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बदहाल सड़कों पर पथरीली रहेगी कांवड़ियों की डगर
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अमरोहा। फाल्गुन कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। शिवभक्तों का हरिद्वार से कांवड़ और गंगा जल लाने के लिए जाने का सिलसिला शुरू होने लगा है। आज से नौवें दिन महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक किया जाएगा। लेकिन इस बार कांवड़ियों की डगर पथरीली बनी हुई है। जिले की कई सड़कों की स्थिति बदहाल है। जिसके चलते कांवड़ियों को पैदल चलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
फाल्गुन कांवड़ यात्रा में लोगों की आस्था अधिक है। 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व है। इस दिन जिलेभर के 62 मंदिर और शिवालयों पर भगवान शंकर का जलाभिषेक किया जाएगा। महाशिवरात्रि से पहले तीन दिनों में शिवभक्तों की आस्था का सैलाब सड़कों पर उमड़ेगा। बाबा भोलेनाथ के भक्त गोमुख, नीलकंठ, ऋषिकेश और हरिद्वार से गंगाजल लेकर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अपने गतंव्य की ओर बढ़ेंगे। जनपद में शिवभक्त कांवड़ियों की डगर आसान नहीं है। नगर से देहात तक तमाम सड़कें बदहाल पड़ीं हैं। हरिद्वार से आने वाले शिभक्त बिजनौर से जिले के लिए प्रस्थान करेंगे, लेकिन धनौरा मार्ग जगह-जगह उधड़ा पड़ा है। जबकि गजरौला से हसनपुर मार्ग पूरी तर क्षतिग्रस्त है। सड़क पूरी तरह टूटी पड़ी है। सड़कों पर गड्ढे हो गए है और कंकड़ पड़े हैं। जबकि बिजनौर से अमरोहा आने के लिए सबमार्ग पर कंकड़ ही कंकड़ पड़े है। ऐसे में शिवभक्तों के लिए यह डगर पथरीली रहेगी। कंधे पर कांवड़ लेकर पैदल चलने वाले शिभक्तों को दिक्कतें होंगी, लेकिन जिम्मेदार अफसर शाही चुप्पी साधकर बैठे हैं।
आस्था के आगे कंकड़ भी फूल बन जाते हैं...
अमरोहा। प्राचीन बाबा गंगानाथ मंदिर के अध्यक्ष आशुतोष त्रिवेदी ने कहा कि जिस राह से कांवड़िये गुजर जाए, उस राह के कंकड़ भी उनके लिए फूल बन जाते हैं। लेकिन प्रशासनिक मशीनरी की मानसिकता का यह आलम है कि बदहाल मार्गों की दशा सुधारने के लिए शिवरात्री का आगाज होने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाए गए। कांवड़ यात्रा एक आस्था है। यहां पथरीले और कंकड़ भरे मार्ग भी भक्तों के लिए फूल बनकर राह को आसान करेंगे।
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इन जिलों के लाखों भक्त अमरोहा से गुजरेंगे
अमरोहा। फाल्गुन कांवड़यात्रा पर अमरोहा के अलावा मुरादाबाद, संभल, चंदौसी, बहजोई, बरेली, रामपुर, समेत कई जिलों के लाखों कांवड़िये हरिद्वार से जल लेकर अमरोहा होकर अपने गंतव्य के लिए रवाना होते हैं।
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फाल्गुन कांवड़ यात्रा में लोगों की आस्था अधिक है। 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का पर्व है। इस दिन जिलेभर के 62 मंदिर और शिवालयों पर भगवान शंकर का जलाभिषेक किया जाएगा। महाशिवरात्रि से पहले तीन दिनों में शिवभक्तों की आस्था का सैलाब सड़कों पर उमड़ेगा। बाबा भोलेनाथ के भक्त गोमुख, नीलकंठ, ऋषिकेश और हरिद्वार से गंगाजल लेकर भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अपने गतंव्य की ओर बढ़ेंगे। जनपद में शिवभक्त कांवड़ियों की डगर आसान नहीं है। नगर से देहात तक तमाम सड़कें बदहाल पड़ीं हैं। हरिद्वार से आने वाले शिभक्त बिजनौर से जिले के लिए प्रस्थान करेंगे, लेकिन धनौरा मार्ग जगह-जगह उधड़ा पड़ा है। जबकि गजरौला से हसनपुर मार्ग पूरी तर क्षतिग्रस्त है। सड़क पूरी तरह टूटी पड़ी है। सड़कों पर गड्ढे हो गए है और कंकड़ पड़े हैं। जबकि बिजनौर से अमरोहा आने के लिए सबमार्ग पर कंकड़ ही कंकड़ पड़े है। ऐसे में शिवभक्तों के लिए यह डगर पथरीली रहेगी। कंधे पर कांवड़ लेकर पैदल चलने वाले शिभक्तों को दिक्कतें होंगी, लेकिन जिम्मेदार अफसर शाही चुप्पी साधकर बैठे हैं।
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आस्था के आगे कंकड़ भी फूल बन जाते हैं...
अमरोहा। प्राचीन बाबा गंगानाथ मंदिर के अध्यक्ष आशुतोष त्रिवेदी ने कहा कि जिस राह से कांवड़िये गुजर जाए, उस राह के कंकड़ भी उनके लिए फूल बन जाते हैं। लेकिन प्रशासनिक मशीनरी की मानसिकता का यह आलम है कि बदहाल मार्गों की दशा सुधारने के लिए शिवरात्री का आगाज होने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाए गए। कांवड़ यात्रा एक आस्था है। यहां पथरीले और कंकड़ भरे मार्ग भी भक्तों के लिए फूल बनकर राह को आसान करेंगे।
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इन जिलों के लाखों भक्त अमरोहा से गुजरेंगे
अमरोहा। फाल्गुन कांवड़यात्रा पर अमरोहा के अलावा मुरादाबाद, संभल, चंदौसी, बहजोई, बरेली, रामपुर, समेत कई जिलों के लाखों कांवड़िये हरिद्वार से जल लेकर अमरोहा होकर अपने गंतव्य के लिए रवाना होते हैं।