{"_id":"5d68109a8ebc3e012c651401","slug":"school-bus-strike-jpnagar-news-mbd320235646","type":"story","status":"publish","title_hn":"दूसरे दिन भी वाहनों की हड़ताल, बच्चों और अभिभावकों का बुरा हॉल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दूसरे दिन भी वाहनों की हड़ताल, बच्चों और अभिभावकों का बुरा हॉल
विज्ञापन
अमरोहा में स्कूल वाहनों की हड़ताल के चलते छुट्टी के जोया रोड पर स्कूली बच्चों की भीड़।
- फोटो : JPNAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमरोहा। शासन की नई नीति के विरोध में निजी स्कूल बस संचालक दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। इसका खामियाजा अभिभावकों को उठाना पड़ा। बच्चों को लेकर सुबह-सुबह खुद स्कूलों की दौड़ लगानी पड़ी। दोपहर को छुट्टी के वक्त भीषण गर्मी में कई अभिभावक स्कूलों के बाहर बच्चों के इंतजार में पसीना बहाते रहे। कुछ अभिभावकों ने बच्चों को बाइक से स्कूल छोड़ा। सड़कों पर दुपहिया वाहनों के साथ कारों की भीड़ बढ़ने की वजह से जाम जैसे हालात रहे। छुट्टी के बाद भीषण गर्मी में बच्चे बिलबिलाते नजर आए। हालांकि आज (शुक्रवार) स्कूल वाहन समय से बच्चों को लेने के लिए पहुंचेंगे।
गुरुवार को भी स्कूल वाहन संचालक हड़ताल पर रहे। जिसके चलते स्कूली बच्चे और अभिभावक परेशान दिखे। हड़ताल के चलते दूसरे दिन भी स्कूल वैन और बसें बच्चों को लेने उनके घर नहीं पहुंचीं। अभिभावकों को सुबह जल्दी उठकर खुद ही बच्चों के साथ उनके स्कूल तक दौड़ लगानी पड़ी। कुछ अभिभावक बाइक पर चार-चार बच्चों को लादकर स्कूल ले जाते दिखे। उन्हें अन्य कामों को छोड़कर बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा। कई अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं पहुंचा सके। जिसके चलते कुछ स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी कम दर्ज की गई। दोपहर में अभिभावक जब अपने वाहनों से बच्चों को स्कूल से लेने पहुंचे तो रोजाना की अपेक्षा वाहनों की संख्या भी बढ़ गई। इसके चलते सुबह और दोपहर दोनों ही समय स्कूल और उनके आसपास जाम की स्थिति बनी रही। इसमें दोपहर में जाम में फंसने पर गर्मी के चलते बच्चों और अभिभावकों को खासा परेशान होना पड़ा।
एक-दूसरे को खोजते रहे बच्चे और परिजन
अमरोहा। स्कूलों में बच्चों को सुबह छोड़कर गए परिजनों को दोपहर में छुट्टी के समय बच्चों को खोजना पड़ा। स्कूलों की ओर से परिजनों को बच्चों को लेने के लिए एक निश्चित स्थान चिह्नित न करने के कारण परिजन बच्चों को तलाशते रहे। जो परिजन कभी बच्चों को लेने स्कूल नहीं आए उन्हें अधिक परेशानी हुई। इसी तरह आम दिनों में जहां बच्चे कक्षा से निकलकर सीधे बस में जाकर बैठते थे उन्हें भी परिजनों का इंतजार करना पड़ता।
विज्ञापन
राहत नहीं मिली तो बढ़ेगा किराया
अमरोहा। शासन ने नए नियम के तहत स्कूल के स्वामित्व वाली बस को 15 साल और निजी बस को 10 साल तक चलाने की अनुमति दी है। वाहन के लिए कई नियम और लागू कर दिए हैं। निजी स्कूल वाहन संचालक इसके विरोध में हैं। बस संचालकों का कहना है कि इससे उन पर काफी लोड बढ़ जाएगा। अगर यह नियम वापस नहीं हुआ तो उन लोगों को मजबूरन किराया बढ़ाना पड़ेगा। जो अभिभावकों की जेब के लिए भारी पड़ेगा।
विज्ञापन
गुरुवार को भी स्कूल वाहन संचालक हड़ताल पर रहे। जिसके चलते स्कूली बच्चे और अभिभावक परेशान दिखे। हड़ताल के चलते दूसरे दिन भी स्कूल वैन और बसें बच्चों को लेने उनके घर नहीं पहुंचीं। अभिभावकों को सुबह जल्दी उठकर खुद ही बच्चों के साथ उनके स्कूल तक दौड़ लगानी पड़ी। कुछ अभिभावक बाइक पर चार-चार बच्चों को लादकर स्कूल ले जाते दिखे। उन्हें अन्य कामों को छोड़कर बच्चों को स्कूल छोड़ना पड़ा। कई अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं पहुंचा सके। जिसके चलते कुछ स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी कम दर्ज की गई। दोपहर में अभिभावक जब अपने वाहनों से बच्चों को स्कूल से लेने पहुंचे तो रोजाना की अपेक्षा वाहनों की संख्या भी बढ़ गई। इसके चलते सुबह और दोपहर दोनों ही समय स्कूल और उनके आसपास जाम की स्थिति बनी रही। इसमें दोपहर में जाम में फंसने पर गर्मी के चलते बच्चों और अभिभावकों को खासा परेशान होना पड़ा।
विज्ञापन
एक-दूसरे को खोजते रहे बच्चे और परिजन
अमरोहा। स्कूलों में बच्चों को सुबह छोड़कर गए परिजनों को दोपहर में छुट्टी के समय बच्चों को खोजना पड़ा। स्कूलों की ओर से परिजनों को बच्चों को लेने के लिए एक निश्चित स्थान चिह्नित न करने के कारण परिजन बच्चों को तलाशते रहे। जो परिजन कभी बच्चों को लेने स्कूल नहीं आए उन्हें अधिक परेशानी हुई। इसी तरह आम दिनों में जहां बच्चे कक्षा से निकलकर सीधे बस में जाकर बैठते थे उन्हें भी परिजनों का इंतजार करना पड़ता।
विज्ञापन
राहत नहीं मिली तो बढ़ेगा किराया
अमरोहा। शासन ने नए नियम के तहत स्कूल के स्वामित्व वाली बस को 15 साल और निजी बस को 10 साल तक चलाने की अनुमति दी है। वाहन के लिए कई नियम और लागू कर दिए हैं। निजी स्कूल वाहन संचालक इसके विरोध में हैं। बस संचालकों का कहना है कि इससे उन पर काफी लोड बढ़ जाएगा। अगर यह नियम वापस नहीं हुआ तो उन लोगों को मजबूरन किराया बढ़ाना पड़ेगा। जो अभिभावकों की जेब के लिए भारी पड़ेगा।