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Amroha News: जिले में ब्लैक स्पॉट की भरमार, सुधार कार्य के लिए करें इंतजार
Wed, 20 Nov 2024 02:26 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Wed, 20 Nov 2024 02:26 AM IST
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गजरौला में वह ब्लैक स्पोर्ट जहां पर आए दिन होते रहते हैं हादसे। संवाद
- फोटो : संवाद
अमरोहा।
मुरादाबाद-दिल्ली हाईवे सहित जिलेभर की सड़कों पर ब्लैक स्पॉट की भरमार है, जिन पर आए दिन हादसे होते है और लोग अपनी जान गंवा रहे है। वहीं, प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 51 स्थान ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। पांच साल पहले सामने आई इस रिपोर्ट के बाद अबतक हादसे बढ़ा रहे इन स्थानों को दुरुस्त नहीं कराया गया।
पाकबड़ा से ब्रजघाट तक 62 किमी लंबे हाईवे पर डिडौली पुल और एक फैक्टरी के सामने सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। चौधरपुर पुल, बुढ़नपुर, कांकाठेर ढाल और चौपला चौराहा पर भी आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। वहीं, हरियाना गांव के पास सड़क किनारे और श्योनाली जियारत सहित जिले की अन्य सड़कों पर भी पांच या उससे अधिक गंभीर हादसे हुए हैं।
पुलिस आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच सालों में जिले की सड़कों पर 1693 हादसे हुए हैं। जिनमें 1107 लोगों की जान चली गई। जबकि, 586 लोग घायल हो गए हैं। अधिकारियों की टीम ने सबसे ज्यादा हादसे होने वाले स्थान का थानेवार निरीक्षण किया। इसके बाद 51 स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चुना है। हालांकि, जिलेभर में इसके अलावा भी कई ऐसे स्थान है, जहां आए दिन हादसे हो रहे है। गजरौला क्षेत्र में नौ स्थानों पर सबसे अधिक 347 हादसे हुए हैं। इनमें सबसे अधिक जुबिलेंट फैक्टरी के सामने 16, कांकाठेर ढाल पर 14, गजरौला चौपला पर 12, अहरौला तेजवन गांव के सामने 10 हादसे हुए हैं।
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डिडौली क्षेत्र में डिडौली पुल पर 21, चौधरपुर पुल पर 18, बुढ़नपुर के सामने 13, हरियाना गांव के सामने सड़क किनारे 12, श्योनाली जियारत के पास 10 हादसे हुए। रजबपुर क्षेत्र में वेंकटेश्वर विवि के सामने 13 और जीएमएस हॉस्पिटल के सामने आठ हादसे हुए हैं।
यह भी हादसे के कारण
जिला सड़क सुरक्षा समिति की टीम की जांच में सामने आया कि हाईवे पर हादसे होने का मुख्य कारण लिंक रोड का होना, ओवर स्पीडिंग, अवैध कट, पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं होना पाया गया है। इसके अलावा संकेतक, रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड, कैट आई और स्पीड ब्रेकर का न होना हादसे का कारण है। गलत दिशा में वाहन चलाने, अवैध पार्किंग होना, रोड साइड से खराब वाहन न हटना, सामने छुट्टा पशुओं का आ जाना भी हादसे के कारणों में शामिल है।
यह करना होगा समाधान
संकेत एवं रिफ्लेक्टर का होना, डिवाइडर का ऊंचा होना, स्पीड ब्रेकर और कैट आई का होना, बैरिकेडिंग लगाना, स्ट्रीट लाइट का लगाना, छुट्टा पशुओं को सड़क पर आने से रोकना।
कोहरे में यह बरतें सावधानी
- कोहरे में वाहन चलाते समय हैडलाइट व इंडिकेटर का इस्तेमाल करें।
- धुंध और रात के समय वाहन के आगे और पीछे की लाइट जलाकर चलें।
- वाहन में रिफ्लेक्टर का भी प्रयोग करें।
- फॉग लाइटें इस्तेमाल करें।
- कोहरे के दौरान आगे चल रहे वाहन से उचित दूरी रखें।
- निर्धारित गति से ही गाड़ी चलाएं।
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मुरादाबाद-दिल्ली हाईवे सहित जिलेभर की सड़कों पर ब्लैक स्पॉट की भरमार है, जिन पर आए दिन हादसे होते है और लोग अपनी जान गंवा रहे है। वहीं, प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 51 स्थान ऐसे हैं, जहां सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। पांच साल पहले सामने आई इस रिपोर्ट के बाद अबतक हादसे बढ़ा रहे इन स्थानों को दुरुस्त नहीं कराया गया।
पाकबड़ा से ब्रजघाट तक 62 किमी लंबे हाईवे पर डिडौली पुल और एक फैक्टरी के सामने सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। चौधरपुर पुल, बुढ़नपुर, कांकाठेर ढाल और चौपला चौराहा पर भी आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। वहीं, हरियाना गांव के पास सड़क किनारे और श्योनाली जियारत सहित जिले की अन्य सड़कों पर भी पांच या उससे अधिक गंभीर हादसे हुए हैं।
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पुलिस आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच सालों में जिले की सड़कों पर 1693 हादसे हुए हैं। जिनमें 1107 लोगों की जान चली गई। जबकि, 586 लोग घायल हो गए हैं। अधिकारियों की टीम ने सबसे ज्यादा हादसे होने वाले स्थान का थानेवार निरीक्षण किया। इसके बाद 51 स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चुना है। हालांकि, जिलेभर में इसके अलावा भी कई ऐसे स्थान है, जहां आए दिन हादसे हो रहे है। गजरौला क्षेत्र में नौ स्थानों पर सबसे अधिक 347 हादसे हुए हैं। इनमें सबसे अधिक जुबिलेंट फैक्टरी के सामने 16, कांकाठेर ढाल पर 14, गजरौला चौपला पर 12, अहरौला तेजवन गांव के सामने 10 हादसे हुए हैं।
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डिडौली क्षेत्र में डिडौली पुल पर 21, चौधरपुर पुल पर 18, बुढ़नपुर के सामने 13, हरियाना गांव के सामने सड़क किनारे 12, श्योनाली जियारत के पास 10 हादसे हुए। रजबपुर क्षेत्र में वेंकटेश्वर विवि के सामने 13 और जीएमएस हॉस्पिटल के सामने आठ हादसे हुए हैं।
यह भी हादसे के कारण
जिला सड़क सुरक्षा समिति की टीम की जांच में सामने आया कि हाईवे पर हादसे होने का मुख्य कारण लिंक रोड का होना, ओवर स्पीडिंग, अवैध कट, पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं होना पाया गया है। इसके अलावा संकेतक, रिफ्लेक्टर, साइन बोर्ड, कैट आई और स्पीड ब्रेकर का न होना हादसे का कारण है। गलत दिशा में वाहन चलाने, अवैध पार्किंग होना, रोड साइड से खराब वाहन न हटना, सामने छुट्टा पशुओं का आ जाना भी हादसे के कारणों में शामिल है।
यह करना होगा समाधान
संकेत एवं रिफ्लेक्टर का होना, डिवाइडर का ऊंचा होना, स्पीड ब्रेकर और कैट आई का होना, बैरिकेडिंग लगाना, स्ट्रीट लाइट का लगाना, छुट्टा पशुओं को सड़क पर आने से रोकना।
कोहरे में यह बरतें सावधानी
- कोहरे में वाहन चलाते समय हैडलाइट व इंडिकेटर का इस्तेमाल करें।
- धुंध और रात के समय वाहन के आगे और पीछे की लाइट जलाकर चलें।
- वाहन में रिफ्लेक्टर का भी प्रयोग करें।
- फॉग लाइटें इस्तेमाल करें।
- कोहरे के दौरान आगे चल रहे वाहन से उचित दूरी रखें।
- निर्धारित गति से ही गाड़ी चलाएं।