्रधान के हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अलावा कई अभिलेखों में भी फर्जी हस्ताक्षर करने का खेल सामने आया है। उसके बाद भी भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई। बताया जाता है कि गजनबी ने ही हाजिरी लगाकर वेरीफाई किया जबकि यह काम महिला मेट अथवा रोजगार सेवक को करना चाहिए था। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही घपले की पूरी कहानी सामने आएगी। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद नोटिस जारी करने के बाद रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
जांच के लिए अधिकारियों की टीम आज गांव पहुंची थी। दोनों पक्षों को मौके पर बुलाया गया था। लेकिन प्रधान के परिवार से कोई नही आया। दोनों पक्षों के लोगों के मौखिक बयान लिए गए है। जांच प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। जिसके बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। अमरेंद्र प्रताप सिंह, डीसी मनरेगा/ परियोजना निदेशक
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जोया ब्लॉक के पलौला गांव में मनरेगा में फर्जीवाड़ा सामने आया है। यहां पर रहने वाले मोहम्मद गजनबी के साथ क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की शादी हुई है। शबीना की सास गुले आयशा ग्राम प्रधान हैं। खुद के प्रधान होते हुए उन्होंने ब्लॉक के अधिकारी-कर्मचारियों की सांठगांठ करके परिवार के ही आठ लोगों के मनरेगा जॉब कार्ड बनवा लिए। इसके बाद मोहम्मद शमी की बहन शबीना, उनके पत्नी गजनबी और एमबीबीएस व एलएलबी कर रहे शबीना के दो देवर समेत आठ लोगों के खाते में 4.55 लाख की मजदूरी भेजी गई। जबकि, यह लोग एक दिन भी मजदूरी करने नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं सऊदी अरब और बंगाल में रहने वाले लोगों के खाते में भी मनरेगा मजदूरी भेजी गई। मनरेगा में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ तो प्रशासन में खलबली मच गई। डीएम निधि गुप्ता वत्स ने परियोजना निदेशक अमरेंद्र प्रताप सिंह को जांच के निर्देश दिए।
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इसके बाद खुद ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर 15 लोगों को गलत तरीके से मनरेगा मजदूरी देने की शिकायत दर्ज कराई गई। उनकी सूची भी डीएम को सौंपी थी। फर्जीवाड़ा सुर्खियों में आया तो केंद्र और प्रदेश सरकार ने अधिकारियों से रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद से अधिकारी तीन साल का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। शुक्रवार की शाम अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि पूरे फर्जीवाड़े में ग्राम प्रधान, कंप्यूटर ऑपरेटर, तत्कालीन रोजगार सेवक, ग्राम सचिव और एपीओ मनरेगा दोषी हैं।
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शनिवार को परियोजना निदेशक अमरेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में मनरेगा लोकपाल कृपाल सिंह और बीडीओ जोया लोकचंद आनंद कर्मचारियों के साथ जांच करने पलौला गांव पहुंचे। यहां प्राथमिक विद्यालय में शिकायत करने वाले ग्रामीणों और प्रधान पक्ष को बुलाया गया। मौके पर प्रधान पक्ष के परिवार से कोई सदस्य सामने नही आया। अधिकारी लोगों के बयान दर्ज कर रहे थे, तभी दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। ग्रामीणों में गहमागहमी शुरू गई। यह देख कर अधिकारियों के होश उड़ गए। ग्रामीणों में विवाद बढ़ता देख अधिकारी वापस लौट गए।
कई मस्टररोल पर केवल प्रधान के हस्ताक्षर
बताया जा रहा है कि जरूरी प्रक्रिया पूरे किए बिना ही मनरेगा का भुगतान किया गया है। कई मस्टररोल पर फर्जी तरीके से प्रधान के हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अलावा कई अभिलेखों में भी फर्जी हस्ताक्षर करने का खेल सामने आया है। उसके बाद भी भुगतान की प्रक्रिया पूरी की गई। बताया जाता है कि गजनबी ने ही हाजिरी लगाकर वेरीफाई किया जबकि यह काम महिला मेट अथवा रोजगार सेवक को करना चाहिए था। हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही घपले की पूरी कहानी सामने आएगी। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद नोटिस जारी करने के बाद रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
जांच के लिए अधिकारियों की टीम आज गांव पहुंची थी। दोनों पक्षों को मौके पर बुलाया गया था। लेकिन प्रधान के परिवार से कोई नही आया। दोनों पक्षों के लोगों के मौखिक बयान लिए गए है। जांच प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। जिसके बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी। अमरेंद्र प्रताप सिंह, डीसी मनरेगा/ परियोजना निदेशक