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Amroha News: जोया के निजी हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद जच्चा-बच्चा की मौत पर हंगामा, ओटी सील

Mon, 14 Jul 2025 01:51 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Mon, 14 Jul 2025 01:51 AM IST
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Uproar over death of mother and child after operation in Zoya's private hospital, OT sealed
जोया (अमरोहा)। क्षेत्र के एक निजी हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद जच्चा और बच्चा की मौत होने का आरोप लगा है। इससे परिजनों में रोष फैल गया। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत किया। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों में समझौता हो गया।
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उधर, हॉस्पिटल में जच्चा-बच्चा की मौत की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ओटी को सील कर दिया। साथ ही ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर समेत तीन डॉक्टरों को सीएमओ कार्यालय में तलब किया है। उधर, अस्पताल संचालक ने उनके हॉस्पिटल में किसी भी तरह के ऑपरेशन और जच्चा-बच्चा की मौत से इन्कार किया है
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देहात क्षेत्र के कांकर सराय निवासी सलमान की पत्नी अफसाना गर्भवती थी। शनिवार शाम चार बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने अफसाना को जोया में हाईवे स्थित एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। अफसाना के पास पहले से तीन बच्चे हैं। उनकी चौथी डिलीवरी होनी थी। आरोप के मुताबिक हॉस्पिटल में मौजूद डॉक्टर व स्टाफ ने ऑपरेशन करने की सलाह दी और साथ ही बाहर से डॉक्टर बुलाने की बात कही थी।
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शनिवार रात करीब 12 बजे डॉक्टरों ने अफसाना की ऑपरेशन से डिलीवरी कर दी। इस दौरान अफसाना ने बेटे को जन्म दिया लेकिन नवजात की मौत हो गई। कुछ देर बाद अफसाना की तबीयत बिगड़ गई और उनकी भी मौत हो गई। जच्चा-बच्चा की मौत से परिजनों का गुस्सा भड़क गया। परिजनों ने हॉस्पिटल के डॉक्टरों पर गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगाया और हंगामा करने लगे।
परिजनों ने कहा कि अगर योग्य डॉक्टर से ऑपरेशन कराया गया होता तो अफसाना और उसके बच्चे की मौत नहीं होती। हंगामा की सूचना पर डिडौली पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित लोगों को शांत किया। हालांकि, बाद में हॉस्पिटल मालिक और मृतक जच्चा-बच्चा के परिजनों के बीच समझौता हो गया। इसके बाद परिजन बिना कार्रवाई के ही शवों को घर ले गए और रविवार को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया।
रविवार शाम जानकारी मिलने पर नोडल अधिकारी डॉ. शरद ने उक्त हॉस्पिटल पर छापा मारा। जच्चा-बच्चा की मौत के संबंध में जानकारी हासिल की। साथ ही हॉस्पिटल की ओटी को सील कर दिया। नोडल अधिकारी डॉ. शरद ने बताया कि हॉस्पिटल में एक डॉक्टर सर्जरी करते है। इसके अलावा एक अन्य डॉक्टर भी रहते है। इस हॉस्पिटल का संचालक एमबीबीएस डिग्री धारक डॉक्टर है। तीनों डॉक्टरों को अस्पताल के पंजीकरण संबंधित दस्तावेज और अस्पताल में भर्ती मरीज से संबंधित रिकॉर्ड लेकर सोमवार की सुबह दस बजे सीएमओ कार्यालय में बुलाया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को नहीं पता अस्पताल का पंजीयन है या नहीं
झोलाछाप के नोडल अधिकारी डॉ. शरद ने बताया कि पिछले दिनों उक्त हॉस्पिटल में अवैध रूप से संचालित मेडिकल स्टोर के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस दौरान हॉस्पिटल का पंजीयन था, इसके बाद 15 अप्रैल के बाद नवीनीकरण होना था। इसके बाद अस्पताल का नवीनीकरण हुआ या नहीं इस संबंध में सोमवार को ऑफिस के रिकॉर्ड में देखने के बाद पता चलेगा।

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अगस्त 2024 को भी इसी हॉस्पिटल में हुई थी जच्चा-बच्चा की मौत

डिडौली क्षेत्र के कालखेड़ा उर्फ कलालखेड़ा निवासी कासिम की पत्नी शहनाज के पास एक बेटा व दो बेटियां हैं। चौथे बच्चे की डिलीवरी के लिए परिजनों ने सात अक्तूबर को शहनाज को जोया क्षेत्र के इसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया था, जहां 8 अक्तूबर 2024 की शाम ऑपरेशन से शहनाज ने बेटे को जन्म दिया लेकिन बाद में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया था। इस बीच ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर और हॉस्पिटल संचालक भाग निकला था। जच्चा-बच्चा की मौत की जानकारी मिलने पर तत्कालीन एसडीएम सदर सुधीर कुमार, सीएमओ डॉ. एसपी सिंह और नोडल अधिकारी डॉ. शरद कुमार मौके पर पहुंच गए थे। जांच में हॉस्पिटल नवीनीकरण नहीं मिला था। इसके बाद नोडल ने एसडीएम और सीएमओ की मौजूदगी में अस्पताल को सील कर दिया था। अस्पताल संचालक को नोटिस देकर जवाब मांगा था। इसके चार दिन बाद ही हॉस्पिटल फिर से शुरू हो गया था।

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पहले भी सील किया जा चुका है हॉस्पिटल

जच्चा-बच्चा की मौत के लिए जिम्मेदार माने जा रहे हॉस्पिटल बीते साल 20 अप्रैल 2024 तक के लिए रजिस्टर्ड था। इसके बाद हॉस्पिटल संचालक में नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। अस्पताल के पॉल्यूशन की अवधि 19 अक्तूबर 2024 को समाप्त हो रही थी। जबकि, बायो वेस्ट प्रमाणपत्र की अवधि 31 अगस्त 2024 को समाप्त हो गई थी। फायर की एनओसी नहीं थी। जिसके चलते विभाग की ओर से इसका नवीनीकरण नहीं किया गया था। बावजूद इसके अवैध रूप से हॉस्पिटल में ऑपरेशन से डिलीवरी की जा रही थीं। जिसके चलते अधिकारियों ने हॉस्पिटल को सील कर दिया था। इस दौरान हॉस्पिटल में भर्ती चार मरीजों को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया गया था।
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