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Amroha News: सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट वाहन, हादसे का खतरा
Fri, 21 Mar 2025 01:18 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 21 Mar 2025 01:18 AM IST
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अमरोहा।
जिले की सड़कों पर सात हजार से ज्यादा व्यवसायिक वाहन बिना फिटनेस सड़क पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों का न तो प्रदूषण प्रमाणपत्र है और न इंश्योरेंस। इनमें बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और बस भी शामिल हैं। वहीं, अब परिवहन विभाग अभियान चलाकर कार्रवाई करने का दावा कर रहा है।
एआरटीओ कार्यालय के आकड़ों के मुताबिक, 3.15 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसमें 18 क्रेन, 557 बस और 11767 ट्रैक्टर सहित अन्य वाहन शामिल हैं। इनमें से सात हजार से ज्यादा वाहन बिना फिटनेस और परमिट के सड़कों पर चल रहे हैं। इन वाहनों में अधिकतर ट्रैक्टर और बसें शामिल हैं।
व्यवसायिक वाहन के मालिक फिटनेस का नवीनीकरण कराने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। इन पर विभाग का लाखों रुपये का परमिट का टैक्स भी बकाया है। बार-बार नोटिस देने के बाद भी मालिक वाहनों की फिटनेस व परमिट नहीं ले रहे हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण यह हवा में जहर भी घोल रहे हैं। जिन वाहनों का नियम विरुद्ध संचालन हो रहा है। इसके अलावा ऑटो, टैंपों, टाटा मैजिक समेत अन्य वाहनों का भी यही हाल हैं।
प्रदूषण और बीमा प्रमाणपत्र जरूरी
एआरटीओ प्रवर्तन महेश शर्मा ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र सभी वाहनों के लिए जरूरी है। नए वाहन के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र की आवश्यकता एक साल तक नहीं होती है। इसके बाद हर छह व एक साल के अंदर जांच कराकर फिर से प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र लेना होता है। फिटनेस और परमिट के लिए प्रदूषण नियंत्रण व बीमा का प्रमाणपत्र होना जरूरी है, लेकिन वाहन मालिक जरूरी दस्तावेज तक पूरे नहीं करा रहे हैं। यदि कोई दुर्घटना होगी तो फिर बीमा का किसी प्रकार का लाभ नहीं मिलता है। इसके बाद भी लोग लापरवाही बरत रहे हैं।
सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट व्यवसायिक वाहनों पर लगातार कार्रवाई जारी है। पिछले दिनों 15 बस सीज की गई थीं। जबकि, 30 से अधिक वाहनों पर लाखों का जुर्माना लगाया था। ट्रैक्टर मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके बाद अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। - महेश शर्मा एआरटीओ प्रवर्तन
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जिले की सड़कों पर सात हजार से ज्यादा व्यवसायिक वाहन बिना फिटनेस सड़क पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों का न तो प्रदूषण प्रमाणपत्र है और न इंश्योरेंस। इनमें बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और बस भी शामिल हैं। वहीं, अब परिवहन विभाग अभियान चलाकर कार्रवाई करने का दावा कर रहा है।
एआरटीओ कार्यालय के आकड़ों के मुताबिक, 3.15 लाख वाहन पंजीकृत हैं। इसमें 18 क्रेन, 557 बस और 11767 ट्रैक्टर सहित अन्य वाहन शामिल हैं। इनमें से सात हजार से ज्यादा वाहन बिना फिटनेस और परमिट के सड़कों पर चल रहे हैं। इन वाहनों में अधिकतर ट्रैक्टर और बसें शामिल हैं।
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व्यवसायिक वाहन के मालिक फिटनेस का नवीनीकरण कराने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। इन पर विभाग का लाखों रुपये का परमिट का टैक्स भी बकाया है। बार-बार नोटिस देने के बाद भी मालिक वाहनों की फिटनेस व परमिट नहीं ले रहे हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण यह हवा में जहर भी घोल रहे हैं। जिन वाहनों का नियम विरुद्ध संचालन हो रहा है। इसके अलावा ऑटो, टैंपों, टाटा मैजिक समेत अन्य वाहनों का भी यही हाल हैं।
प्रदूषण और बीमा प्रमाणपत्र जरूरी
एआरटीओ प्रवर्तन महेश शर्मा ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र सभी वाहनों के लिए जरूरी है। नए वाहन के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र की आवश्यकता एक साल तक नहीं होती है। इसके बाद हर छह व एक साल के अंदर जांच कराकर फिर से प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाणपत्र लेना होता है। फिटनेस और परमिट के लिए प्रदूषण नियंत्रण व बीमा का प्रमाणपत्र होना जरूरी है, लेकिन वाहन मालिक जरूरी दस्तावेज तक पूरे नहीं करा रहे हैं। यदि कोई दुर्घटना होगी तो फिर बीमा का किसी प्रकार का लाभ नहीं मिलता है। इसके बाद भी लोग लापरवाही बरत रहे हैं।
सड़कों पर दौड़ रहे अनफिट व्यवसायिक वाहनों पर लगातार कार्रवाई जारी है। पिछले दिनों 15 बस सीज की गई थीं। जबकि, 30 से अधिक वाहनों पर लाखों का जुर्माना लगाया था। ट्रैक्टर मालिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके बाद अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। - महेश शर्मा एआरटीओ प्रवर्तन