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अयोध्या में श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा से देश में उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण : स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज
Thu, 25 Jan 2024 04:03 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Thu, 25 Jan 2024 04:03 AM IST
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गजरौला (अमरोहा)। शारदा पीठाधीश्वर अनंत श्री जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से सनातन समाज और हिंदू सुख की अनुभूति कर रहा है। देश में उत्साह और प्रसन्नता का वातावरण है। उन्होंने हिंदुओं को श्रीराम मंदिर की खुशी को पचाने की सलाह दी। कहा कि सीमा से बाहर न जाएं।
बुधवार की रात नौ बजे जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज हाईवे किनारे एक औद्योगिक इकाई के गेस्ट हाउस में पहुंचे। यहां पर उन्होंने प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य और दिव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जाने से सनातन धर्म के लोगों में खुशी का माहौल और देश में प्रसन्नता का वातावरण है। भगवान राम भारतीय ही नहीं, बल्कि विश्व की मानवता के लिए एक अद्वितीय उदाहरण हैं। राम जैसा आदर्श पुरुष न हुआ न है और न होगा। राम जैसा पिता, राम जैसा पुत्र, राम जैसा भाई, राम जैसा मित्र और राम जैसा शत्रु संसार में असंभव है। शंकराचार्य ने कहा कि दूसरे धर्म के मानने वालों का हिंदुओं के 30 हजार मंदिरों पर अधिकार है। एक मंदिर प्राप्त होने पर इतनी अधिक प्रसन्नता जाहिर करने से दूसरे धर्म के मानने वालों को कष्ट होगा। उनकी भावनाएं आहत होंगी। किसी को कष्ट देना राम और राम की संस्कृति के मानने वालाें के लिए नहीं है। हिंदू समाज इस खुशी में झूम रहा है। उन्होंने अपील की कि हिंदुओं को इस प्रसन्नता को पचाना चाहिए। थोड़ी सी सफलता पर सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए।
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बुधवार की रात नौ बजे जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज हाईवे किनारे एक औद्योगिक इकाई के गेस्ट हाउस में पहुंचे। यहां पर उन्होंने प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य और दिव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जाने से सनातन धर्म के लोगों में खुशी का माहौल और देश में प्रसन्नता का वातावरण है। भगवान राम भारतीय ही नहीं, बल्कि विश्व की मानवता के लिए एक अद्वितीय उदाहरण हैं। राम जैसा आदर्श पुरुष न हुआ न है और न होगा। राम जैसा पिता, राम जैसा पुत्र, राम जैसा भाई, राम जैसा मित्र और राम जैसा शत्रु संसार में असंभव है। शंकराचार्य ने कहा कि दूसरे धर्म के मानने वालों का हिंदुओं के 30 हजार मंदिरों पर अधिकार है। एक मंदिर प्राप्त होने पर इतनी अधिक प्रसन्नता जाहिर करने से दूसरे धर्म के मानने वालों को कष्ट होगा। उनकी भावनाएं आहत होंगी। किसी को कष्ट देना राम और राम की संस्कृति के मानने वालाें के लिए नहीं है। हिंदू समाज इस खुशी में झूम रहा है। उन्होंने अपील की कि हिंदुओं को इस प्रसन्नता को पचाना चाहिए। थोड़ी सी सफलता पर सीमा से बाहर नहीं जाना चाहिए।
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