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साल के पहले दुर्लभ सूर्यग्रहण पर लोगों ने देखा अद्भुत नजारा
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अमरोहा। आषाढ़ अमावस्या के अवसर रविवार को साल का पहला सूर्यग्रहण पड़ा। सुबह आसमान में बादल छाए रहे। जबकि दोपहर में दुर्लभ सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा सूर्यदर्शी चश्मे और विशेष प्रकार के पिन होल कैमरे से देखा गया। लोग ग्रहण को देखकर काफी रोमांचित हुए। सूर्यग्रहण के रिंग ऑफ फायर का खूब आनंद लिया। सूर्यग्रहण को लेकर कुछ लोग परेशान दिखे। दिनभर विभिन्न तरह की आशंकाओं को लेकर अटकलें बनी रहीं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के विज्ञान संचारक और साइंस एक्टिविस्ट संतराम सिंह यादव ने बताया कि अमरोहा में सूर्य ग्रहण सुबह 10.24 बजे से शुरू होकर अपराह्न 1 बजकर 55 बजे समाप्त हुआ। 12 बजकर 9 मिनट पर यह अपने चरम पर था। इस समय 30 सेकेंड तक रिंग ऑफ फायर दिखाई दिया। अर्थात सूर्य में आग का छल्ला नजर आया। यह एक खगोलीय घटना है, जब सूर्य-चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक सीध में आ जाते है और सूर्य व पृथ्वी के बीच में चंद्रमा होता है, तो इस प्रकार की खगोलीय घटना घटित होती है। सूर्य ग्रहण के समय सूर्य-पृथ्वी के सबसे निकट और पृथ्वी पर चंद्रमा की दूरी सबसे अधिक होती है। एक वर्ष में कम से कम दो और अधिक से अधिक पांच बार सूर्यग्रहण हो सकते है। वर्ष 1935 में पांच सूर्य ग्रहण देखे गए थे। 29 मई 1919 को पूर्ण सूर्यग्रहण हुआ। इस दिन ब्राजील में महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने सापेक्ष तावाद के सिद्धांत की खोज की थी। एक वर्ष में सात बार से अधिक सूर्य और चंद्र ग्रहण नहीं होते हैं। काजीपुरा सादात गांव में दुर्लभ सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा सूर्यदर्शी चश्मे और विशेष प्रकार के पिन होल कैमरे से दिखा गया है। बच्चों और बड़ों ने सूर्यग्रहण के रिंग ऑफ फायर का खूब आनंद लिया। हालांकि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं ने सावधानियां बरतीं। इस दौरान घरों में कैद रहीं।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के विज्ञान संचारक और साइंस एक्टिविस्ट संतराम सिंह यादव ने बताया कि अमरोहा में सूर्य ग्रहण सुबह 10.24 बजे से शुरू होकर अपराह्न 1 बजकर 55 बजे समाप्त हुआ। 12 बजकर 9 मिनट पर यह अपने चरम पर था। इस समय 30 सेकेंड तक रिंग ऑफ फायर दिखाई दिया। अर्थात सूर्य में आग का छल्ला नजर आया। यह एक खगोलीय घटना है, जब सूर्य-चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक सीध में आ जाते है और सूर्य व पृथ्वी के बीच में चंद्रमा होता है, तो इस प्रकार की खगोलीय घटना घटित होती है। सूर्य ग्रहण के समय सूर्य-पृथ्वी के सबसे निकट और पृथ्वी पर चंद्रमा की दूरी सबसे अधिक होती है। एक वर्ष में कम से कम दो और अधिक से अधिक पांच बार सूर्यग्रहण हो सकते है। वर्ष 1935 में पांच सूर्य ग्रहण देखे गए थे। 29 मई 1919 को पूर्ण सूर्यग्रहण हुआ। इस दिन ब्राजील में महान वैज्ञानिक आइंस्टीन ने सापेक्ष तावाद के सिद्धांत की खोज की थी। एक वर्ष में सात बार से अधिक सूर्य और चंद्र ग्रहण नहीं होते हैं। काजीपुरा सादात गांव में दुर्लभ सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा सूर्यदर्शी चश्मे और विशेष प्रकार के पिन होल कैमरे से दिखा गया है। बच्चों और बड़ों ने सूर्यग्रहण के रिंग ऑफ फायर का खूब आनंद लिया। हालांकि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं ने सावधानियां बरतीं। इस दौरान घरों में कैद रहीं।
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