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प्रेमी के शादी से इनकार करने पर युवती ने की थी खुदकुशी
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मंडी धनौरा। थाना क्षेत्र के गांव देहरा चक की प्रधान कुंता देवी की पुत्री शालिनी ने प्रेमी के शादी से इंकार करने पर मौत को गले लगाया था। प्रेमी के इनकार से आहत शालिनी अपने ही दुपट्टे से फंदा लगाकर पेड़ से झूल गई थी। पुलिस ने मंगलवार को शालिनी के प्रेमी को गिरफ्तार कर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में जेल भेज दिया।
बीते शुक्रवार की शाम शालिनी का शव गांव से बाहर एक पेड़ से लटका मिला था। शालिनी नगर के राष्ट्रीय इंटर कालेज में कक्षा 11 की छात्रा थी। शालिनी के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए काफी हंगामा काटा था और आठ घंटे तक जाम लगाया था। इस मामले में पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंग आया था। मंगलवार को क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतका के थाना गजरौला के गांव दरियापुर निवासी मनोज पुत्र ज्ञानप्रकाश के साथ प्रेम प्रसंग थे। दोनों परिवारों की भूमि गंगा के दूसरी ओर जनपद हापुड़ में है। वहीं आने जाने के दौरान दोनों के बीच प्रेम प्रसंग हो गया था।
सीओ ने बताया कि शालिनी अपने प्रेमी मनोज के साथ शादी करना चाहती थी लेकिन मनोज मना करता था। शुक्रवार को शालिनी ने ही फोन कर मनोज को धनौरा बुलाया था। दोनों ने एक रेस्टोरेंट में बैठकर नाश्ता किया था। सीओ ने बताया कि शालिनी ने उस दिन भी मनोज पर शादी का दबाव बनाया। मनोज के साफ मना करने पर दोनों के बीच तकरार भी हुई। इससे आहत होकर शालिनी ने गांव के बाहर दुपट्टा लगाकर खुदकुशी कर ली। सीओे ने बताया कि विवेचना के दौरान मृतका की मां के फोन की काल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज से मनोज का नाम प्रकाश में आया था। उससे पूछताछ की गई तो सारी कहानी सामने आ गई। सीओ ने बताया कि हत्या के अभियोग को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में बदल दिया गया है। मनोज को इसी धारा के तहत जेल भेज दिया गया है।
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सियासी लोगों ने साधी चुप्पी
मंडी धनौरा। शालिनी की मौत का सियासी फायदा उठाने वाले राजनैतिक दल मामले का खुलासा होने के बाद चुप्पी साध गए हैं। दलित वर्ग की शालिनी की मौत को प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति से जोड़ते हुए विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने गांव जाकर सियासी रंग देने का प्रयास किया था। पुलिस भी विपक्षी दलों द्वारा मामले को तूल पकड़ता देख कर हरकत में आ गई थी। पुलिस अधीक्षक ने मामले का खुलासा करने के लिए जनपद के चारों सीओ के नेतृत्व में चार टीमों का गठन कर दिया था। 72 घंटे के भीतर ही मामले का खुलासा कर पुलिस ने अपनी छवि बचाई है वही दूसरी ओर मामले को सियासी रंग देने वालों के अरमान भी ठंडे कर दिए हैं। संवाद
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बीते शुक्रवार की शाम शालिनी का शव गांव से बाहर एक पेड़ से लटका मिला था। शालिनी नगर के राष्ट्रीय इंटर कालेज में कक्षा 11 की छात्रा थी। शालिनी के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए काफी हंगामा काटा था और आठ घंटे तक जाम लगाया था। इस मामले में पिता की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैंगिंग आया था। मंगलवार को क्षेत्राधिकारी सत्येंद्र सिंह ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि मृतका के थाना गजरौला के गांव दरियापुर निवासी मनोज पुत्र ज्ञानप्रकाश के साथ प्रेम प्रसंग थे। दोनों परिवारों की भूमि गंगा के दूसरी ओर जनपद हापुड़ में है। वहीं आने जाने के दौरान दोनों के बीच प्रेम प्रसंग हो गया था।
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सीओ ने बताया कि शालिनी अपने प्रेमी मनोज के साथ शादी करना चाहती थी लेकिन मनोज मना करता था। शुक्रवार को शालिनी ने ही फोन कर मनोज को धनौरा बुलाया था। दोनों ने एक रेस्टोरेंट में बैठकर नाश्ता किया था। सीओ ने बताया कि शालिनी ने उस दिन भी मनोज पर शादी का दबाव बनाया। मनोज के साफ मना करने पर दोनों के बीच तकरार भी हुई। इससे आहत होकर शालिनी ने गांव के बाहर दुपट्टा लगाकर खुदकुशी कर ली। सीओे ने बताया कि विवेचना के दौरान मृतका की मां के फोन की काल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज से मनोज का नाम प्रकाश में आया था। उससे पूछताछ की गई तो सारी कहानी सामने आ गई। सीओ ने बताया कि हत्या के अभियोग को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में बदल दिया गया है। मनोज को इसी धारा के तहत जेल भेज दिया गया है।
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सियासी लोगों ने साधी चुप्पी
मंडी धनौरा। शालिनी की मौत का सियासी फायदा उठाने वाले राजनैतिक दल मामले का खुलासा होने के बाद चुप्पी साध गए हैं। दलित वर्ग की शालिनी की मौत को प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति से जोड़ते हुए विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने गांव जाकर सियासी रंग देने का प्रयास किया था। पुलिस भी विपक्षी दलों द्वारा मामले को तूल पकड़ता देख कर हरकत में आ गई थी। पुलिस अधीक्षक ने मामले का खुलासा करने के लिए जनपद के चारों सीओ के नेतृत्व में चार टीमों का गठन कर दिया था। 72 घंटे के भीतर ही मामले का खुलासा कर पुलिस ने अपनी छवि बचाई है वही दूसरी ओर मामले को सियासी रंग देने वालों के अरमान भी ठंडे कर दिए हैं। संवाद