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Amroha News: बढ़ते तापमान से प्रभावित हो सकती है गेहूं की पैदावार

Thu, 23 Jan 2025 02:05 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा Updated Thu, 23 Jan 2025 02:05 AM IST
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Rising temperatures may affect wheat production
डिडाैली क्षेत्र में खड़ी गेहूं की फसल। संवाद
अमरोहा।
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बढ़ते तापमान के साथ मौसम में हो रहे बदलाव से गेहूं की फसल पर नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। गेहूं और जौ की फसल को सर्द मौसम अनुकूल माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मौसम में हुए बदलाव से किसानों को गेहूं की पैदावार कम होने की चिंता सताने लगी है।
तेज धूप ने सर्द मौसम से भले ही राहत दी हो, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें जरूर खींच दी हैं। मौसम का यह बदलाव गेहूं और जौ की फसल के लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है। पिछले तीन दिनों में मौसम से खासा बदलाव देखने को मिला है तथा तापमान में भी तीन से चार डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। किसान हरपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने इस माह में पिछले कई सालों में इतना गर्म मौसम नहीं देखा है। दिन का तापमान 23 से 24 डिग्री तक पहुंच रहा है, जो गेंहू की फसल के लिए बिल्कुल भी अनुकूल नहीं है। तापमान बढ़ने से गेंहू की बढ़वार पर असर तो पड़ेगा ही, साथ ही उत्पादन पर सर्दी भी फर्क पड़ेगा।
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विशेषज्ञ बोले, उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है प्रभाव
अपर जिला कृषि रक्षा अधिकारी सतीश कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल को गर्मी से होने वाले प्रभाव को हीट स्ट्रेस कहते हैं। इससे गेहूं की बढ़वार रुक जाती है, और पौधे की लंबाई भी कम रह जाती है। फसल भी जल्दी पक जाती है और दाना भी पूरी तरह नहीं बन पाता है। गेहूं में बालियां बनने के बाद दाना बनने के लिए कुछ समय चाहिए होता है। मौसम परिवर्तन के कारण तेज हवा चलती है, और तापमान बढ़ जाता है। जिससे पुष्पन क्रिया शीघ्र हो जाती है, और बालियों में दाने नहीं भर पाते। इससे गेहूं के उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है।
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ऐसे करें बचाव
अपर जिला कृषि अधिकारी कहते हैं कि गेहूं और जौ की फसलों को बढ़ते तापमान के प्रभाव से बचाने के लिए दाना भराव और दाना निर्माण की अवस्था पर सैलिसिलिक अम्ल 7.5 ग्राम प्रति 100 लीटर का फॉलियर स्प्रे करना चाहिए। सैलिसिलिक अम्ल का पहला छिड़काव झंडा पत्ती अवस्था और दूसरा छिड़काव दूधिया अवस्था पर करने से काफी लाभ मिलता है। इससे गेहूं को प्रतिकूल परिस्थितियों में लड़ने की शक्ति मिलती है और निर्धारित समय पर पकने में मदद करता है, जिससे उत्पादन में गिरावट नहीं होती है। कहा कि गेहूं व जौ की फसल में जरूरत के अनुसार बार-बार हल्की सिंचाई करें। इसके अलावा 0.1 प्रतिशत पोटेशियम नाइट्रेट का 15 दिनों के अंतराल पर दो बार छिड़काव भी किया जा सकता है।
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