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ग्राम प्रधान संगठन ने भी वापस ली याचिका अब कार्यकाल पूरा कराने की करेंगे अपील
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नगर पालिका सीमा विस्तार के विरोध में अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन द्वारा हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका को वापस ले लिया है। ग्राम प्रधान दोबारा से रिट दायर अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कराने की अपील करेंगे। जबकि ग्रामीणों की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने सीमा विस्तार के विरोध में लगाई गई आपत्ति की निस्तारित कॉपी मांगी है। वहीं, लगातार कॉपी मांगने के बाद भी नगर पालिका के अधिकारी कॉपी कोर्ट में उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
अमरोहा नगर पालिका का सीमा विस्तार करते हुए शासन की ओर से 21 जुलाई को अधिसूचना जारी की गई। जिसमें 21 ग्राम पंचायतों के 45 गांवों को शामिल किया गया। इन ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान और ग्रामीण इसके विरोध में हैं। सीमा विस्तार को रद्द कराने की मांग को लेकर ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में दो याचिका दायर की थीं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों की याचिका को खारिज कर दिया था। इस बीच सीमा विस्तार के विरोध में चौदह आपत्तियां दर्ज की गई थीं। जिनका निस्तारण कर प्रशासन ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसके बाद अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने तीन सितंबर को एक और याचिका दायर की थी। ग्राम प्रधान अली मुमताज अली, संजीव सिंह ने बताया कि संगठन की ओर से दायर की गई याचिका को वापस ले लिया गया है। अब नए सिरे से याचिका दायर की जाएगी। जिसमें ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा कराने की अपील की जाएगी।
ग्राम प्रधानों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता मंसूर अहमद ने बताया कि ग्रामीणों की तरफ से दायर रिट में न्यायालय ने सुनवाई की। जिसमें न्यायालय ने आपत्ति की निस्तारित कॉपी मांगी है लेकिन नगर पालिका के अधिकारी निस्तारित कॉपी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। वह बहाने बनाकर टाल रहे हैं।
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अखिल भारतीय प्रधान संगठन की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि ग्राम पंचायत प्रधान संवैधानिक रूप से पांच वर्ष के लिए निर्वाचित हुए हैं लेकिन तानाशाह बनकर प्रदेश सरकार द्वारा उनमें से कुछ ग्राम पंचायतों का विलय नगर पालिका में करके वहां के निर्वाचित प्रधानों को अपदस्थ करने का कुचक्र रचा है। ग्राम पंचायतों का नगर पालिका में विलय राज्यपाल के द्वारा आपत्ति प्राप्त कर उसके निस्तारण के बाद ही किया जा सकता है। मौजूदा राज्य सरकार ने बिना आपत्ति प्राप्ति व निस्तारण के ग्राम पंचायतों का विलय नगर पालिका में कर दिया है, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। विलय बिना आम सहमति के नहीं किया जा सकता। ग्राम पंचायतें अपना विलय नगर पालिका में नहीं चाहती हैं। कहा कि ग्राम पंचायतों की 90 फीसदी भूमि कृषि योग्य भूमि है। वहां की नब्बे प्रतिशत जनसंख्या व्यापार नहीं करती है। जिसके कारण नगर पंचायतों में शामिल की गईं ग्राम पंचायतों का विलय विधि विरुद्ध है।
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अमरोहा नगर पालिका का सीमा विस्तार करते हुए शासन की ओर से 21 जुलाई को अधिसूचना जारी की गई। जिसमें 21 ग्राम पंचायतों के 45 गांवों को शामिल किया गया। इन ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान और ग्रामीण इसके विरोध में हैं। सीमा विस्तार को रद्द कराने की मांग को लेकर ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में दो याचिका दायर की थीं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों की याचिका को खारिज कर दिया था। इस बीच सीमा विस्तार के विरोध में चौदह आपत्तियां दर्ज की गई थीं। जिनका निस्तारण कर प्रशासन ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इसके बाद अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने तीन सितंबर को एक और याचिका दायर की थी। ग्राम प्रधान अली मुमताज अली, संजीव सिंह ने बताया कि संगठन की ओर से दायर की गई याचिका को वापस ले लिया गया है। अब नए सिरे से याचिका दायर की जाएगी। जिसमें ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा कराने की अपील की जाएगी।
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ग्राम प्रधानों की पैरवी करने वाले अधिवक्ता मंसूर अहमद ने बताया कि ग्रामीणों की तरफ से दायर रिट में न्यायालय ने सुनवाई की। जिसमें न्यायालय ने आपत्ति की निस्तारित कॉपी मांगी है लेकिन नगर पालिका के अधिकारी निस्तारित कॉपी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। वह बहाने बनाकर टाल रहे हैं।
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अखिल भारतीय प्रधान संगठन की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि ग्राम पंचायत प्रधान संवैधानिक रूप से पांच वर्ष के लिए निर्वाचित हुए हैं लेकिन तानाशाह बनकर प्रदेश सरकार द्वारा उनमें से कुछ ग्राम पंचायतों का विलय नगर पालिका में करके वहां के निर्वाचित प्रधानों को अपदस्थ करने का कुचक्र रचा है। ग्राम पंचायतों का नगर पालिका में विलय राज्यपाल के द्वारा आपत्ति प्राप्त कर उसके निस्तारण के बाद ही किया जा सकता है। मौजूदा राज्य सरकार ने बिना आपत्ति प्राप्ति व निस्तारण के ग्राम पंचायतों का विलय नगर पालिका में कर दिया है, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। विलय बिना आम सहमति के नहीं किया जा सकता। ग्राम पंचायतें अपना विलय नगर पालिका में नहीं चाहती हैं। कहा कि ग्राम पंचायतों की 90 फीसदी भूमि कृषि योग्य भूमि है। वहां की नब्बे प्रतिशत जनसंख्या व्यापार नहीं करती है। जिसके कारण नगर पंचायतों में शामिल की गईं ग्राम पंचायतों का विलय विधि विरुद्ध है।