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UP: ऑनर किलिंग की कहानी रच पीड़ितों को ही अमरोहा पुलिस ने भेजा था जेल, अब मुआवजे का आदेश, यह था पूरा प्रकरण

Fri, 22 Mar 2024 12:15 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा
अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 22 Mar 2024 12:15 PM IST
सार

अमरोहा में फरवरी 2019 को एक किशोरी घर से गायब हो गई थी। उसके भाई ने पांच के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज करवाया था। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जब किशोरी बरामद नहीं हुई तो तत्कालीन कोतवाल ने किशोरी के पिता, भाई और एक रिश्तेदार पर ऑनर किलिंग का आरोप लगा उन्हें जेल भेज दिया। घटना के कुछ माह बाद युवती को प्रेमी के साथ पकड़ लिया गया था। तब यह मामला उजागर हुआ।

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UP: Amroha police sent victim family jail after creating story honor killing, High Court ordered compensation
यूपी पुलिस की गाड़ी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मानवाधिकार आयोग के बाद अब हाईकोर्ट ने भी फर्जी ऑनर किलिंग में फंसाकर जेल भेजे गए पिता-पुत्र व अन्य लोगों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। जिंदा किशोरी की हत्या के आरोप में जेल काटने वाले पिता, भाई और रिश्तेदार को पहले भी एक लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है।

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जिसमें दो लोग वह भी शामिल हैं, जो किशोरी के अपहरण के आरोप में जेल गए थे। इन सभी लोगों को मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर करीब नौ महीने पहले शासन ने एक-एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।यह पूरा प्रकरण आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव का है।
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यहां रहने वाले किसान की 15 वर्षीय बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। 10 फरवरी 2019 को किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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बावजूद इसके किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा कर रहे थे। उन्होंने जेल भेजे गए दोनों नामजद आरोपियों को निर्दोष बताते हुए रिहा करा दिया था। लेकिन, बाद में षड्यंत्रकारी पुलिस ने बड़ा कारनामा कर डाला था।

28 दिसंबर 2019 को किशोरी के पिता, भाई और एक रिश्तेदार को किशोरी का हत्यारा बताकर जेल भेज दिया था। तर्क दिया था कि किशोरी के गलत संगत में पड़ने पर परिवार ने इज्जत बचाने के लिए उसकी गोली मारकर हत्या कर दी और बाद में शव गंगा में बहा दिया।

सात अगस्त 2020 को किशोरी के जिंदा होने की जानकारी सामने आ गई। किशोरी अपने गांव से आठ किलोमीटर दूर प्रेमी के गांव में सुरक्षित मिली। खुलासा हुआ कि प्रेमी के साथ शादी करके वह पत्नी के रूप में रह रही थी।

इसका पता चलते ही पुलिस ने यू-टर्न लेकर प्रेमी से किशोरी के पति बने युवक को अपहरण और नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दूसरी ओर यह सच अदालत तक पहुंचा तो किशोरी के पिता, भाई और रिश्तेदार को जेल से रिहाई मिली थी।

अदालत की कड़ी टिप्पणी के बाद विवेचना से लेकर खुलासे तक में शामिल रहे इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा समेत ग्यारह पुलिस कर्मियों के खिलाफ के मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे की विवेचना संभल क्राइम ब्रांच कर रही है।

 

 

इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हुआ था केस

जिंदा किशोरी की हत्या का षड्यंत्र रचने वाले इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा, एसआई मोहम्मद आरिफ, एसआई राकेश कुमार, एसआई मनोज कुमार, एसआई विनोद कुमार त्यागी, सिपाही भूपेंद्र सिंह, सिपाही कृष्णवीर सिंह, सिपाही अनिरुद्ध, सिपाही दीपक कुमार, महिला सिपाही अपेक्षा तोमर व महिला सिपाही निधि के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। नामजदों में शामिल दरोगा विनोद कुमार त्यागी के सेवानिवृत्त हो जाने के कारण शेष दस पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था।

 

 

इंस्पेक्टर के खिलाफ हुए थे गैर जमानती वारंट 

जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर पिता, भाई और रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेजने वाले तत्कालीन आदमपुर इंस्पेक्टर (बरेली में तैनात) अशोक कुमार शर्मा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। इसके बाद भी वह हाजिर नहीं हुए। इतना ही नहीं न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अब संभल के क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर व मुकदमे के विवेचक हाजिर नहीं होने पर न्यायालय से उनकी कुर्की की अनुमति लेने की तैयारी में है।

 

 

पिता को 11, भाई को 9 और रिश्तेदार को जेल में काटने पड़े थे 15 महीने
लापरवाह पुलिस कर्मचारियों की वजह से निर्दोष पिता को अपने जीवन के करीब 11 माह, भाई को करीब 9 माह और रिश्तेदार को करीब 1 वर्ष 3 महीने जिला कारागार में गुजारने पड़े थे।

 

 

पीड़ित बोले: हमारी आर्थिक स्थिति को देखकर डीएम सुनिश्चित करें मुआवजा

बेटी की हत्या के झूठे आरोप में पंद्रह माह जेल में बंद रहे पिता का कहना है कि हाईकोर्ट से मुआवजे के संबंध में हुए आदेश से संतुष्ट हैं। हमारी आर्थिक स्थिति को देखकर डीएम मुआवजा सुनिश्चित करें। जो भी वह मुआवजा देंगे उसे स्वीकार किया जाएगा।

ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में जेल काटने वाले निर्दोष पिता के आंसू छलक आए। उन्होंने बताया कि पुलिस ने बेटी की हत्या कबूल कराने के लिए तीन दिन तक थर्ड डिग्री दी थी। पेट्रोल छिड़ककर शरीर को जलाया और करंट के झटके दिए थे।

गर्भवती पुत्रवधू और अन्य परिजनों को बुरी तरह पीटा था। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने मुआवजे का आदेश दिया है। डीएम इसका निर्धारण करेंगे। इस मुकदमे बाजी के चक्कर में छह बीघा जमीन बिक गई। ट्रैक्टर, पशुओं समेत घर बहुत सामान बिक गया था। करीब 25 लाख रुपये से अधिक की क्षति हुई है।

 

इस मामले से जुड़े तथ्यों पर गहनता से अध्ययन किया जाएगा। शासन को भी पत्राचार किया जाएगा। विधिक राय लेने के बाद अग्रिम प्रक्रिया की जाएगी। अभी पूरा मामला हमारे भी संज्ञान में नहीं है। पुलिस विभाग से भी जानकारी ली जाएगी। -राजेश कुमार त्यागी, जिलाधिकारी

 

 

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