कांकाठेर में महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित कराई गई। वक्ताओं ने कहा कि स्वाभिमान के लिए जीवनभर संघर्ष करने वाले भारत माता के अमर सपूत राणा प्रताप के जीवन से हमें देश सेवा की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने जंगलों में घास की रोटी खाईं, लेकिन अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की।
क्षेत्र के गांव कांकाठेर निवासी ग्रामीणों ने राणा प्रताप की प्रतिमा को आदमपुर में प्रेम मूर्तिकार से तैयार कराया। बृहस्पतिवार को सार्वजनिक स्थल पर विधि विधान से प्रतिमा स्थापित कराई गई। इस दौरान ग्रामीणों ने हवन भी किया। राणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित कराते हुए ग्रामीणों ने कहा कि राणा प्रताप ने जीवनभर मुसीबत झेली, लेकिन मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की। यहां प्रतिमा स्थापित कराने का यही मकसद है कि लोग उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने देश की सेवा का प्रण ले सकें। इस मौके पर भूप सिंह, रतन सिंह, ऋषिपाल , मनोहर, ब्रह्म सिंह, सतपाल, गंगादास, हरिओम सिंह आदि मौजूद रहे।