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Amroha News: ... जुबां खामोश, आंसू बयां कर रहे रुखसार का दर्द
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अमरोहा। न्यायिककर्मी राशिद हुसैन की बेरहमी से हत्या ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। 35 वर्षीय पत्नी रुखसार के रुख पर सिर्फ आंसू हैं। रुक-रुक कर आती चीखों के अलावा उनके मुंह से कोई अल्फाज नहीं निकल रहे। लगातार बहती आंखों से वह पास मौजूद महिलाओं की तरफ सवालिया निगाहों से देखती हैं और रुंधे गले से एक ही सवाल निकलता है-इतनी मामूली बात पर कोई किसी की जान कैसे ले सकता है।
गम में घिरे राशिद के भतीजे सलमान बताते हैं कि सब आंखों के सामने होने से चाची (रुखसार) गहरे सदमे में हैं। अपने चाचा के घर जाने के कारण वह रविवार के सफर के समय खासी खुश थीं। कार में सवार तीनों बच्चे भी चुलबुली हरकतें कर रहे थे। गलत साइड से कार से आगे निकलने की कोशिश में बाइक सवारों ने कार से छूते ही एेसा कहर भरपाया कि उससे हुए नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती।
पूरा परिवार इस बात पर हैरान है कि बाइक निकालते समय खुद की गलती पर भी वे राशिद पर ही टूट पड़े। इससे पहले कार में सवार परिजन कुछ समझ पाते वे ही लोग गालियां देने लगे। विरोध किया तो हाथापाई करने लगे। चिल्लाने पर आसपास के लोग जुटते देख राशिद ने कार आगे बढ़ा दी। कुछ दूर ही पहुंचे थे कि और लोगों के साथ धावा बोलकर कार रुकवा ली। राशिद को कार से खींचकर इतना पीटा कि जान ही चली गई।
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सलमान और रुखसार को मलाल है कि हमलावरों ने उन्हें इतना मौका भी नहीं दिया कि वे राशिद को बचा सकें। रुखसार के गिड़गिड़ाने और रोते बच्चों की मिन्नतों का भी बेखौफ हमलावरों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। खुलेआम मनमानी करने वाले तब भागे जब आसपास लोग करीब आते देखे लेकिन तभी कानून का डर उनके चेहरे पर नहीं था। परिजनों का कहना है कि आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
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... क्या हुआ पापा को, हमारे घर इतने लोग क्यों आ गए
राशिद हुसैन की हत्या के बाद से बच्चे सहमे हुए हैं। घटना के समय दो साल का बेटा अम्माद अपनी मां रुखसार की गोद में था। परिवार पर बिजली गिराने वाली घटना के बाद से उसे सुकून से मां की गोद मयस्सर नहीं हो पा रही। आठ साल का बेटा आरिश कभी पिता की याद में सुबकता है तो कभी मां के बहते आंसू पोछने की कोशिश करता है। चार साल की बेटी मायरा घर में भीड़ से चौंक रही है। मासूमियत भरी शैली में पूछा...क्या हुआ पापा को, हमारे घर इतने लोग क्यों आ गए।
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गम में घिरे राशिद के भतीजे सलमान बताते हैं कि सब आंखों के सामने होने से चाची (रुखसार) गहरे सदमे में हैं। अपने चाचा के घर जाने के कारण वह रविवार के सफर के समय खासी खुश थीं। कार में सवार तीनों बच्चे भी चुलबुली हरकतें कर रहे थे। गलत साइड से कार से आगे निकलने की कोशिश में बाइक सवारों ने कार से छूते ही एेसा कहर भरपाया कि उससे हुए नुकसान की भरपाई कभी नहीं हो सकती।
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पूरा परिवार इस बात पर हैरान है कि बाइक निकालते समय खुद की गलती पर भी वे राशिद पर ही टूट पड़े। इससे पहले कार में सवार परिजन कुछ समझ पाते वे ही लोग गालियां देने लगे। विरोध किया तो हाथापाई करने लगे। चिल्लाने पर आसपास के लोग जुटते देख राशिद ने कार आगे बढ़ा दी। कुछ दूर ही पहुंचे थे कि और लोगों के साथ धावा बोलकर कार रुकवा ली। राशिद को कार से खींचकर इतना पीटा कि जान ही चली गई।
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सलमान और रुखसार को मलाल है कि हमलावरों ने उन्हें इतना मौका भी नहीं दिया कि वे राशिद को बचा सकें। रुखसार के गिड़गिड़ाने और रोते बच्चों की मिन्नतों का भी बेखौफ हमलावरों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। खुलेआम मनमानी करने वाले तब भागे जब आसपास लोग करीब आते देखे लेकिन तभी कानून का डर उनके चेहरे पर नहीं था। परिजनों का कहना है कि आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
... क्या हुआ पापा को, हमारे घर इतने लोग क्यों आ गए
राशिद हुसैन की हत्या के बाद से बच्चे सहमे हुए हैं। घटना के समय दो साल का बेटा अम्माद अपनी मां रुखसार की गोद में था। परिवार पर बिजली गिराने वाली घटना के बाद से उसे सुकून से मां की गोद मयस्सर नहीं हो पा रही। आठ साल का बेटा आरिश कभी पिता की याद में सुबकता है तो कभी मां के बहते आंसू पोछने की कोशिश करता है। चार साल की बेटी मायरा घर में भीड़ से चौंक रही है। मासूमियत भरी शैली में पूछा...क्या हुआ पापा को, हमारे घर इतने लोग क्यों आ गए।