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Amroha News: दो माह में सांपों ने 113 लोगों को डसा, आठ की जान गई
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अमरोहा। बारिश के दिनों में जिले में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई हैं। जून और जुलाई में 113 लोगों को सांप ने डसा, जिनमें आठ की मौत हो गई। जिला आपदा प्रबंधन की ओर से दो मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता दी गई है, जबकि छह मृतकों के परिजनों ने सहायता के लिए आवेदन नहीं किया।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सर्पदंश की ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों, जलभराव और झाड़ियों के आसपास हुईं। बारिश में सांपों के बिलों में पानी भरने से वे बाहर निकलते हैं, जिससे लोगों के संपर्क में आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
सर्पदंश से मौत के बाद कई परिवार सामाजिक मान्यताओं और पोस्टमार्टम को लेकर भ्रांतियों के कारण शव का पोस्टमार्टम नहीं कराते। इससे मृत्यु का चिकित्सकीय प्रमाण नहीं मिल पाता और सरकारी आर्थिक सहायता लेने में परेशानी होती है। किसी भी असामान्य मृत्यु में पोस्टमार्टम जरूरी है। इससे मृत्यु के कारण की पुष्टि होने के साथ सहायता की प्रक्रिया भी आसान होती है।
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जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेषज्ञ पवन शुक्ला ने बताया कि अमरोहा और हसनपुर ब्लॉक क्षेत्र में सर्पदंश से जान गंवाने वाले दो मृतकों के परिजनों ने आवेदन किया था। दोनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता दिलाई गई है।
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मुआवजा लेने के लिए जरूरी दस्तावेज
मृतक के आश्रितों को आर्थिक सहायता का लाभ लेने के लिए वोटर कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड की अटेस्टेड फोटो कॉपी के साथ क्लेम फार्म, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, एफआईआर और डीडीआर की कॉपी जमा करनी होगी। सभी दस्तावेज घटना के 15 दिनों के भीतर एसडीएम कार्यालय में जमा कराने होंगे। इसके बाद संबंधित अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे। अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर जिला आपदा प्रबंधन मुआवजा देने की सहमति प्रदान करेंगे।
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सांप काटने पर क्या करें
- सर्पदंश मेडिकल इमरजेंसी है, बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं, जहां जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम दिया जा सके।
- मरीज को शांत और स्थिर रखें, घबराने न दें और काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं।
- कसे सामान तुरंत हटा दें, अंगूठी, कड़ा, जूते, पायल या टाइट कपड़े उतार दें, क्योंकि सूजन बढ़ सकती है।
- काटने का समय याद रखें, संभव हो तो सर्पदंश का समय और घटना की जानकारी डॉक्टर को बताएं।
सांप काटने पर क्या न करें
- जहर चूसने या चीरा लगाने की कोशिश न करें, इससे मरीज को अतिरिक्त चोट और संक्रमण का खतरा हो सकता है।
- रस्सी या कसकर पट्टी न बांधें, टूर्निकेट लगाने से रक्त प्रवाह बाधित होकर स्थिति गंभीर हो सकती है।
- झाड़-फूंक या देसी इलाज में समय न गंवाएं, समय बर्बाद किए बिना सीधे अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है।
- सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें, इससे दूसरा व्यक्ति भी सर्पदंश का शिकार हो सकता है।
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48 घंटे निगरानी में रखा जाता है सर्पदंश का मरीज
सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि अस्पताल में आने पर सांप काटे के मरीज ब्लड की जांच होती है। कई बार लोग बंध लगा देते हैं, उसे तुरंत खुलवाया जाता है। इसके बाद ब्लडप्रेशर की जांच की जाती है। मरीज को लगाए जाने वाली ड्रिप में दो एंटी स्नेक वेनम वॉयल डाली जाती हैं। साथ ही 48 घंटे चिकित्सक की निगरानी में रखा जाता है।
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केस-एक
नगर पंचायत सैदनगली के मोहल्ला मेहंदीपुर निवासी किसान कुंवरपाल सिंह की बेटी त्रेषा कक्षा सात की छात्रा थी। 17 जुलाई को उसे सांप ने काट लिया था जिसके चलते उसकी मौत हो गई।
केस-दो
गजरौला निवासी अरुण कुमार को घर में सोते समय सांप ने उसे कनपटी पर डस लिया था झाड़-फूंक के चलते उसकी भी नौ जून को मौत हो गई थी।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, सर्पदंश की ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों, जलभराव और झाड़ियों के आसपास हुईं। बारिश में सांपों के बिलों में पानी भरने से वे बाहर निकलते हैं, जिससे लोगों के संपर्क में आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
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सर्पदंश से मौत के बाद कई परिवार सामाजिक मान्यताओं और पोस्टमार्टम को लेकर भ्रांतियों के कारण शव का पोस्टमार्टम नहीं कराते। इससे मृत्यु का चिकित्सकीय प्रमाण नहीं मिल पाता और सरकारी आर्थिक सहायता लेने में परेशानी होती है। किसी भी असामान्य मृत्यु में पोस्टमार्टम जरूरी है। इससे मृत्यु के कारण की पुष्टि होने के साथ सहायता की प्रक्रिया भी आसान होती है।
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जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेषज्ञ पवन शुक्ला ने बताया कि अमरोहा और हसनपुर ब्लॉक क्षेत्र में सर्पदंश से जान गंवाने वाले दो मृतकों के परिजनों ने आवेदन किया था। दोनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता दिलाई गई है।
मुआवजा लेने के लिए जरूरी दस्तावेज
मृतक के आश्रितों को आर्थिक सहायता का लाभ लेने के लिए वोटर कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड की अटेस्टेड फोटो कॉपी के साथ क्लेम फार्म, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, एफआईआर और डीडीआर की कॉपी जमा करनी होगी। सभी दस्तावेज घटना के 15 दिनों के भीतर एसडीएम कार्यालय में जमा कराने होंगे। इसके बाद संबंधित अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजेंगे। अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर जिला आपदा प्रबंधन मुआवजा देने की सहमति प्रदान करेंगे।
सांप काटने पर क्या करें
- सर्पदंश मेडिकल इमरजेंसी है, बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाएं, जहां जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम दिया जा सके।
- मरीज को शांत और स्थिर रखें, घबराने न दें और काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं।
- कसे सामान तुरंत हटा दें, अंगूठी, कड़ा, जूते, पायल या टाइट कपड़े उतार दें, क्योंकि सूजन बढ़ सकती है।
- काटने का समय याद रखें, संभव हो तो सर्पदंश का समय और घटना की जानकारी डॉक्टर को बताएं।
सांप काटने पर क्या न करें
- जहर चूसने या चीरा लगाने की कोशिश न करें, इससे मरीज को अतिरिक्त चोट और संक्रमण का खतरा हो सकता है।
- रस्सी या कसकर पट्टी न बांधें, टूर्निकेट लगाने से रक्त प्रवाह बाधित होकर स्थिति गंभीर हो सकती है।
- झाड़-फूंक या देसी इलाज में समय न गंवाएं, समय बर्बाद किए बिना सीधे अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है।
- सांप को पकड़ने या मारने की कोशिश न करें, इससे दूसरा व्यक्ति भी सर्पदंश का शिकार हो सकता है।
48 घंटे निगरानी में रखा जाता है सर्पदंश का मरीज
सीएमओ डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि अस्पताल में आने पर सांप काटे के मरीज ब्लड की जांच होती है। कई बार लोग बंध लगा देते हैं, उसे तुरंत खुलवाया जाता है। इसके बाद ब्लडप्रेशर की जांच की जाती है। मरीज को लगाए जाने वाली ड्रिप में दो एंटी स्नेक वेनम वॉयल डाली जाती हैं। साथ ही 48 घंटे चिकित्सक की निगरानी में रखा जाता है।
केस-एक
नगर पंचायत सैदनगली के मोहल्ला मेहंदीपुर निवासी किसान कुंवरपाल सिंह की बेटी त्रेषा कक्षा सात की छात्रा थी। 17 जुलाई को उसे सांप ने काट लिया था जिसके चलते उसकी मौत हो गई।
केस-दो
गजरौला निवासी अरुण कुमार को घर में सोते समय सांप ने उसे कनपटी पर डस लिया था झाड़-फूंक के चलते उसकी भी नौ जून को मौत हो गई थी।